राजस्थान में यहां रहती है 'हिलेरी क्लिंटन' की 'ननद', हर साल यहां से जाती है उनके लिए रक्षाबंधन पर राखी!

राजस्थान में यहां रहती है 'हिलेरी क्लिंटन' की 'ननद', हर साल यहां से जाती है उनके लिए रक्षाबंधन पर राखी!

Rajesh | Publish: Mar, 14 2018 07:20:17 PM (IST) | Updated: Mar, 14 2018 07:29:42 PM (IST) Jaipur, Rajasthan, India

हिलेरी क्लिंटन के पिंकसिटी से एेसे रिश्ते हैं, जिन्हें ना तो यहां के लोग भुला सकते हैं और ना ही वहां के पूर्व प्रेसिडेंट बिल क्लिंटन...

जयपुर।

 

अमरीका की पूर्व विदेश मंत्री हिलेरी क्लिंटन मंगलवार दोपहर करीब साढ़े बारह बजे विशेष विमान से जोधपुर पहुंचीं। यहां पहुंचने पर उन्होंने एयरपोर्ट पर लोगों का हाथ हिला कर अभिवादन किया। हिलेरी क्लिंटन के पिंकसिटी से एेसे रिश्ते हैं, जिन्हें ना तो यहां के लोग भुला सकते हैं और ना ही वहां के पूर्व प्रेसिडेंट बिल क्लिंटन व उनकी पत्नी स्वंय हिलेरी।

 

आखिर कैसे बना ननद-भाभी का रिश्ता...
दरअसल, सन 2000 में अमेरिका के राष्ट्रपति जब भारत दौरे पर थे तो वह जयपुर के नायला गांव में भी आए तो यहां आने के बाद वह रिश्तों के एेसे बंधन में बंध गए कि उनका जन्मभर का रिश्ता इस गांव से जुड़ गया। नायला आए बिल क्लिंटन ने यहां की स्थानीय निवासी मोहनी देवी से राखी बंधवाकर उन्हें अपनी बहन बनाया। जिसके बाद बिल क्लिंटन 2002 में फिर से नायला आए और अपनी बहन मोहनी से मिलने उनके घर भी गए। इसके बाद मोहनी का रिश्ता एेसा क्लिंटन से एेसा जुड़ा कि उन्होंने अपने भाई के लिए हर साल रक्षा का सूत्र रक्षाबंधन को भेजना शुरू कर दिया।

 

मोहनी देवी की इच्छा थी की भाभी राष्ट्रपति बनकर आए...
गौरतलब है कि कुछ दिन पहले ही हिलेरी ने अमेरिका में यह बयान दिया था कि मेरी हार अमेरिकी महिलाओं की हार थी और उन्होंने मेरा साथ नहीं दिया। इस बयान के बाद हिलेरी की काफी आलोचना भी हुई थी। साथ ही नन्द मोहनी देवी की इच्छा थी की भाभी राष्ट्रपति बनकर आए लेकिन हिलेरी चुनाव में हार गई थी। मोहनी ने उत्साह के साथ कहा था की अब भाभी अमेरिका की राष्ट्रपति बनी तो पूरे गांव में जश्न का माहौल होगा और जैसा नाच गाना भाई के यहां आने के दौरान हुआ था वैसे ही नाचगाने के साथ पूरा गांव जीत की खुशियां मनाएगी। साथ ही हिलेरी के राष्ट्रपति बनते ही पूरे गांव में लड्डू बांटूंगी।

 

हिलेरी क्लिंटन जाना चाहती थी नासा ...
हिलेरी बचपन से ही पढ़ाई में तेज रही हैं। एक समय वे चांद की यात्रा करना चाहती थीं। इसके लिए उन्होंने नासा में आवेदन भी किया था लेकिन उनका आवेदन उस वक्त अस्वीकार कर दिया गया था। अंत में सैली राइड को पहली अंतरिक्षयात्री बनाया गया था और वे अंतरिक्ष में जाने वाली पहली महिला थीं। उन्हें यह अवसर वर्ष 1983 में मिला था। हिलेरी ने खुद कई बार इस बात का जिक्र किया है कि वह अंतरिक्ष यात्री बनकर चांद पर जाना चाहती थी।

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