सौ करोड़ की जमीन पर किसकी है नजर, धड़ल्ले से हो रहे अवैध निर्माण

सौ करोड़ की जमीन पर किसकी है नजर, धड़ल्ले से हो रहे अवैध निर्माण

Mridula Sharma | Updated: 25 Aug 2018, 11:38:44 AM (IST) Jaipur, Rajasthan, India

जेडीए अफसरों ने आंखें मूंदी, झालाना जंगल से सटी भूमि पर तानी जा रही तीन मंजिला इमारत

जयपुर. शहर की बेशकीमती जमीन पर कुछ जनप्रतिनिधियों और उनके करीबियों की निगाह है। जगतपुरा इलाके में वन विभाग से सटी जेडीए की जमीन पर बीते कई माह से अधिकारियों की मिलीभगत से निर्माण कार्य चल रहा है।
स्थिति यह है कि अवैध निर्माण की शिकायत आयुक्त से भी की लेकिन एक मंत्री के आशीष की वजह से इसमें कोई कार्रवाई नहीं हुई। जेडीए सूत्रों की मानें तो इन जगहों को पट्टे देने की भी तैयारी की जा चुकी है। मौजूदा स्थिति की बात करें तो करीब 5000 वर्ग गज पर निर्माण बीते छह माह में हो चुका है।

 

वहीं एक निर्माणाधीन इमारत का काम भी चल रहा है। बाजार विशेषज्ञों के मुताबिक, निर्माणाधीन स्थान पर जमीन की कीमत दो से ढाई लाख रुपए प्रति गज है। ऐसे में यह जमीन 100 करोड़ के पार हो जाती है। सूत्रों ने बताया कि वर्ष 1981 में यह जमीन एक हाउसिंग सोसाइटी के नाम थी और बाद में इसका अवार्ड पारित करके जयपुर विकास प्राधिकरण ने अधिग्रहित कर लिया। जब जेडीसी वैभव गालरिया से इस बारे में पूछा गया तो उन्होंने कहा, इस मामले की शिकायत लेकर कुछ लोग मिले थे। संबंधित जोन को इसकी जांच के लिए कहा था। मामले की जांच चल रही है।

 

पीपीपी मॉडल पर देंगे 54 पार्क
जेडीए शहर के 54 पार्कों को पीपीपी मोड पर देने का मन बना चुका है। कार्यसमिति की 223 वीं बैठक में इस पर चर्चा की गई। स्थानीय निवासियों की विकास समिति, संस्था, चैरिटेबल ट्रस्ट व अन्य संगठनों को पार्कों की देखरेख का जिम्मा सौंपा जाएगा। बीते दिनों पार्कों को पीपीपी पर देने को लेकर सीएम वसुंधरा राजे ने निर्देश दिए थे। जेडीसी वैभव गालरिया की अध्यक्षता में हुई बैठक में टोंक रोड जंक्शन से कमला नेहरू नगर जंक्शन और गोपालपुरा बायपास पर कैट आइस व साईनेज बोर्ड लगवाने के लिए 29.72 करोड की स्वीकृति दी गई। द्रव्यवती नदी परियोजना के स्मार्ट कॉरिडोर में स्मार्ट सोल्यूशंस के लिए 50 करोड़ रुपए की स्वीकृति प्रदान की गई। जेडीए की आवासीय योजना गोविंदपुरा में आवंटित ईडब्ल्यूएस व एलआईजी के आवासों में नजराना राशि जमा होने में विलम्ब के कारण निरस्त आवंटनों के 52 प्रकरणों को ब्याज व जुर्माना लेकर बहाल करने का निर्णय लिया गया। मातानंदमयी मठ को एमओयू से आवंटित भूमि का एमओयू निरस्त कर संबंधित उपायुक्त को इस भूमि के बेहतर उपयोग हेतु कार्य योजना तैयार करने के निर्देश भी दिए गए।

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