ये वक्त भी गुजर जाएगा

इस मुश्किल दौर से जल्दी उबरने का संदेश दे रही हैं ये रचनाएं

By: Chand Sheikh

Published: 04 Aug 2020, 11:19 AM IST

कविताएं

राजेश मोरे

जगा उम्मीद, भरोसे की हवा को
ये निराशा, डर का बादल भी छट जाएगा।
ये वक्त भी गुजर जाएगा।

माना कि तुझ में हिम्मत बहुत है
सेकड़ों किलोमीटर पैदल चल कर
तू अपने घर चल जाएगा।
धुंध सरकारी आश्रय ले पनाह उसमें
ये वक्त भी गुजर जाएगा।

है अगर तेरे घर में सीमित अनाज तो
दो जून की रोटी का जुगाड़ हो जाएगा
ये वक्त भी गुजर जाएगा।

है अगर तुझे कोरोना ना घबरा तू
जगा अपने आत्म विश्वास को
ये संकट भी तर जाएगा।
ये वक्त भी गुजर जाएगा।


कर लक्ष्मण रेखा पालन
ये कोरोना रूपी रावण भी भाग जाएगा।
ये वक्त भी गुजर जाएगा।

मौत तो सबको आनी है,
मरा तो है जो लड़ा नही,
बढ़ा हौसला कर मैदान फतह
तू भी कोरोना वारियर्स कहलाएगा।
ये वक्त भी गुजर जाएगा
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अभी मैं हारा नहीं
स्नेहा टेलर

माना कि 'मुश्किल ए दौर 'है
कठिन ही नहीं कठोर है

संकट नही संकट काल है
विकट नहीं विकराल है

मायूस नहीं मजबूर हूं मैं
घायल नही कमजोर हूं मैं

अभी थोड़ा सा थम गया हूं
कुदरत तेरी नाराजगी के चलते
कुछ दब सा गया हूं।

मगर अभी मैं हारा नहीं
बाधाओं से डरा नही।

माना कि
स्थिति थोड़ी तंग है मेरी
मगर यह जंग है मेरी

इस जंग से जीतने को मैं
योद्धा सा लड़ जाऊंगा
मैं भारत हूं
मैं फिर विजेता बन जाऊंगा

मैं भारत हूं
मैं फिर जगतगुरु कहलाऊंगा....

Chand Sheikh Desk
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