हृदय रोगियों में बढ़ रही है हार्ट फेलियर की समस्या

जयपुर . India में Heart Failure, उन Cardiovascular Diseases में से है, जिसकी पहचान सबसे कम हो पाती है और जिसकी वजह से इस Diseases से होने वाली मौतों की संख्या भी ज्यादा होती है।

By: Anil Chauchan

Updated: 05 Sep 2020, 12:59 PM IST

जयपुर . भारत ( India ) में हार्ट फेलियर ( Heart Failure ) , उन हृदय रोगों ( Cardiovascular Diseases ) में से है, जिसकी पहचान सबसे कम हो पाती है और जिसकी वजह से इस बीमारी ( Diseases ) से होने वाली मौतों की संख्या भी ज्यादा होती है।

नेशनल हार्ट फेलियर रजिस्ट्री ने हाल ही में एक साल के आंकड़ों का खुलासा किया, जिससे पता चलता है कि हार्ट फेलियर का पता लगने के 90 दिनों के भीतर तकरीबन 17 फीसदी मरीजों की मौत हो जाती है। ये उच्च मृत्यु दर स्तन और गर्भाशय ग्रीवा के कैंसर से जुड़ी मृत्यु दर के बराबर है।

हार्ट फेलियर को समझने के मामले में काफी अस्पष्टता है। इस रोग को भ्रमवश अक्सर दिल का दौरा मान लिया जाता है या फिर इसके लक्षणों को बुढ़ापे या अन्य बीमारियों के संकेत के रूप में अनदेखा किया जाता है। वर्तमान में, यह भारत में 10 मिलियन से अधिक रोगियों के साथ सभी सीवीडी के बीच बढ़ी हुई मृत्यु दर और बार-बार अस्पताल में भर्ती किए जाने का प्रमुख कारण है।

जयपुर के एसएमएस मेडिकल कॉलेज व अस्पताल के एडिशनल प्रिंसिपल व कार्डियोलॉजी विभाग के प्रमुख डॉ. एस.एम.शर्मा ने बताया कि आमतौर पर, कोई भी दिल की बीमारी जो पुरुषों में 55 वर्ष की आयु से पहले और महिलाओं में 65 वर्ष की आयु से पहले होती है, को असामयिक कहा जाता है। हार्ट फेलियर के बढ़ते मामले, मरीजों और उनके परिवारों पर एक अतिरिक्त सामाजिक-आर्थिक और भावनात्मक बोझ डालते हैं।

यह होता है हार्ट फेलियर -
हार्ट फेलियर एक पुरानी और लगातार बढ़ने वाली बीमारी है, जिसमें हृदय की मांसपेशियां समय के साथ कमजोर या कड़ी हो जाती है, जिससे हृदय का सामान्य रूप से पंप करना मुश्किल हो जाता है। इसके कारण सांस की तकलीफ, लेटते वक्त सही ढंग से सांस लेने के लिए ऊंचे तकिए की जरूरत, टखनों, पैरों और पेट में सूजन, अचानक वजन बढ़ना और लगातार थकान जैसे लक्षण दिखने लगते हैं।

हार्ट फेलियर की वजह क्या हैं -
कई सामान्य लक्षण और जोखिम हार्ट फेलियर का कारण बन सकते हैं। अगर पहले दिल का दौरा पड़ चुका हो, तो यह भी हार्ट फेलियर के प्रमुख कारणों में से एक है। सुस्त जीवन शैली, व्यायाम की कमी, तनाव, धूम्रपान, शराब का अत्यधिक सेवन, नशीली दवाओं के उपयोग आदि से जीवन शैली से संबंधित बीमारियों की आशंका बढ़ती है और यह भविष्य में हार्ट फेलियर के जोखिम को बढ़ाता है।

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