दूसरे जिलों से पीछे रहे तो सर्वे-स्क्रीनिंग जोड़कर आंकड़े कर दिए साढ़े दस लाख

पत्रिका एक्सपोज : करौली सीएमएचओ की जुबान से निकला प्रदेश में छह करोड़ लोगो की स्क्रीनिंग का सच

By: jagdish paraliya

Updated: 19 Apr 2020, 12:52 AM IST

पहले हजारों तक रहे सीमित, अब एक दिन में दस लाख पार
करौली. प्रदेश में कोविड़—19 की रोकथाम के लिए चिकित्सा विभाग की ओर से छह करोड़ से अधिक लोगों की स्क्रीनिंग के दावे का सच शुक्रवार को सामने आ गया। करौली जिले में हजारों की स्क्रीनिंग के आंकड़ों को रफ्तार देने के लिए सर्वे और स्क्रीनिंग के अलग अलग आंकड़ों को एक साथ जोड़कर एक ही दिन में साढ़े दस लाख लोगों की स्क्रीनिंग दिखा दी गई। करौली के सीएमएचओ ने राजस्थान पत्रिका के साथ बातचीत में इसे स्वीकार भी किया और कहा कि अन्य जिले भी ऐसा ही कर रहे थे तो हमने भी ऐसा ही कर दिया। अब हम भी लाखों में शामिल हो गए।
जिले में स्क्रीनिंग की रफ्तार 40-50 हजार सदस्य प्रतिदिन की चल रही है। व्यावहारिक तौर पर चाहें ये मुमकिन न हो लेकिन विभाग की ओर से रोजाना तैयार की जा रही रिपोर्ट में स्क्रीनिंग के आंकड़ों को कुछ इसी तरह से पेश किया जा रहा है। इसका नतीजा यह है कि लगभग 18 लाख की आबादी वाले जिले में चिकित्सा विभाग के अनुसार 75 प्रतिशत से अधिक आबादी यानी लगभग 15 लाख सदस्यों की स्क्रीनिंग हो चुकी है।

सर्वे को बना दिया स्क्रीनिंग
असल में विभाग की ओर से सर्वे और स्क्रीनिंग के आंकड़ों को मिला देने से यह अचरज भरे आंकड़े सामने आ रहे हैं। सूत्रों के अनुसार 6 अप्रेल तक तो विभाग की ओर से स्क्रीनिंग में उन सदस्यों को गिना जा रहा था जिनकी चिकित्सक जांच कर रहे थे, लेकिन इससे आंकड़ा बढऋ नहीं रहा था। ऐसे में विभाग के अफसरों ने प्रदेश स्तर पर अपनी कार्य दक्षता को बेहतर प्रदर्शित करने के लिए सर्वे कार्य को भी 7 अप्रेल से स्क्रीनिंग बताना शुरू कर दिया। तभी से सरकार को और मीडिया को भेजी जा रही रिपोर्ट में स्क्रीनिंग की संख्या 10 लाख से पार चल रही है।

यह होता है सर्वे
इसमें व्यक्ति से सवाल पूछे जाते हैं और उसके लक्षणों को परखा जाता है। इसमें डोर टू डोर जाकर हर व्यक्ति से पूछताछ की जाती है।

यह होती है स्क्रीनिंग
इसमें मौजूदगी और थर्मोस्केनर के साथ जांच होती है। सवाल करके और उपकरणों के जरिए संबंधित व्यक्ति से पूछताछ और सवाल भी किए जाते हैं। उसके लक्षणों को भी देखा जाता है।

यह होती है जांच
अंत में संबंधित की जांच होती है, जिसे कोविड़ जांच कहा जाता है। यह जांच राज्य सरकार की ओर से अधिकृत केन्द्र पर ही
होती है।

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