हार्मोन असंतुतिल तो हो सकता है थायरॉइड

हार्मोन असंतुतिल तो हो सकता है थायरॉइड...

By: Anil Chauchan

Published: 24 May 2018, 06:23 PM IST

जयपुर .
हार्मोन का असंतुलित होना ही थायरॉइड बीमारी का असली कारण है। यह बीमारी आनुवांशिक भी हो सकती है। वर्तमान में बदलती दिनचर्या और तनाव थायरॉइड ने भी इस समस्या को काफी बढ़ा दिया है। पुरुषों की तुलना में महिलाओं में यह बीमारी ज्यादा होती है। विश्व में 25 मई को विश्व थायराईड दिवस मनाया जाता है।
सीनियर एण्डोक्रेनोलोजिस्ट जीवन रेखा हॉस्पिटल, जयपुर डॉ. प्रेम प्रकाश पाटीदार ने बताया कि थायरॉइड एक ऐसा रोग है जो लगभग पूरी तरह से हॉर्मोंस पर निर्भर करता है। हमारे थायरॉइड ग्लैंड्स शरीर से आयोडीन लेकर इन्हें बनाते हैं। ये हारमोन हमारे मेटाबॉलिज्म को बनाए रखने के लिए जरूरी होते हैं। अधिकतर महिलाएं अपनी सेहद के प्रति लापरवाह होती हैं और वे थायरॉयड के लक्षणों को मामूली थकान समझकर अनदेखा कर देती हैं, पर ऐसा करना उचित नहीं है, क्योंकि भविष्य में इससे कई स्वास्थ्य समस्याएं पैदा हो सकती हैं।


डॉ. प्रेम प्रकाष पाटीदार ने बताया कि थायरॉयड ग्लैंड हमारे गले के निचले हिस्से में स्थित होता है। इससे खास तरह के हॉर्मोन टी3, टी.4 और टीएसएच (थायरॉयड स्टिम्युलेटिंग हॉर्मोन) का स्राव होता है, जिसकी मात्रा के असंतुलन का सेहत पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ता है। शरीर की सभी कोशिकाएं सही ढंग से काम कर सकें, इसके लिए इन हॉर्मोस की जरूरत होती है। इसके अलावा मेटाबॉलिज्म की प्रक्रिया को नियंत्रित करने में भी टी 3 और टी 4 हॉर्मोन का बहुत बडा योगदान होता है।


जन्म के 38 घंटे के भीतर जांच जरूरी -
नवजात के जन्म के 38 घंटे के अंदर थायरॉइड की जांच अवश्य करवानी चाहिए। इसे यूनिवर्सल स्क्रीनिंग प्रोसीजर कहा जाता है। जन्म के तुरंत बाद अगर नवजात में थायरॉइड का पता लगता है तो उसे मानसिक और शारीरिक विकास का न होना, एक वर्ष से तीन वर्ष होने के बाद भी चलने और बोलने में परेशानी होने जैसी समस्याओं से बचाया जा सकता है।


हाइपोथायरॉयडिज्म थायरॉइड है ज्यादा -
विशेषों के अनुसार आमतौर पर दो प्रकार की थायरॉयड संबंधी समस्याएं देखने को मिलती हैं। पहले प्रकार की समस्या को हाइपोथॉयरायडिज्म व दूसरे प्रकार की समस्या को हाइपरथायरॉयडिज्म कहते हैं। अब तक हुए रिसर्च में यह पाया गया है कि किसी भी देश की कुल आबादी में 4 से 10 प्रतिशत लोगों को हाइपोथायरॉयडिज्म और मात्र 1 प्रतिशत लोगों को हाइपरथायरॉयडिज्म की समस्या होती है। ये दोनों ही स्थितियां सेहत के लिए नुकसानदेह हैं।


आयोडाइज्ड नमक का सेवन जरूरी -
थायरॉइड की बीमारी बिना आयोडाइज्ड नमक खाने के कारण होती है। इसलिए हमेशा आयोडाइज्ड नमक का ही खाने में प्रयोग करना चाहिए। कई बार थायराइड की बीमारी ऑटो इम्यून थायरॉइड डिजीज के कारण भी होती है। हार्ट और मनोरोग के मरीजों में अधिक हार्ट और मनोरोग की दवा खाने के कारण भी यह बीमारी हो सकती है। इसलिए बिना डॉक्टरों के परामर्श के हार्ट और मनोरोगियों की दवाएं नहीं लेनी चाहिए

Anil Chauchan Desk
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