प्रोत्साहन नहीं मिला, उलटा कट गया मानदेय

आंगनबाड़ी महिलाकर्मियों के साथ अन्याय

By: Abrar Ahmad

Published: 30 May 2020, 06:29 PM IST

जयपुर. प्रदेश भर में आंगनबाड़ी महिला कर्मियों ने कोरोना महामारी के समय अपनी जान जोखिम में डालकर घर घर सर्वे का कार्य कर रही हैं। लेकिन इन महिला कार्मिकों को जोखिम भरे कार्य के बदले कोई प्रोत्साहन राशि नहीं दी। बल्कि इन महिला कार्मिकों के मानदेय मे महिला बाल विकास विभाग के अधिकारियों ने बिना सूचना के ही अप्रैल माह के मानदेय में कटौती कर आर्थिक संकट में डाल दिया है। जबकि इन्हें इन महिला कर्मियों को अल्प मानदेय मिलता है। इन महिला कर्मियों का कहना है कि एक ओर सरकार निजी कंपनियों को लॉकडाउन में पूरी तनख्वाह देने के लिए कह रही है, वहीं हमें प्रोत्साहन राशि देने के बजाया मानदेय से कटौती कर रही है।

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सूचना और साधनों के अभाव में नहीं कर पाई कार्य

लॉकडाउन में कई महिला कार्मिक सूचना और साधनों के अभाव में कार्य नहीं कर सकी। ऐसे में विभाग ने बिना बताए ही मानदेय कर्मियों 500 रुपए से लेकर 3000 रुपए तक की मानदेय कटौती कर ली। सबसे ज्यादा समस्या उन महिलाओं को जो लॉकडाउन में दूसरे शहरों में फंसी रह गई या फिर बीमारी के चलते डॉक्टर ने उन्हें कोरोना संक्रमण के डर से कार्य नहीं करने की सलाह दी।

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आंगनबाड़ी मानदेय कर्मियों का मानदेय
आशासहयोगिन को 2700 रुपए
साथिन को 3500 रुपए
सहायिका को 4225 रुपए
कार्यकर्ता को 7500 रुपए

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वर्जन ......
लाखों अधिकारी कर्मचारियों को लॉकडाउन में जब घर बैठे ही पूरा वेतन दिया जा सकता है तो इन अल्प मानदेय महिला कार्मिकों को सूचना के अभाव में 1-2 दिवस सूचना व साधनों के अभाव मे कार्य नहीं करने के बदले 500 रुपए से लेकर 3000 तक की मानदेय कटौती करना न्यायोचित नहीं है।
-सीएल बुनकर, संस्थापक अखिल राजस्थान महिला बाल विकास संयुक्त कर्मचारी संघ

Abrar Ahmad Desk
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