Tryodashi Shradh 2020 : यश, धन—संपत्ति और वंश में वृद्धि के लिए त्रयोदशी पर इस मुहुर्त में करें श्राद्ध

ज्योतिषाचार्य पंडित सोमेश परसाई बताते हैं कि अल्प आयु में मृत बच्चों के श्राद्ध में दूध से तर्पण देने और खीर बनाने का विधान है। गुजरात में त्रयोदशी को काकबली एवं बालभोलनी तेरस के नाम से जाना जाता है। यह श्राद्ध कोई भी परिजन कर सकता है। इस दिन का श्राद्ध मुख्यत: फल्गु नदी में स्नान के बाद करने का विधान है।

By: deepak deewan

Published: 15 Sep 2020, 10:34 AM IST

Pitru Paksha 2020: Know about Pooja Vidhi and Importance of Trayodashi Magha Shradh

जयपुर. 15 सितंबर 2020 को पितृ पक्ष की त्रयोदशी तिथि और मंगलवार का दिन है। इस दिन त्रयोदशी श्राद्ध है। इस तिथि पर मृत्यु प्राप्त किए पितरों के साथ ही मृत बच्चों के श्राद्ध का भी विधान है। इसे तेरस श्राद्ध भी कहा जाता है।

ज्योतिषाचार्य पंडित सोमेश परसाई बताते हैं कि अल्प आयु में मृत बच्चों के श्राद्ध में दूध से तर्पण देने और खीर बनाने का विधान है। गुजरात में त्रयोदशी को काकबली एवं बालभोलनी तेरस के नाम से जाना जाता है। यह श्राद्ध कोई भी परिजन कर सकता है। इस दिन का श्राद्ध मुख्यत: फल्गु नदी में स्नान के बाद करने का विधान है।

पितृ पक्ष श्राद्ध पार्वण श्राद्ध होते हैं। ज्योतिषाचार्य पंडित नरेंद्र नागर के अनुसार पितरों के तर्पण और श्राद्ध को राहु काल में नहीं किया जाता है। यह काम हमेशा कुतुप काल पर ही करें। श्राद्ध से जुड़े अनुष्ठान अपराह्न काल समाप्त होने के पहले जरूर पूरे कर लेने चाहिए। श्राद्ध के अन्त में तर्पण करना चाहिए।

त्रयोदशी श्राद्ध 15 सितंबर 2020 दिन— मंगलवार
कुतुप मुहुर्त - सुबह 11:51 बजे से दोपहर 12:41 बजे तक

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