राजकीय अधिवक्ता कार्यालय में 32 साल से खाली पदों पर हाईकोर्ट हुआ सख्त,बिना स्टाफ के कोर्ट में नहीं हो रही सरकार की पैरवी

HC ने जयपुर स्थित राजकीय अधिवक्ता कार्यालय में आपराधिक प्रकरणों की पैरवी में तेजी लाने को राजकीय अधिवक्ता कार्यालय में पुलिसकर्मी लगाने को कहा है।

By: rajesh walia

Published: 11 Sep 2017, 12:36 PM IST

स्टाफ ही नहीं तो कोर्ट में कैसे हो सरकार की पैरवी

हाईकोर्ट ने जयपुर स्थित राजकीय अधिवक्ता कार्यालय में 32 साल से पद नहीं बढऩे और स्वीकृत पदों के खाली रहने पर गंभीरता दिखाते हुए महाधिवक्ता एनएम लोढ़ा को व्यवस्था में सुधार लाने की जिम्मेदारी सौंपी हैं। पुलिस महानिदेशक से भी आपराधिक प्रकरणों की पैरवी में तेजी लाने को राजकीय अधिवक्ता कार्यालय में पुलिसकर्मी लगाने को कहा है। हालांकि, हाईकोर्ट ने आपराधिक प्रकरणों की पैरवी के लिए बने राजकीय अधिवक्ता कार्यालय में पुलिसकर्मी लगाने के आदेश बहुत समय से दे रखे हैं, लेकिन हाल यह है कि आदेश के बावजूद चार में से दो पुलिसकर्मी ही लगे हुए हैं और उनमें से भी एक सेवानिवृत्त होने वाला है। न्यायाधीश मोहम्मद रफीक व केसी शर्मा की खण्डपीठ ने एक आपराधिक मामले में राज्य सरकार की अपील पर सुनवाई के दौरान यह स्थिति सामने आने पर गंभीरता दिखाई। कोर्ट ने स्थिति में सुधार के लिए तुरन्त महाधिवक्ता को बुलाया, वहीं पुलिस महानिदेशक से कार्यालय में चार पुलिसकर्मी लगाने के आदेश की पालना कराने को कहा है।

 

 

काम बढ़ा, पद पहले जितने ही

राजकीय अधिवक्ता ब्रह्मानंद सान्दू ने कोर्ट को बताया कि 1977 में जयपुर में हाईकोर्ट की बैंच आई, उसके बाद 1985 में दो कर्मचारियों के नए पद स्वीकृत हुए। उसके बाद कोई पद स्वीकृत नहीं हुआ है। कोर्ट ने खाली पदों के बारे में जानकारी मांगी तो सामने आया कि क्लर्क के 10 में से 3, जमादार के 14 में से 8 पद ही भरे हुए हैं।

 

पुलिस बिना समस्या

हाईकोर्ट इस कार्यालय में एएसआई, हेड कांस्टेबल व कांस्टेबल स्तर के चार पुलिसकर्मी लगाने का आदेश दे चुका है, लेकिन पुलिसकर्मी नहीं मिलने से केस डायरी तक मंगाने में समस्या आ रही है। इस कार्यालय में स्टाफ की पर्याप्त व्यवस्था के लिए महाधिवक्ता ने 10 दिन का समय मांगा, जिस पर कोर्ट ने सुधार की अपेक्षा करते हुए सुनवाई टाल दी।

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rajesh walia Desk/Reporting
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