scriptIf your land is in the ecological zone, you will get up to 50 percent | आपकी जमीन इकोलोजिकल एरिया में तो मिलेगा 50 प्रतिशत तक मुआवजा | Patrika News

आपकी जमीन इकोलोजिकल एरिया में तो मिलेगा 50 प्रतिशत तक मुआवजा

भूमि अधिग्रहण मुआवजे मामले में नीति जारी

जयपुर

Published: June 02, 2022 12:30:18 pm

भवनेश गुप्ता
जयपुर। सरकार ने जमीन अवाप्ति के बदले मुआवजे के रूप में जमीन देने को लेकर नई नीति लागू कर दी है। इसके तहत विकास कार्यों के लिए अटकी भूमि पर जल्द कब्जा लेने के लिए खातेदारों को बड़ी राहत दी गई है। इसमें अक्टूबर 2005 से पहले के अवार्ड (अवाप्ति की पूरी प्रक्रिया) हुए विशेष मामलों में मुआवजा (जरूरत के आधार पर) 15 से बढ़ाकर 25 प्रतिशत कर दिया है। वहीं, 2005 के बाद के मामलों में विकसित भूमि देने के लिए कई अतिरिक्त विकल्प दिए गए हैंं। खास यह है कि इकोलोजिकल जोन में विशेष प्रोजेक्ट के लिए 50 प्रतिशत तक विकसित भूमि देने का प्रावधान पहली बार लागू किया है। नगरीय विकास, आवासन एवं स्वायत्त शासन विभाग ने बुधवार को इसके आदेश जारी कर दिए। इससे अफसरों की मनमर्जी खत्म करने और पूरी प्रक्रिया को सरल बनाने का दावा किया है। निकायों विकल्प देने के लिए 31 दिसम्बर 2022 अंतिम तिथि होगी।
आपकी जमीन इकोलोजिकल एरिया में तो मिलेगा 50 प्रतिशत तक मुआवजा
आपकी जमीन इकोलोजिकल एरिया में तो मिलेगा 50 प्रतिशत तक मुआवजा
सभी आदेश, अधिसूचना समाहित
इसमें पूर्व में जारी सभी परिपत्र, आदेश और अधिसूचनाओं को समाहित किया गया है।

इन पर करना होगा फोकस
मास्टर प्लान की सड़क, बायपास, सेक्टर सड़क, ओवरब्रिज, एलीवेटेड रोड, स्लिप लेन, सड़कों की चौड़ाई का विस्तार सहित अन्य प्रोजेक्ट्स रुके हुए हैं। हालांकि, नई नीति का फायदा निजी मामलों में भी खातेदारों को मिलेगा।
मुआवजे की जमीन कब मिलेगी, दो तरह की स्थिति स्पष्ट
1. अवाप्तशुदा भूमि पर खातेदार का कब्जा होने के कारण निकाय ने योजना की क्रियान्वित नहीं की हो
2. निकाय ने मुआवजा राशि न्यायालय में जमा नहीं कराई हो। न ही खातेदार को नगद मुआवजा दिया हो।

बंदिश : इन मामलों में लागू नहीं
-ऐसे मामले जिनमें मुआवजे का अवार्ड नगद राशि का है
-निकाय ने भूमि का कब्जा ले लिया हो
-योजना की पूर्ण क्रियान्विति की जा चुकी हो
-न्यायालय में अवार्ड राशि जमा है या खातेदार को अवार्ड राशि का भुगतान किया जा चुका है और योजना की पूर्ण क्रियान्वति की चुकी है।
-अलसर व सिलिंग एक्ट के तहत अवाप्त भूमि हो।
-राजकीय विभाग या नगरीय विकास के स्वामित्व की भूमि के मामले।
-ऐसे प्रकरण, जिनका सक्षम समिति निर्णय हो चुका होगा। उन प्रकरणों को दोबारा नहीं खोला जाएगा, भले ही इन मामलों में सरकार से स्वीकृति मिलना बाकी हो।
यहां निकायों को अधिकार
आपसी समझौता या सहमति के मामलों में निकायों को मुआवजा प्रकरण निस्तारण के अधिकार दे दिए हैं। इसके लिए निकायों को राज्य सरकार से स्वीकृति नहीं लेनी होगी।

इकोलोजिकल जोन : यहां 50 प्रतिशत तक विकसित भूमि
मास्टर प्लान में इकोलोजिकल जोन या परिधि नियंत्रण क्षेत्र में विशेष प्रोजेक्ट के लिए भूमि अधिग्रहित की जाती है तो 50 प्रतिशत तक विकसित भूखंड दिया जाएगा। हालांकि, निकायों को इसके लिए राज्य सरकार से स्वीकृति लेनी होगी। सरकार ने पहली बार यह प्रावधान किया है। इसके तहत 1000 वर्ग मीटर का विकसित भूखंड दिया जाएगा। बिल्डिंग बायलॉज के तहत यहां 10 से 20 प्रतिशत कवरेज एरिया प्रावधान लागू हैं। इन क्षेत्रों में रिसोर्ट, मोटल, फार्म हाउस, इको फ्रेंडली हाउस और स्पोर्ट्स कॉम्पलेक्स सहित अन्य निर्धारित गतिविधि अनुज्ञेय हैं।
तीन माह में निपटाने होंगे प्रकरण
भूमि अधिग्रहण के मुआवजा प्रकरण निकायों को 3 महीने में निपटाने होंगे। इसके लिए ऐसे मामलों की सूची बनाई जाएगी।

खातेदार इन स्थितियों में दे सकेंगे विकल्प
-जमीन अधिग्रहण के अवार्ड में विकसित भूमि देने का उल्लेख हो या खातेदार ने पहले विकल्प दे दिया हो।
-खातेदार ने नगद मुआवजा नहीं लिया हो और ना ही निकाय ने न्यायालय में जमा किया हो।
-खातेदार ने नगद मुआवजा नहीं लिया ओर मौके पर उसका कब्जा है। न्यायालय में मामला लंबित है।
इसलिए पड़ी नई नीति बनाने की जरूरत
-निकायों में अवाप्ति के कई बड़ी संख्या में प्रकरण लंबे समय से अटके हैं।
-मुआवजा नहीं मिलने के कारण मौके पर खातेदारों के कब्जे होने के कारण कहीं सड़क रूकी हुई है तो कहीं स्कीम अटक गई तो कहीं प्रोजेक्ट आगे नहीं बढ़ पा रहा।
-कई निकायों में मुआवजा देने के नाम पर पिक एंड चूज के खेल की शिकायतें मिल रही हैं।
-अवाप्ति के पुराने प्रकरणों में दिए जाने वाले विकसित भूखंड के मुआवजे में मनमर्जी की शिकायतें भी हैं।

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