अद्भूत - एक एेसी जगह, जहां खुद-ब-खुद लोग बोलने लगते हैं विदेशी भाषाएं

अद्भूत - एक एेसी जगह, जहां खुद-ब-खुद लोग बोलने लगते हैं विदेशी भाषाएं

बना द्रोणाचार्य विदेशी भाषाएं सीख रहे एकलव्य, पुष्कर में कम-पढ़े लिखे बोलने लगे हैं फ्यूजन लैंग्वेज, विदेशी पर्यटकों से व्यापार और व्यवहार के लिए जुबान की जुगलबंदी

तीर्थ नगरी के बाजार में फल सब्जी बेचने वाली ग्रामीण महिला हो या सरोवर के घाट पर पूजा कराने वाले तीर्थ पुरोहित, मारवाड़ी, हिन्दी या अंग्रेजी ही नहीं बल्कि विश्व के कई देशों की भाषा फर्राटे से बोल सकते हैं। विदेशी भाषाओं को सीखने के लिए उन्हें किसी शिक्षक या संस्था से प्रशिक्षण की आवश्यकता नहीं हुई, बस अतिथि देवो भव की परंपरा को अपनाते हुए विदेशी मेहमानों से बोलचाल में ही विभिन्न भाषाओं का ज्ञान हो गया। भाषाओं के आदान प्रदान के जरिए पुष्कर से सभ्यता और संस्कृति का आदान-प्रदान भी हो रहा है।

पुष्कर आने वाले विदेशी पर्यटकों के साथ व्यापार और व्यवहार में भाषा सबसे बड़ी समस्या होती है। लेकिन अब थड़ी पर सब्जी से लेकर दुकानों में सामान बेचने वालों तक ने इसका तोड़ निकाल लिया है। वे अब विदेशी पर्यटक को उनके देश की भाषा के आम प्रचलन के शब्दों को फ्यूजन लैंग्वेज (हिंदी-अंग्रेजी की जुगलबंदी) के साथ जोड़कर बातचीत करते हैं।

क्या है फ्यूजन लैंग्वेज

बाजार में बैठी सब्जी वाली व चाय बेचने वाला अनपढ़ या कम पढ़ा-लिखा, ठेले, रिक्शा वाला सबसे पहले राह चलते पर्यटक को हल्लोÓ बोलता है। उसके बाद बॉडी लैंग्वेज (शारीरिक हाव-भाव) के माध्यम से पर्यटक से बातचीत शुरू कर देता है। जर्मन के पर्र्यटक को कुछ बेचना होता है तो एक कम पढ़ा लिखा बालक व युवक सीधे एक शब्द बोलता है लंग-सम, लंग-सम इसका अर्थ होता है धीरे-धीरे। जर्मन भाषा सुनकर अचानक पर्यटक रुक जाता है।

उसके बाद उसे टोयरा (यानी महंगा), बिलिंग (यानी सस्ता) शब्द बोलकर समझाया जाता है। पर्यटक के राजी नहीं होने पर अंग्रेजी में ओके बोलकर सहमति जता दी जाती है। मतलब है कि पर्यटक से बात करने वाला सहमत हो गया है। इजरायली पर्यटक से बात करते समय अधिकांशत हल्लोÓ के साथ शुरू हुई बात की शुरुआत सलोम पुकार कर की जाती है। इसका अर्थ होता है नमस्ते।

उसके बाद महिला हो तो अखोती (बहन) तथा पुरुष पर्यटक हो तो अखी (भाई) कहा जाता है। इसके बाद माइनेनीम बोलकर हाथ मिलाने का ऑफर करता है। इसका अर्थ होता है हाऊ आर यू (आप कैसे हैं)। इसी प्रकार से स्पेन व इटली देश के पर्यटकों से बात की शुरुआत ओला तथा जापानी से नो ईकाई शब्दों से की जाती है। इसका अर्थ होता है नमस्ते।

संस्था न ही शिक्षक

पुष्कर के युवाओं को विदेशी भाषाओं की जानकारी देने के लिए न तो कोई संस्था यहां काम कर रही है न ही उनका कोई गुरु ही होता है। सब्जी और थड़ी वालों से लेकर रेस्तरां और होटल संचालक तक बोलचाल में ही अंग्रेजी, स्पेनिश, फ्रेंच सहित अन्य भाषाओं को सीखकर व्यवसाय को आगे बढ़ा रहे हैं।

ये हैं विदेशी भाषाएं

अमरीका, इंग्लैंड : अंग्रेजी

इजराइल : हिब्रू

इटली : इटालियन

जर्मनी : डॉयच

स्पेन : स्पेनिश

हॉलैंड - डच

फ्रांस - फ्रेंच


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