scriptIllegal mining of gravel: Mafia is scolding millions | बजरी का अवैध खनन: माफिया लगा रहे लाखों की चपत | Patrika News

बजरी का अवैध खनन: माफिया लगा रहे लाखों की चपत

जिले में बजरी के अवैध खनन व परिवहन से माफिया मालामाल हो गए तथा सरकार को हर साल लाखों रुपए की चपत झेलनी पड़ी। जिले में बजरी खनन पर रोक लगाने का बड़ा नुकसान भवन निर्माताओं व संवेदकों को झेलना पड़ा है। सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद अलवर जिले में बजरी का खनन पर रोक लगा दी गई।

जयपुर

Published: July 23, 2022 11:33:50 pm

जिले में बजरी के अवैध खनन व परिवहन से माफिया मालामाल हो गए तथा सरकार को हर साल लाखों रुपए की चपत झेलनी पड़ी। जिले में बजरी खनन पर रोक लगाने का बड़ा नुकसान भवन निर्माताओं व संवेदकों को झेलना पड़ा है। सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद अलवर जिले में बजरी का खनन पर रोक लगा दी गई। पूर्व में बानसूर क्षेत्र में बजरी की तीन लीज थी, इनमें एक लीज बड़ी थी, शेष दो छोटी होने से ज्यादा प्रभावी नहीं थी। जिले में बजरी खनन पर रोक लगाने का नुकसान यह हुआ कि बाहरी क्षेत्रों से बजरी का अवैध परिवहन बढ़ गया। न्यायालय की रोक से बजरी खनन में लगे लोग दूर हो गए, लेकिन बाहरी क्षेत्रों से आने वाली बजरी परिवहन का बड़ा माफिया पनप गया। जिले में छोटे स्तर पर बजरी का अवैध खनन होने लगा।

Illegal Mining On Hills:
Illegal Mining On Hills:

अवैध के लिए कोई नियम नहीं
वैसे तो सरकार ने बजरी खनन व परिवहन के लिए नियम बनाए हुए हैं, लेकिन रोक के चलते बजरी का अवैध खनन व परिवहन बढ़ने के कारण सरकारी नियम भी बेअसर हो गए। इसका सबसे बड़ा नुकसान सरकार व भवन निर्माताओं को उठाना पड़ा। सरकार की रोक के बाद माफिया ने बजरी के दाम कई गुना बढ़ा दिए। यह बढ़े दाम न सरकार की तिजोरी में गए और न ही भवन निर्माता की जेब में। अवैध बजरी के पूरे खेल का लाभ मिला केवल माफिया को।

पुलिस प्रशासन पर सवालिया निशान
जिले में बजरी के अवैध खनन व परिहन के चलते पुलिस व प्रशासन पर सवालिया निशान लगने लगा है। पूरे जिले में पुलिस तंत्र की मौजूदगी के बाद भी बजरी का अवैध परिवहन पर रोक नहीं लग पाना पुलिस की कार्यप्रणाली पर प्रश्न चिह्न लगाता है। वहीं प्रशासन व खनन विभाग की कार्रवाई भी ऊंट के मुंह में जीरा समान रह पाती है। अवैध खनन पर रोक के लिए गठित एसआइटी अपने उद्देश्य में विफल होती दिखाई पड़ती है।

माफिया की अपनी स्कॉर्ट व सूचना तंत्र
बजरी माफिया अपनी स्कॉर्ट रखते हैं और इनका अपना अलग से सूचना तंत्र होता है। यह सूचना तंत्र बजरी खनन स्थल से लेकर भवन निर्माता के स्थल तक सक्रिय रहता है। इसमें भी ट्रैक्टर ट्रॉली के लिए एक जीप या बाइक पर सवार खबरी रहते हैं, जो कि आगे चलते हैं और किसी भी खतरे से ट्रैक्टर चालक को आगाह कर सुरक्षित रास्तों से निकाल देते हैं। वहीं डम्पर व अन्य बड़े वाहनों के लिए दो से तीन जीप आगे व पीछे चलती है। इनमें खबरी मार्ग पर कई किलोमीटर आगे तक के खतरे की सूचना देते चलते हैं। इस सूचना तंत्र के आगे पुलिस प्रशासन भी पस्त दिखाई देता है।

