कैसे रुकेंगे बाल विवाह, हो रही महज खानापूर्ति

Vishnu Sharma

Publish: Apr, 17 2018 07:43:35 PM (IST)

Jaipur, Rajasthan, India
कैसे रुकेंगे बाल विवाह, हो रही महज खानापूर्ति

चार साल 32 मामले, सजा एक को भी नहीं,आधे मामलों में एफआर

विष्णु शर्मा /जयपुर
चार साल 32 मामले सजा एक को भी नहीं। प्रदेश में ऐसे ही रोके जा रहे हैं बाल विवाह। यह बात दूसरी है कि बाल विवाह रोकने के लिए कानून बना हुआ है, लेकिन कानून की सही ढंग से पालना नहीं होने के कारण रोक नहीं लग पा रही है। प्रभावी कार्रवाई नहीं होने से बाल विवाह करने वालों में भी किसी प्रकार का खौफ नहीं है। नेशनल क्राइम रिकॉर्ड ब्यूरो के अनुसार बाल विवाह के मामले में राजस्थान का देश में दसवां स्थान है।

दो दिन बाद आखातीज यानी शादी का अबूझ सावा है। प्रदेश में पिफर बाल विवाह होंगे और उन्हें रोकने के लिए होगी सरकारी खानापूर्ति। आखातीज पर प्रदेश में गांव—ढाणी में बाल विवाह होते हैं, हालांकि जागरुकता और प्रशासन की सख्ती के कारण लोग चोरी—छिपे बाल विवाह करवाते हैं। बाल विवाह रोकने के लिए सरकार ने बाल विवाह प्रतिषेध अधिनियम 2006 बनाया हुआ है। एक नवंबर 2007 से लागू इस कानून में सजा का प्रावधान भी है, लेकिन शिकायत के बाद भी कार्रवाई नहीं हो पाती है, जिससे बाल विवाह नहीं रुक पा रहे हैं।

ऐसा है कानून का हाल ...
प्रदेश में बाल विवाह प्रतिषेध कानून के तहत पिछले चार साल में दर्ज मामलों को देखें तो आसानी से समझ में आ जाएगा कि बाल विवाह रोकने के लिए पुलिस, प्रशासन व अन्य संस्थाएं कितनी जागरूक है। गृह विभाग से हाल ही विधानसभा को दी गई जानकारी के अनुसार प्रदेश में जनवरी 2014 से दिसंबर 2017 तक चार साल में बाल विवाह प्रतिषेध अधिनियम के तहत 32 मामले दर्ज किए गए, लेकिन सजा एक में भी नहीं हुई है।

आधे से अधिक मामले बंद..
प्रदेश में चार साल में दर्ज 32 में से 15 केसों को एफआर लगाकर बंद कर दिया गया है। वहीं 16 प्रकरणों में चालान पेश किया गया, जिनकी कोर्ट में सुनवाई हो रही है। दूसरी ओर एक मात्र मामला करौली में पेंडिंग चल रहा है।

17 जिलों में ही बाल विवाह !..
जानकारी के अनुसार प्रदेश में चार साल में 17 जिलों में ही बाल विवाह प्रतिषेध अधिनियम के तहत मामले दर्ज किए गए। पुलिस रिपोर्ट के अनुसार इनमें सबसे ज्यादा 5 प्रकरण चित्तौड़गढ़ जिले में सामने आए। इनमें चार में चालान पेश किया गया, जबकि एक में एफआर लगाई जा चुकी है। इनके अलावा अजमेर , उदयपुर , कोटा शहर, करौली, जयपुर ? ग्रामीण, चूरू, जालौर, झालावाड़, दौसा, बाडमेर, बूंदी, भीलवाड़ा, राजसमंद, गंगानगर, सवाईमाधोपुर और हनुमानगढ़ में मामले दर्ज हुए हैं।

इन पर बाल विवाह रोकने की जिम्मेदारी...
बाल विवाह प्रतिषेध अधिनियम और नियमों में बाल विवाह रोकने के लिए जिला कलेक्टर, पुलिस अधीक्षक, पटवारी, एसडीएम, उपाधीक्षक, पुलिस निरीक्षक, ग्राम सेवक, सरपंच आदि पर बाल विवाह रोकने और जागरुकता की जिम्मेदारी है। वहीं कानून में एसडीएम को बाल विवाह प्रतिषेध अधिकारी बनाया हुआ है।

सजा व जुर्माने का प्रावधान...

बाल विवाह करने पर संबंधितों को दो साल की सजा और एक लाख रुपए जुर्माना तय है। बाल विवाह निषेध अधिनियम के तहत बाल विवाह कराने वाले माता-पिता, भाई-बहन, परिवार, बाराती, सेवा देने वाले जैसे टेंट हाउस, प्रिंटर्स, ब्यूटी पॉर्लर, हलवाई, मैरिज गार्डन, घोड़ी वाले, बैंड बाजे वाले, कैटर्स, धर्मगुरु, पंडित, समाज मुखिया आदि पर कार्रवाई हो सकती है।

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