हर साल 6 करोड़ किराया देकर भी शहर में 'कचरा'

डोर—टू—डोर कचरा संग्रहण व्यवस्था होने के बाद भी हेरिटेज (Heritage Municipal Corporation) व जयपुर ग्रेटर नगर निगम (Jaipur Greater Municipal Corporation) हर साल संसाधनों के नाम पर करीब 6 करोड़ खर्च (Resources spent 6 crores) कर रहा है। यह मोटी रकम हर साल किराए के संसाधनों पर खर्च की जा रही है। फिर भी शहर में सफाई व्यवस्था का 'कचरा' हो रहा है।

By: Girraj Sharma

Updated: 12 Jul 2021, 09:52 PM IST

हर साल 6 करोड़ किराया देकर भी शहर में 'कचरा'

— हेरिटेज व जयपुर ग्रेटर नगर निगम में संसाधनों का टोटा
— दोनों निगम हर साल किराए पर ले रहे संसाधन
— बड़े नालों की सफाई हर साल नहीं हो पा रही
— मुख्य मार्गों पर भी जमा रहती है मिट्टी—गंदगी

जयपुर। डोर—टू—डोर कचरा संग्रहण व्यवस्था होने के बाद भी हेरिटेज (Heritage Municipal Corporation) व जयपुर ग्रेटर नगर निगम (Jaipur Greater Municipal Corporation) हर साल संसाधनों के नाम पर करीब 6 करोड़ खर्च (Resources spent 6 crores) कर रहा है। यह मोटी रकम हर साल किराए के संसाधनों पर खर्च की जा रही है। फिर भी शहर में सफाई व्यवस्था का 'कचरा' हो रहा है। संसाधन नहीं होने का बहाना बना हर साल शहर के बड़े नालों की सफाई तक नहीं करवा पा रहे है। जबकि मानसून में ये बड़े नाले ही जानलेवा साबित हो रहे है।

सरकार ने दो नगर निगम तो बना दिए, लेकिन संसाधनों को लेकर कुछ नहीं हुआ। इसका सबसे अधिक असर शहर की सफाई व्यवस्था पर पड़ रहा है। संसाधन नहीं होने से बड़े नालों की सफाई तक नहीं हो पाती है। वहीं गिने—चुने मुख्य मार्गों की सफाई तो किराए के रोड स्वीपर्स से हो रही है। नगर निगम के पास एक भी रोड स्वीपर नहीं है। दोनों नगर निगमों में सिर्फ 5 जेसीबी है, जो कचरा संग्रहण में लगी हुई है, ऐसे में बड़े नालों की सफाई नहीं हो पाती है। डंपर भी दोनों नगर निगमों के पास सिर्फ 22 ही है। वहीं ट्रेक्टर—ट्रॉली के नाम पर सिर्फ 7 ही है। ऐसे में दोनों नगर निगम हर साल किराए के संसाधनों पर करीब 6 करोड़ रुपए खर्च कर रहे है।

अब नकारा संसाधनों को बेचने की तैयारी
ग्रेटर नगर निगम में गैराजों में करीब 63 संसाधन नकारा पड़े हुए है, वहीं हेरिटेज नगर निगम की बात करें तो इनके गैराजों में करीब 10 संसाधन नकारा पड़े हुए है। इनमें जयपुर ग्रेटर नगर निगम की एक दिन पहले हुई लोकवाहन समिति की बैठक में नकारा 21 वाहनों को बेचने का प्रस्ताव भी पारित किया है। हालांकि इन नकारा, अनुपयोगी, स्क्रेप वाहन, मशीनों को भारत सरकार के उपक्रम मेटल स्क्रेप ट्रेड कॉरपोरेशन के माध्यम से नीलाम किया जाएगा। बाकि बचे हुए नकारा वाहनों—संसाधनों को भी बेचने की तैयारी है।

ये भी तैयारी
— नगर निगम ग्रेटर जयपुर के 6 गैराजों में अधिकारियों, समयपालक, वाहनचालक और अन्य स्वीकृत पदों को भरने की तैयारी
— गैराज शाखा के ऐसे कार्मिक जो अन्य शाखाओं में लगे हुए है, उन्हें वापस गैराज शाखा में लगाया जाएगा

Girraj Sharma Desk
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