राजधानी में बढ़ रहा कच्ची बस्तियों का दायरा, बस्ती कच्ची और वोट पक्के

राजधानी में बढ़ रहा कच्ची बस्तियों का दायरा, बस्ती कच्ची और वोट पक्के

Priyanka Yadav | Publish: Mar, 14 2018 01:02:13 PM (IST) Jaipur, Rajasthan, India

पार्षद, विधायक, सांसद से लेकर अफसर देखते हुए गुजरते हैं लेकिन कच्ची बस्ती के विकास के लिए नहीं उठाए जा रहे अहम कदम

जयपुर . नेताओं का वोट बैंक बनी कच्ची बस्तियों का दायरा बढ़ता जा रहा है। शहर में सरकारी जमीन पर ऐसी बस्तियों को बसाने और फिर वोट बैंक का जरिया बनाने का खेल फिर तेज हो गया है। नेताओं की शह पर इन्हें पनपाने का खेल चल रहा है। इसकी जानकारी नौकरशाहों को भी है लेकिन एक्शन लेने की हिम्मत कोई नहीं जुटा पा रहा है। ऐसा ही चलता रहा तो वह दिन दूर नहीं, जब शहर में पनप रही कच्ची बस्तियों का रूप जवाहर नगर बस्ती की तरह परेशान करने वाला होगा।

 

योजनाबद्ध तरीका

2-3 झुग्गी बढ़कर हुईं 40 से ज्यादा

झालाना की 100 फीट चौड़ी मुख्य सड़क से सटी बेशकीमती सरकारी जमीन पर ही कच्ची बस्ती बसाने का काम चल रहा है। शुरुआत में 2-3 झुग्गी थी, जो बढ़कर 40 से ज्यादा पहुंच चुकी हैं। मुख्य सड़क पर होने के कारण पार्षद, विधायक, सांसद से लेकर अफसर देखते हुए गुजरते हैं, लेकिन इस दलदल को बढऩे से कोई नहीं रोक रहा है।

 

रोका नहीं तो, यूं बनेंगे हालात...

- जवाहर नगर कच्ची बस्ती 3 किलोमीटर लम्बाई और 300 मीटर चौड़ाई में फैली है।

- बस्ती की मौजूदा आबादी 65 से 70 हजार बताई जा रही है। जबकि, वर्ष 1997 से 2000 के बीच हुए सर्वे में यही संख्या 34 हजार के आस-पास आंकी गई थी।

- पूर्व विधायक कालीचरण सराफ व मौजूदा विधायक अशोक परनामी का वोट बटोरने पर फोकस होने के कारण ऐसे हाल हुए।

 

जिम्मेदार जनप्रतिनिधि

नारायण लाल नैनावत, पार्षद
कैलाश वर्मा, विधायक
रामचरण बोहरा, सांसद
(इन जनप्रतिनिधियों ने इन्हें बसने से रोकने के लिए काई पुख्ता काम नहीं किया)

 

धारावी से बनने लगे हाल...

सरकारी एवं प्रशासनिक उदासीनता की वजह से कच्ची बस्तियों का दायरा दिनों-दिन बढ़ रहा है। एेसे में शहर में मुंबई के धारावी, कोलकाता और दिल्ली जैसे हालात बनने लगे हैं। आलम यह है कि जवाहर नगर, झालाना जैसे कई स्थान हैं जहां सरकारी जमीन पर मतदाता तैयार किए जा रहे हैं। नगर निगम, जयपुर विकास प्राधिकरण और यहां तक कि पुलिस के पास तक इनकी पहचान का कोई रिकॉर्ड उपलब्ध नहीं है।

 

सब वोटों का खेल

बढ़ती कच्ची बस्तियों के पीछे आने वाले चुनावों में वोटों का खेल है। विभिन्न राजनीतिक दलों से जुड़े लोग इन कच्ची बस्तियों को बसाते हैं। उन्हीं के दम पर वह चुनाव में जीतकर आते हैं। राजनेताओं की सरपरस्ती के कारण इन बस्तियों के खिलाफ कोई कारगर कार्रवाई नहीं की जा रही।

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