अलवर पुलिस की हाईकोर्ट में खुली पोल

high court open Alwar police's pollनाराज कोर्ट ने तिजारा सीओ को तत्काल निलंबित करने के साथ अनुशासनात्मक कार्रवाई के दिए आदेश
दुष्कर्म के मामले में नाबालिग की उम्र भी बदली और सह अभियुक्त के खिलाफ पेश नहीं की चार्जशीट

By: KAMLESH AGARWAL

Updated: 02 Aug 2020, 09:10 PM IST

जयपुर।

अलवर पुलिस की पोल हाईकोर्ट में खुल गई। पुलिस ने बलात्कार पीड़िता नाबालिग की उम्र में हेरफेर में करने के साथ नामजद होने के बाद भी एक आरोपी के खिलाफ चार्जशीट ही दाखिल नहीं की। अब हाईकोर्ट ने 30 जुलाई को तिजारा सीओ को तत्काल निलंबित करने के साथ अनुशासनात्मक कार्रवाई के आदेश दिए हैं।


अलवर जिले के तिजारा में दर्ज बलात्कार के आरोपी की जमानत याचिका पर हाईकोर्ट में सुनवाई हुई। इस दौरान मामले में एक अन्य आरोपी के खिलाफ चार्जशीट दाखिल नहीं करने की जानकारी अदालत के सामने आई। इस पर अदालत ने जांच अधिकारी तत्कालीन तिजारा सीओ कुशाल सिंह को तलब किया। दस्तावेज और तिजारा सीओ की बात सुनने के बाद अदालत ने प्रथमदृष्टया माना कि जांच अधिकारी ने मामले में जानबूझकर गलती की है। सीओ के खिलाफ सख्त कार्यवाही जरूरी मानते हुए आरपीएस अधिकारी कुशालसिंह को तत्काल पद से निलंबित करने के आदेश दिये है। न्यायाधीश एसपी शर्मा ने राज्य के पुलिस महानिदेश को आदेश देते हुए कहा है कि निलंबन के साथ विभागीय कार्यवाही भी शुरू कर जानकारी अदालत को भी दे। इसी के साथ अदालत ने आरोपी मुनफीद की जमानत याचिका को खारिज करते हुए कहा कि पीड़िता के ट्रायल कोर्ट में बयान के बाद फिर से कोर्ट आ सकते है। अदालत ने ट्रायल कोर्ट को पीड़िता के बयान जल्द से जल्द दर्ज करने के आदेश दिए हैं।


यह कहा सफाई में

जब अदालत ने सीओ से तौफिक को आरोपी नहीं बनाने के संबंध में सवाल किया। इस पर सीओ ने सफाई में कहा कि जांच के दौरान आरोपी की लोकेशन हरियाणा आई थी इसी वजह उसका नाम केस से हटा दिया और उसके खिलाफ चार्जशीट भी पेश नहीं की। अदालत ने नाराजगी जाहिर करते हुए अग्रिम जांच नहीं करने पर सवाल खड़े किए।

ऐसे खुला मामला

मामले के दूसरे आरोपी मुनफिद ने हाईकोर्ट में दूसरी जमानत याचिका पेश की। याचिका पर सुनवाई के दौरान पीड़िता के 164 में दिए बयान सामने आए। जिसके बाद न्यायालय ने जांचाधिकारी तिजारा सीओ को तलब किया। तिजारा सीओ कुशालसिंह 21 जुलाई को पेश हुए और इसके बाद 28 जुलाई और 30 जुलाई को व्यक्तिगत तौर पर अदालत में पेश हुए।


13—14 की उम्र को बदला 19 में

थाने में जब मामला दर्ज करवाया गया तब भी पीड़िता की उम्र 13 साल बताई गई इसी के साथ जब 164 में बयान दर्ज करने के समय उम्र 14 साल बताई। इसके बाद भी सीओ ने रेडियोलॉजी रिपोर्ट का हवाला देते हुए 19 साल बताई। इस तरह से नाबालिग को बालिग बताकर केस को कमजोर करने का प्रयास किया।

KAMLESH AGARWAL Desk
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