यहां हर दूसरे दिन दिखता है यह खौफनाक जानवर, डर के साये में रहते हैं लोग

यहां हर दूसरे दिन दिखता है यह खौफनाक जानवर, डर के साये में रहते हैं लोग

Nikhil Sharma | Publish: Sep, 21 2015 11:42:00 AM (IST) Jaipur, Rajasthan, India

वन विभाग का कहना है ब्यावर में नहीं एक भी पैंथर

ब्यावर से जवाजा और मसूदा तक मगरा क्षेत्र में आए दिन पैंथर दिखाई दे रहे हैं। कभी पैंथर पशुओं और इंसानों को अपना शिकार बना रहे हैं तो कभी पैंथर ग्रामीणों के हाथों मारे जा रहे हैं। बीते एक वर्ष में ब्यावर वन्य क्षेत्र के गांवों में पैंथर के हमले की कई घटनाएं सामने आई हैं।

इसके बावजूद वन विभाग को उक्त क्षेत्र में एक भी पैंथर नजर नहीं आया। विभाग की ओर से की गई वन्य जीव गणना के आंकड़े तो यही बताते हैं। चौंकाने वाली बात यह भी है कि गणना में विभाग को मात्र दो ही उल्लू मिले हैं, जबकि उल्लू काफी देखे जा सकते हैं।

केस  1

पीसांगन गोला मार्ग स्थित ब्यावर खास के निकट नया बाडिय़ा में 4 जुलाई 2015 को ढाई माह के शावक ने सिकंदर व विजय पर पंजे से वार कर दिया। बाद में ग्रामीणों ने उसे लाठियों से पीट पीट कर मार डाला। वन विभाग की टीम ने ही शावक अंतिम संस्कार कराया।

केस  2

जवाजा के निकटवर्ती शिवनगरी गांव में 19 मार्च 2015 को पैंथर पांच बकरियों सहित उनके बच्चों को उठा ले गया। 20 मार्च की सुबह गांव में बकरियों के शव देख ग्रामीणों में भय व्याप्त हो गया था। वन विभाग की टीम ने पगमार्क उठाए।

केस 3

टॉडगढ़-रावली अभयारण्य में दुधालेश्वर में 27 सितम्बर 2014 को भूख के मारे भटक रही मादा पैंथर ने एक महिला एवं पुजारी पर हमला कर घायल कर दिया। बाद में ग्रामीणों ने उसकी लाठियों से पीटकर हत्या कर दी।

केस 4

जवाजा व सेंदड़ा वन नाका की सरहद पर जवाजा वन नाका क्षेत्र में 17 जून 2014 को पैंथर का शव मिला। वन विभाग के अधिकारियों ने सेंदड़ा नर्सरी में पोस्टमार्टम कराकर उसका अंतिम संस्कार कर दिया था।

वन्य जीव गणना को बनाया मजाक

वन विभाग के अधिकारियों और कर्मचारियों ने वन्य जीव गणना की औपचारिकता पूरी कर मनमर्जी से आंकड़े तैयार किए हैं। मगरा क्षेत्र में जहां खेतों और लोगों के घरों में कछुए घूमते नजर आते हैं वहां विभाग को एक भी कछुआ नहीं मिला है। ब्यावर वन्य क्षेत्र में केवल दो उल्लू हैं, एक भेडिय़ा, दो लोमड़ी व दो जंगली बिल्ली मिली है। वन विभाग की एक साल पहले की गणना में उल्लू की संख्या 13 थी जो अब घटकर महज दो रह गई है।

वन्य जीवों की संख्या में इजाफा

वन विभाग की ओर से गत दिनों ब्यावर वन्य क्षेत्र में वन्य जीव गणना कराई गई है। इसमें बीते वित्तीय वर्ष की तुलना में इस वर्ष वन्य जीवों की संख्या में इजाफा हुआ है। गत वित्तीय वर्ष में जहां क्षेत्र में कुल 848 वन्य जीव थे, वहीं इस वर्ष इनकी संख्या बढ़कर 1 हजार 368 हो गई है। गत वर्ष की तुलना में इस वर्ष रोजड़े, मोर, तीतर, सारस, बतख, बटेर और नेवले की संख्या में बढ़ोतरी हुई है। वहीं सियार, उल्लू, भेडिय़ा, लोमड़ी, जंगली बिल्ली की संख्या में कमी आई है।

जीव 2014-15
नेवला 27 - 42

रोजड़े 166 - 263
खरगोश 34- 34

तीतर 93 -162
बंदर 33- 59

पाटागोह 06 - 08
मोर 423 - 682

सारस 01 - 14
उल्लू 13 - 02

बतख 02 -18
भेडिय़ा 02 -01

लोमड़ी 07- 02
जंगली बिल्ली 04 -02

बिज्जू छोटा 02 -
जरख 01 - 01

सेहली 01 - 03
बगुला 04 -

कछुआ 01 - 01

बटेर 02- 28
कुल योग 848 -1369

इनका कहना है...

वन क्षेत्र में कर्मचारियों की समस्या से अधिकारियों को अवगत करा दिया है। अन्य नाकों से कर्मचारियों को बुलाकर व्यवस्था कर ली जाती है। गत वर्ष के मुकाबले इस वर्ष जीवों की संख्या में बढ़ोतरी हुई है। उल्लू, भेडिय़ा, लोमड़ी व जंगली बिल्ली की संख्या भी महज दो ही गणना में सामने आई है।

- भंवर सिंह, क्षेत्रीय वन अधिकारी, ब्यावर


राजस्थान पत्रिका लाइव टीवी

खबरें और लेख पढ़ने का आपका अनुभव बेहतर हो और आप तक आपकी पसंद का कंटेंट पहुंचे , यह सुनिश्चित करने के लिए हम अपनी वेबसाइट में कूकीज (Cookies) का इस्तेमाल करते हैं। हमारी वेबसाइट पर कंटेंट का प्रयोग जारी रखकर आप हमारी गोपनीयता नीति (Privacy Policy ) और कूकीज नीति (Cookies Policy ) से सहमत होते हैं।
OK
Ad Block is Banned