कछुओं को रेल की पटरियों पर मरने से बचाने के लिए कारगर रहे जापानियों के बनाए 'अंडरपास'

कछुए प्यारे हो सकते हैं, लेकिन वे धीमे भी होते हैं, ऐसे में धड़धड़ा कर आती हुई ट्रेन उनकी जान ले सकती है, जब वे पटरियों को पार करने की कोशिश कर रहे होते हैं। ऐसे में जापान के हाइगो प्रान्त में कछुओं के लिए, रेलवे ऑपरेटरों और एक स्थानीय एक्वेरियम ने मिलकर एक अनूठा समाधान निकाला।

2002 और 2014 के बीच, कछुओं की वजह से ट्रेन संचालन में व्यवधान 13 बार दर्ज किया गया था। इसीलिए, 2015 में, पश्चिम जापान रेलवे कंपनी और कोबा में सुमा एक्वालाइफ पार्क की जॉइंट फोर्स ने पटरियों पर कछुए की मौतों को रोकने और ट्रेनों की देरी को रोकने के लिए कुछ करने का निश्चय किया। कई प्रयोग करने के बाद समझ आया कि पटरियों पर बीच बीच में यू-आकार का गड्ढा बना दिया जाए ताकि कछुए धातु की पटरियों के बीच फंसने से बचते हुए मौत के मुंह में न जाएं।

टेस्ट और निगरानी फुटेज से पता चला है कि ट्रेन की पटरियों को पार करने की कोशिश करने वाले कछुए अक्सर उनके बीच की जगह में गिर जाते हैं, जो उनके लिए बीच चलने के अलावा और कोई विकल्प नहीं छोड़ता। अफसोस की बात है, उनमें से कुछ धातु पटरियों के बीच फंस कर अनिवार्य रूप से मौत की ओर बढ़ जाते हैं।

रेलवे के प्रवक्ता ने बताया था कछुओं को समुद्र में जाने के लिए रेल लाइनों को पार करना पड़ता है। कोबे शहर के पास ट्रेन लाइनों के साथ कई महत्वपूर्ण बिंदुओं पर स्थापित यू-आकार के कंक्रीट के यह नन्हें 'अंडरपास' कछुए को पटरियों के बीच फंसने के खतरे से बचा रहे हैं। वे कछुओं को सुरक्षित रूप से निकालते हैं। नवंबर 2015 में यू-आकार के इन अंडरपास का उद्घाटन होने के बाद से पहले महीने में 10 कछुओं को बचाया गया था। अब तक हजारों कछुओं के लिए यह तारणहार साबित हुए हैं।

गौरतलब है कि समुद्र से कुछ ही दूरी पर स्थित, कोबे में रेल पटरियों पर मई से सितंबर तक बड़ी संख्या में रेंगने वाले जीव आते हैं।

Amit Purohit Desk
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