आफत बनी बारिश! खेतों में 2-2 फीट भरा पानी, फसलें चौपट, खेत देख बिलख रहे धरतीपुत्र

आफत बनी बारिश! खेतों में 2-2 फीट भरा पानी, फसलें चौपट, खेत देख बिलख रहे धरतीपुत्र

Dinesh Saini | Publish: Sep, 10 2018 11:47:28 AM (IST) Jaipur, Rajasthan, India

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जयपुर। प्रदेश में कई स्थानों पर हुई बारिश लोगों के लिए आफत बन गई है। खेतों में पानी भरने से फसलें बर्बाद होने से किसान बेहाल है तो रास्ते दरिया बनने से आमजन परेशान है। कई जगह पुलिया क्षतिग्रस्त होने से आवागमन बाधित हो गया है।

 

खेतों में 2-2 फीट भरा पानी
कोटा. जिले में हुई अतिवृष्टि के कारण सैकड़ों बीघा सोयाबीन और उड़द की फसल चौपट हो गई है। बारिश के दूसरे दिन खेतों में दो-दो फीट पानी भर हुआ था। किसान खेतों की मेड पर बेबस बैठकर बर्बादी का मंजर देखने को विवश है। ज्यादा खराबा सुल्तानपुर और इटावा क्षेत्र में हुआ है। प्रारम्भिक जानकारी के मुताबिक 50 हजार बीघा फसल चौपट हो गई है। जिले में रविवार को खराबे का जायजा लेने गए कोटा-बूंदी सांसद ओम बिरला किसानों की पीड़ा सुनकर भावुक हो गए। उन्होंने किसानों को विश्वास दिलाया कि आपदा की घड़ी में सरकार आपके साथ है। सर्वे कराकर उचित मुआवजा दिलाया जाएगा। बिरला कृषि विशेषज्ञों व प्रशासन के साथ घुटनों तक पानी से भरे खेतों में जाकर फसल खराबे की जानकारी ली।

 

पत्रिका टीम ने गांवों में जाकर फसलों की ग्राउण्ड रिपोर्ट तैयार की। सुल्तानपुर क्षेत्र की चार ग्राम पंचायतों बिलाई, मोरपा, खेरला, भुनेन के माल में सोयाबीन और उड़द की फसल को भारी नुकसान हुआ है। सीएडी के खेत सुधार कार्यक्रम (केचमेंट) में बनाई गई ड्रेनेज का पानी खेतों में घुस गया है। इस कारण खेत लबालब हो गए, पानी निकासी की कोई व्यवस्था नहीं है। चारों ग्राम पंचायतों में करीब 20 हजार बीघा फसल को नुकसान हुआ है। उड़द की फसल में 80 फीसदी तथा सोयाबीन की फसल में 50 से 60 फीसदी तक नुकसान हुआ है। लाखसनीजा गांव में भी कमोबेश यही स्थिति देखने को मिली। यहां भी खेतों में दो-दो फीट पानी भरा हुआ था। इटावा क्षेत्र के डेढ़ दर्जन गांवों में फसलों को नुकसान हुआ है।

 

बारां-अकलेरा मार्ग 7वें दिन भी बाधित
बारां. जिले भर में रविवार को वर्षा का दौर थम गया है। हालांकि शाहाबाद में रिमझिम बरसात अब भी जारी है। बरसात के बाद जिले की दो दर्जन से अधिक पुलियाओं और रपटों के टूट कर बहने की सूचना है। ग बारां-अकलेरा मार्ग पर सातवें दिन भी आवागमन बंद रहा। रैफी नदी की पुलिया का पाट बह गया है जबकि बिलासी नदी की पुलिया बहने से 40 गांवों का सम्पर्क टूट गया है।

 

सडक़ें बही, पुलियाएं ढही
भारी बारिश ने जिले की 100 से अधिक पक्की सडक़ों की सूरत बिगाड़ दी। सार्वजनिक निर्माण विभाग के आरम्भिक आकलन के अनुसार जिले में अब तक 61 सडक़ों के कई जगह से कटने व कई टुकड़ों में डामर व गिट्टी बहने की जानकारी सामने आई है।

 

उड़द व सोयाबीन समेत खरीफ में हुआ खराबा
बारां जिले में रविवार को कई क्षेत्रों में बारिश का पानी उतरने के बाद बर्बादी के मंजर नजर आए। सार्वजनिक निर्माण विभाग, जयपुर विद्युत वितरण निगम, जन स्वास्थ्य अभियांत्रिकी विभाग आदि सरकारी महकमों को सुविधाएं सुचारू करने की बड़ी चुनौती से जूझ रहे हैं। पीडब्ल्यूडी को 700 करोड़ से ज्यादा का नुकसान हुआ है।

 

खेत देख बिलख रहे धरतीपुत्र
सावन माह में अच्छी बारिश होने से जिले के किसान प्रफुल्लित थे, लेकिन भादो में उनकी उम्मीदें बरसात में डूब गई। जिले में शुक्रवार रात से जारी भारी बारिश के दौर के बाद रविवार को किसान खेतों पर पहुंचे तो बर्बादी का मंजर देख सिहर उठे। उड़द अब खेतों में सडऩे लगा है तो सोयाबीन, ज्वार व मक्का की फसलें भी गलने लगी हैं।

 

चित्तौडगढ़़
जिलेभर में चौथे दिन लगातार रविवार को भी मानसून सक्रिय रहा। दिनभर कहीं तेज तो कहीं रिमझिम हुई। जल संसाधन विभाग के अनुसार शाम पांच बजे तक 24 घंटे में ओराई बंाध पर 53, चित्तौडगढ़़ में 23, गंभीरी बांध पर 19, कपासन में 11, वागन बांध पर 10, भूपालसागर में 8 मिलीमीटर बारिश दर्ज की गई है।

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