एचआर कॉइल पर आयात शुल्क एमएसएमई के लिए झटका

एंटी-डंपिंग ड्यूटी ( Anti-dumping duty ) और हॉट रोल्ड स्टेनलेस स्टील कॉइल ( hot rolled stainless steel coils ) के आयात (import) पर लगाए गए प्रतिकारी (काउंटरवेलिंग) ड्यूटी ने भारत के स्टेनलेस स्टील डाउनस्ट्रीम उद्योगों के लिए प्रमुख कच्चे माल को निषेधात्मक रूप से महंगा बनाकर एक जबरदस्त असंतुलन पैदा कर दिया है। भारत के एसएमएसई उद्योग ( SMSE industry ) को तैयार स्टेनलेस स्टील उत्पादों ( stainless steel products ) के आयात पर किसी भी प्रकार के प्रतिबंध के कारण दोहरी चोट का सामना करना पड़ा है।

By: Narendra Kumar Solanki

Published: 18 Dec 2020, 12:43 PM IST

अहमदाबाद। एंटी-डंपिंग ड्यूटी और हॉट रोल्ड स्टेनलेस स्टील कॉइल के आयात पर लगाए गए प्रतिकारी (काउंटरवेलिंग) ड्यूटी ने भारत के स्टेनलेस स्टील डाउनस्ट्रीम उद्योगों के लिए प्रमुख कच्चे माल को निषेधात्मक रूप से महंगा बनाकर एक जबरदस्त असंतुलन पैदा कर दिया है। भारत के एसएमएसई उद्योग को तैयार स्टेनलेस स्टील उत्पादों के आयात पर किसी भी प्रकार के प्रतिबंध के कारण दोहरी चोट का सामना करना पड़ा है।
क्रोमनी स्टील्स के निदेशक प्रतीक शाह ने डाउनस्ट्रीम सेगमेंट के स्टेनलेस स्टील पाइप और ट्यूब का उदाहरण देते हुए कहा कि, 'भारत में स्टेनलेस स्टील पाइप और ट्यूब बनाने में 500 से ज्यादा एमएसएमई लगे हैं, जिससे प्रति महीने एक हजार करोड़ राजस्व का उत्पादन होता है वहीं 2 लाख से अधिक लोगों को रोजगार प्रदान करता है। ये निर्माता दोहरे झटके से प्रभावित हैं। एक ओर एचआर कॉइल पर आयात शुल्क ने कच्चे माल की कीमतों को निषेधात्मक रूप से महंगा बना दिया है, जबकि दूसरी ओर, उपयोगकर्ताओं ने तैयार माल के आयात पर अधिक भरोसा करना शुरू कर दिया है, जो किसी भी प्रतिबंध के अभाव में अपेक्षाकृत सस्ते होते हैं, जोकि स्थानीय अपस्ट्रीम निर्माण उद्योगों के लिए अस्तित्व का संकट है।
पाइप और ट्यूब, बर्तनों, आर्किटेक्चर, बिल्डिंग एंड कंस्ट्रक्शन (एबीसी), ऑटोमोबाइल, रेलवे और ट्रांसपोर्ट (एआरटी), प्रोसेस इंडस्ट्रीज और व्हाइट गुड्स जैसे विविध उद्योगों से उठने वाली मांग के साथ स्टेनलेस स्टील की प्रति व्यक्ति खपत के मामले में भारत दुनिया के शीर्ष 15 देशों में शामिल है। ये उद्योग डाउनस्ट्रीम उत्पादों के माध्यम से अपनी मांग को पूरा करते हैं, जो हॉट एंड कोल्ड रोल्ड स्टेनलेस स्टील कॉइल्स से निकले होते हैं। हॉट-रोल्ड कॉइल इन सभी डाउनस्ट्रीम उत्पादों के लिए प्राथमिक कच्चा माल है।
भारत की स्टेनलेस स्टील की खपत 3.7 मिलियन टन प्रति वर्ष है, जिसमें हॉट रोल्ड और कोल्ड रोल्ड कॉइल्स विभिन्न डाउनस्ट्रीम उत्पादों में इनका उपयोग होता है। कोविड 19 की वजह से अस्थायी खामियों के बावजूद भारत में स्टेनलेस स्टील की मांग की वृद्धि दर 6.7 फीसदी सीएजीआर है, जो दुनिया में सबसे अधिक है। हालांकि भारत में स्टेनलेस स्टील की क्षमता (हॉट रोल्ड कॉइल्स) 2.2 मिलियन टन प्रति वर्ष रहती है, जिससे मांग-आपूर्ति का अंतर 1.5 मिलियन टन प्रति वर्ष से अधिक हो जाता है।
घरेलू आपूर्ति की मांग के साथ बने रहने के लिए भारत को स्टेनलेस स्टील का शुद्ध आयातक बनना पड़ा है, जो हजारों एमएसएमई इकाइयों को एक महत्वपूर्ण कच्चा उपलब्ध कराता है। इसलिए मांग की कमी को पूरा करने के लिए भारत जैसे बढ़ते देश को बनाए रखने के लिए आयात एक महत्वपूर्ण और वैध विकल्प है। देश के स्टेनलेस स्टील की मांग में कमी को हॉट रोल्ड कॉइल्स के आयात के माध्यम से आसानी से पूरा किया जा सकता है, जिसे कोल्ड-रोल्ड कॉइल्स और अन्य डाउनस्ट्रीम उत्पादों में आगे बढ़ाया जा सकता है। यह दृष्टिकोण मेक इन इंडिया के साथ-साथ आत्मनिर्भर भारत के दोहरे राष्ट्रीय एजेंडे को पूरा कर सकता है।

Narendra Kumar Solanki Desk
और पढ़े

राजस्थान पत्रिका लाइव टीवी

हमारी वेबसाइट पर कंटेंट का प्रयोग जारी रखकर आप हमारी गोपनीयता नीति और कूकीज नीति से सहमत होते हैं।
OK
Ad Block is Banned