एक लीज का प्रस्ताव भेजा

जिले के बानसूर क्षेत्र में एक बजरी खनन लीज का प्रस्ताव सरकार को भेजा हुआ है।

राजेन्द्र चौधरी, खनि अभियंता अलवर

बजरी माफिया बाहरी क्षेत्रों से एक साथ बड़ी मात्रा में बजरी लाकर सरकारी जमीन व अन्य स्थानों पर ढेर लगा देते हैं। बाद में यहां से जरूरत के हिसाब से लोगों को ऊंची दरों में बेचते रहते हैं। जिला मुख्यालय पर बजरी के बड़े ढेर लोगों को दिखाई पड़ते हैं, लेकिन जिम्मेदार विभागों को नहीं दिखते। यही कारण है कि सरकारी जमीन व अन्य स्थानों पर लगे बजरी के ढेरों पर कार्रवाई नहीं होती।

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Anand Mani Tripathi

आनंद मणि त्रिपाठी (@aanandmani) राजनीति, अपराध, विदेश, रक्षा एवं सामरिक मामलों के पत्रकार हैं। पत्रकारिता के तीनों माध्यम प्रिंट, टीवी और आनलाइन में गहरा और अपनी तेज तर्रार रिपोर्टिंग के लिए जाने जाते हैं। पश्चिम बंगाल के कलकत्ता में जन्म हुआ। प्रारंभिक शिक्षा उत्तर प्रदेश के कानपुर और बस्ती में हुई। माध्यमिक शिक्षा नवोदय विद्यालय बस्ती, फैजाबाद और पूर्वोत्तर त्रिपुरा के धलाई जिले में हुई। अयोध्या के साकेत महाविद्यालय से स्नातक और 2009 में जेआईआईएमसी,दिल्ली से पत्रकारिता का डिप्लोमा किया। हरियाणा से पत्रकारिता आरंभ की। शिक्षा, विज्ञान, मौसम, रेलवे, प्रशासन, कृषि विभाग और मंत्रालय की रिपोर्टिंग की। इंवेस्टिगेटिव रिपोर्टिंग से शिक्षा और रेलवे विभाग के कई भ्रष्टाचार का खुलासा किया। रक्षा मंत्रालय के रक्षा संवाददाता पाठयक्रम-2016 पूरा किया। इसके बाद रक्षा मामलों की पत्रकारिता शुरू कर दी। चीन, पाकिस्तान और कश्मीर मामलों पर तीक्ष्ण नजर रहती है। लेफ्टिनेंट उमर फैयाज की हत्या 2017, राइफलमैन औरंगजेब की हत्या 2018, जम्मू—कश्मीर में बदले 2018 में बदले राजनीतिक समीकरण, पुलवामा हमला 2019, कश्मीर से 370 का हटना, गलवान घाटी मुठभेड़ 2020 को बेहद करीब से जम्मू और कश्मीर में रहकर ही कवर किया। कोरोना काल 2020 में भी लददाख से नेपाल तक की यात्रा चीन के बदलते समीकरण को लेकर की। इसके साथ ही लोकसभा चुनाव 2019 में जम्मू कश्मीर, हिमाचल प्रदेश, हरियाणा और पंजाब की रिपोर्टिंग की। 9 नवंबर 2019 को श्रीराम जन्म भूमि अयोध्या मामले में आए फैसले की अयोध्या से कवर किया। 2022 उत्तरप्रदेश् चुनाव को सहारनपुर से सोनभद्र तक मोटर साइकिल के माध्यम से कवर किया। पत्रकारिता से इतर आनंद मणि त्रिपाठी को संगीत और पर्यटन का जबरदस्त शौक है। इन्हें किसी भी कार्य में असंभव शब्द न प्रयोग करने के लिए जाना जाता है...

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