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नव संवत्सर से पहले निभाई ये परंपरा... पढ़िए खबर

Hindu Nav Samvatsar 2079 जयपुर। चैत्र शुक्ल प्रतिपदा पर शनिवार को भारतीय नवसंवत्सर शुरू होगा। नल नामक नव-संवत की पूर्व संध्या पर शुक्रवार को राजकीय महाराज आचार्य संस्कृत महाविद्यालय में नव पंचांग श्रवण का आयोजन किया गया। इसमें जयपुर के संत-महंत, ज्योतिषाचार्य और पंचांगकर्ताओं ने विक्रम् संवत् 2079 के राजनैतिक, सामाजिक व आर्थिक पक्षों पर विचार रखें।

जयपुर

Published: April 01, 2022 07:30:41 pm

Hindu Nav Samvatsar 2079 जयपुर। चैत्र शुक्ल प्रतिपदा पर शनिवार को भारतीय नवसंवत्सर शुरू होगा। नल नामक नव-संवत की पूर्व संध्या पर शुक्रवार को राजकीय महाराज आचार्य संस्कृत महाविद्यालय में नव पंचांग श्रवण का आयोजन किया गया। इसमें जयपुर के संत-महंत, ज्योतिषाचार्य और पंचांगकर्ताओं ने विक्रम् संवत् 2079 के राजनैतिक, सामाजिक व आर्थिक पक्षों पर विचार रखें।
प्राचार्य डॉ. भास्कर शर्मा श्रोत्रिय ने बताया कि नव संवत्सर के प्रारम्भ में किए जाने वाले धार्मिक कार्यों में वर्षफल के श्रवण की परम्परा रही है। वर्ष फल श्रवण के लिए पंचांग ज्ञान आवश्यक है। वैसे तो प्रतिदिन पंचांग श्रवण किये जाने की शास्त्रीय परम्परा है, लेकिन नव सम्वत्सर के अवसर पर नवीन पंचांग श्रवण की परम्परा विशेष है। उन्हेांने बताया कि पंचांग श्रवण के फल के सम्बन्ध में शास्त्रों में कहा गया है कि जो पंचांग का ज्ञान रखता है, उसे पाप स्पर्श नहीं करता। तिथि श्रवण करने से श्री की प्राप्ति होती है, वार का श्रवण करने से आयु की वृद्धि होती है। नक्षत्र श्रवण करने से पापों का नाश होता है। योग का श्रवण करने से रोग मुक्ति होती है एवं करण का श्रवण करने से कार्यसिद्धि होती है। पंचांग के फल को सुनने से गंगा स्नान का फल प्राप्त होता है।
संयोजक प्रो. शालिनी सक्सेना ने बताया कि इस अवसर पर प्रो. विनोद शास्त्री के अलावा महंत बालमुकुन्दाचार्य, सरस निकुंज के अलबेलीशरण, सुदर्शनाचार्य, संस्कृत एवं शिक्षा विभाग के अतिरिक्त मुख्य सचिव पी. के. गोयल, उपशान सचिव मोहम्मद सलीम खान, संस्कृत विभाग के निदेशक प्रो. दीरघराम रामस्नेही, जानकी वल्लभ शर्मा, डॉ. उमेश दास, डॉ. आलोक शर्मा, आचार्य अनिल शास्त्री आदि ने भारतीय नव-संवत् के वैज्ञानिक चिन्तन पर शोध की महत्ता प्रकट की। समन्वयक डॉ. रवि शर्मा ने बताया कि इस मौके पर विक्रम् संवत् 2079 के राजनैतिक-सामाजिक-आर्थिक पक्षों पर विचार प्रकट किये।

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