Mutual Funds: जोखिम से बचना है तो बैलेंस्ड एडवांटेज फंड को चुनें

अगर आप चाहते हैं कि आपके निवेश ( investment ) पर कम जोखिम हो और औसत दर्जे का रिटर्न मिले तो आप म्यूचुअल फंड ( mutual funds ) के बैलेंस्ड एडवांटेज फंड (बैफ) का रास्ता चुन सकते हैं। जैसा कि नाम से ही स्पष्ट है कि म्यूचुअल फंड की यह कैटेगरी आपके निवेश को बैलेंस रखती है। यानी इक्विटी और डेट ( equity and debt market ) में आपके पैसे को यह निवेश करती है।

By: Narendra Kumar Solanki

Updated: 24 Oct 2020, 11:13 AM IST

जयपुर। अगर आप चाहते हैं कि आपके निवेश पर कम जोखिम हो और औसत दर्जे का रिटर्न मिले तो आप म्यूचुअल फंड के बैलेंस्ड एडवांटेज फंड (बैफ) का रास्ता चुन सकते हैं। जैसा कि नाम से ही स्पष्ट है कि म्यूचुअल फंड की यह कैटेगरी आपके निवेश को बैलेंस रखती है। यानी इक्विटी और डेट में आपके पैसे को यह निवेश करती है।
विश्लेषक यह सलाह देते हैं कि अगर आप म्यूचुअल फंड के निवेशक हैं तो आपकी पोर्टफोलियो में बैलेंस एडवांटेज फंड जरूर होना चाहिए। इस तरह के फंड एक ओपन एंडेड फंड होते हैं जो इक्विटी में 30 से 80 फीसदी का निवेश करते हैं। यह बाजार के वैल्यूएशन पर निर्भर होता है। इस बेंचमार्क के निफ्टी-50 टीआरआई ने पिछले 10 सालों में (15 अक्टूबर 2020) तक 7.7 फीसदी का रिटर्न दिया है। हालांकि इस कैटेगरी में कुछ फंड ऐसे हैं, जिन्होंने इससे ज्यादा रिटर्न दिया है।
अर्थलाभ के आंकड़े बताते हैं कि इस फंड में 26,174 करोड़ रुपए का असेट अंडर मैनेजमेंट रखनेवाला बड़ा फंड आईसीआईसीआई प्रूडेंशियल बैलेंस एडवांटेज फंड ने दस सालों में 10.5 फीसदी कंपाउंडेड एन्यूअल ग्रोथ रेट (सीएजीआर) की दर से रिटर्न दिया है। 2006 में लॉन्च यह फंड इस कैटेगरी में एक बड़ा फंड हाउस है, जिसने बाजार के सभी साइकल के प्रदर्शन को देखा है। इस फंड की स्कीम का प्रबंधन एस नरेन, रजत चांडक, इहाब दलवाई और मनीष बांथिया करते हैं। यह एक विविधीकृत पोर्टफोलियो है जिसमें लॉर्ज ब्लूचिप कंपनियां और एएए रेटिंग वाली डेट सिक्योरिटीज होती हैं। इसका मतलब यह है कि आपका जो निवेश है वह पूरी तरह से सुरक्षित और अच्छी कंपनियों में हो रहा है।
दरअसल, इस तरह के फंड जो हैं वे इन हाउस प्राइस टु बुक मॉडल का पालन करते हैं। ऐसे फंड्स डायनॉमिकली तरीके से इक्विटी और डेट के बीच निवेश का प्रबंधन करते हैं। इसका मतलब यह है कि जब बाजार का वैल्यूएशन ज्यादा होगा तो आपका निवेश डेट में चला जाएगा। जब बाजार का वैल्यूएशन कम होगा तो आपका निवेश इक्विटी में चला जाएगा। ऐसे फंड के पोर्टफोलियो की बात करें तो यह मुख्य रूप से इक्विटीज में निवेश करते हैं। ये डेरिवेटिव का इस्तेमाल कर पोर्टफोलियो नीचे की ओर के जोखिम को कम करते हैं। इस तरह के फंड का अलोकेशन लॉर्ज कैप में 87.6 फीसदी, मिड कैप में 10.9 फीसदी और स्माल कैप में 1.5 फीसदी होता है। 30 सितंबर तक इसका इक्विटी में शुद्ध एक्सपोजर 62 फीसदी रहा है। यह स्कीम फार्मा, पावर, टेलीकॉम और कंज्यूमर ड्यूरेबल में ओवरवेट है, क्योंकि यह सभी काफी आकर्षक वैल्यूएशन पर हैं। विश्लेषक कहते हैं कि इस तरह के फंड में कम से कम 5 सालों के निवेश का नजरिया रखना चाहिए। बैलेंस एडवांटेज फंड डेट संसाधन में फिक्स्ड इनकम, सरकारी सिक्योरिटीज, सरकारी कंपनियों और निजी कंपनियों में निवेश करते हैं। इससे संभावित रूप से पूंजी में बढ़त होती है। ये फंड पांच और सात सालों में भी बेहतर रिटर्न देते हैं। पांच साल में इस फंड ने 7.7 और सात साल में 11.3 फीसदी का रिटर्न दिया है।

Narendra Kumar Solanki Desk
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