एफएसएल व्यवस्था में सुधार नहीं होने पर उच्च न्यायालय की नाराजगी

न्याय मित्र की रिपोर्ट पर सरकार से मांगा जवाब

 

जयपुर।

उच्च न्यायालय ने विधि विज्ञान प्रयोगशाला में जांच और व्यवस्था में सुधार नहीं होने पर नाराजगी जाहिर की। न्यायालय ने नाराजगी जाहिर करते हुए कहा कि अदालत पिछले पांच साल से सुधार के लिए आदेश दे रहा है आखिरकार सरकार इस कर क्या रही है।
विधि विज्ञान प्रयोगशाला जांच में देरी पर लिए गए स्वप्रेरित प्रसंज्ञान लेकर दर्ज जनहित याचिका पर सुनवाई की। न्यायालय ने सरकार के जवाब से असहमत होकर न्याय मित्र की रिपोर्ट पर 29 जनवरी तक जवाब देने के लिए कहा है। सुनवाई के दौरान न्याय मित्र अधिवक्ता पंकज गुप्ता ने कहा कि अदालत के आदेशों के सक्रियता की वजह से लंबित केसों की संख्या 2014 के 13000 केसों से घटकर 2017 में 5300 तक आ गई थी। लेकिन एक बार फिर से दिसंबर 2019 में बढ़कर 14309 केस हो गई है। जिस पर न्यायाधीश संगीत लोढ़ा और न्यायाधीश इन्द्रजीत सिंह की खंडपीठ ने विधि विज्ञान प्रयोगशाला की कार्यप्रणाली और राज्य सरकार की मंशा पर सवाल उठाए। गौरतलब है कि उच्च न्यायालय ने 2014 में प्रसंज्ञान लेने के बाद कई आदेश दिए हैं लेकिन राज्य सरकार ने आदेशों की पूरी तरह से पालन नहीं की।

manoj sharma Desk
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