किसान के इस बेटे के जज्बे को दुनिया ने किया सलाम

हेनरी ने प्राइमरी स्कूल की पढ़ाई पूरी की तो पिता की मदद के लिए खेत में काम करने लगे। पिता भी चाहते थे कि जल्दी ही वे भी खेती करना सीख जाए ताकि आगे चलकर अच्छा किसान बनें लेकिन इनकी रुचि मशीनरी में थी और आगे चलकर फोर्ड मोटर कंपनी की नींव रखीं।

By: Archana Kumawat

Published: 18 Apr 2020, 06:09 PM IST

इस व्यक्ति का जन्म 1863 में अमरीका में एक किसान के घर में हुआ था। पिता एक साधारण किसान थे और माता गृहस्थी को संभालने का काम बखूबी कर रही थी। दरअसल, उनका परिवार काम-धंधे की तलाश में इंग्लैंड के सॉमरसेट से अमरीका में आकर बस गया था। पिताजी यहां खेती-बाड़ी कर परिवार का पालन-पोषण करने लगे। बचपन गरीबी में ही निकला। इनके पास अन्य बच्चों की तरह खेलने के लिए खिलौने नहीं थे। इसलिए घर की मशीनों से खेलने में मजा आने लगा था। पांच वर्ष की उम्र में उनका दाखिला पास ही के कस्बे की स्कूल में कराया गया। पांचवी पास करने के बाद आगे की पढ़ाई के लिए हैनरी को घर से ढाई किलोमीटर पैदल जाना पड़ता था। जब इन्होंने प्राइमरी स्कूल की पढ़ाई पूरी की तो पिता की मदद के लिए खेत में काम करने लगे। पिता भी चाहते थे कि जल्दी ही वे भी खेती करना सीख जाए ताकि आगे चलकर अच्छा किसान बनें। बचपन से मशीनरी के साथ खेलते-खेलते अब उन्होंने मशीनों को खोलना भी सीख लिया था। वह मशीन को खोलकर यह देखते थे कि यह किस तरह से काम कर रही है। अब उन्हें मशीनों के काम में मजा आने लगा था। खेती का काम उन्हें मजेदार नहीं लगा। पिता को उनकी मशीनों में रुचि पसंद नहीं थी। पिता के मना करने पर भी वे रात में पड़ौसियों और अन्य लोगों की घडिय़ा और अन्य यंत्र लाकर मुफ्त में मरम्मत किया करते थे। दिन में पिता के साथ खेती में जुटे रहते।
पैशन के लिए छोड़ा घर
पिता को जब इस बात पता चला कि उनके मना करने के बाद भी वे रातभर मशीनों की मरम्मत किया करते हैं तो वे बहुत नाराज हुए। लेकिन इनका मन तो मशीनों में ही लगता था। यही कारण था कि उन्होंने 16 वर्ष की उम्र में घर छोड़ दिया था। वे डीट्राइट शहर पहुंचे। यहां उन्होंने कई कारखानों में काम करके मशीनरी ज्ञान को और भी मजबूत बनाया। 1886 में वे आपस अपने घर लौटें। अब पिता ने भी उनके मशीनरी जुनून के आगे हार मान ली थी। पिता ने उन्हें 80 एकड़ की जमीन दी, जहां उन्होंने मशीन मरम्मत का अपना कारखाना खोला। एक साल बाद उन्होंने गैस इंजन और खेतों पर भारी काम करने वाली मशीन बनाने की योजना बनाई और फिर से डीट्राइट चले गए।
यहां से मिली जीवन को दिशा
डीट्राइट आने के बाद इन्होंने कभी पीछे मुडक़र नहीं देखा। 1890 में डीट्राइट एडिसन इलेक्ट्रिक कंपनी में काम करना आरंभ किया। वे दिन रात मेहनत किया करते थे। उनकी मेहनत को देखते हएु एक साल में ही उन्हें चीफ इंजीनियर बना दिया गया। उस समय उन्हें महीने के 125 डॉलर मिला करते थे लेकिन वे मात्र 25 डॉलर में ही जैसे-तैसे अपना खर्चा चलाते और बाकी 100 डॉलर बचाया करते थे। इस तरह उन्होंने 5000 डॉलर जमा कर लिए थे। इन पैसों से वे एक ऐसी कार बनाना चाहते थे जिसे आम आदमी भी खरीद पाए। इस तरह 1893 में पेट्रोल से चलने वाली पहली गाड़ी बनाई। इस गाड़ी की गति 25 मील प्रति घंटा थी। इन्होंने दूसरी गाडी बनाना प्रारंभ किया तथा 1899 में इलेक्ट्रिक कंपनी की नौकरी छोडक़र डीट्राइट ऑटोमोबाइल की कंपनी शुरू की। उनका सपना बस यही तक नहीं था। अब वे रेसिंग कार के निर्माण में जुट गए। इनकी गाड़ी ने कई रेस को जीता। इसके बाद उन्होंने अपनी कार कंपनी शुरू की। यह व्यक्ति कोई और नहीं बल्कि फोर्ड मोटर कंपनी के संस्थापक हेनरी फोर्ड थे। प्रथम वर्ष में फोर्ड मोटर कंपनी ने दो सिलिंडर तथा आठ अश्वशक्तिवाली 1,708 गाडिय़ां बनाई। इनकी बिक्री से कंपनी को शत-प्रतिशत लाभ हुआ। 1924 तक इनकी कंपनी ने 20 लाख गाडिय़ां, ट्रक और टै्रक्टर बनाए थे और 1931 तक इनके सब कारखानों में निर्मित गाडिय़ों की संख्या दो करोड़ तक पहुंच गई थी। फोर्ड मोटर्स ने हेनरी को दुनिया के सबसे अमीर व्यक्तियों में से एक बना दिया। 7 अप्रेल 1947 को इस व्यक्ति ने दुनिया को अलविदा कहा। इन्होंने लोगों को हमेशा यही सिखाया कि यदि आपमें जुनून है तो दुनिया की कोई ताकत आगे बढऩे से नहीं रोक सकती।

Archana Kumawat Desk
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