भारत चीन के युवा भविष्य को लेकर ज़्यादा आशावादी

भारत चीन के युवा भविष्य को लेकर ज़्यादा आशावादी

Mohmad Imran | Updated: 12 Jun 2019, 01:51:03 PM (IST) Jaipur, Jaipur, Rajasthan, India

महंगी और ब्रांडेड चीजों के शौकीन, बेफिक्र जिंदगी जीने के आदि और हमेशा उत्साह से लबरेज रहने वाली जनरेशन ज़ी भी अब जिंदगीको लेकर निराश और हताश महसूस कर रही है। ये कहना है डेलॉयट ग्लोबल की ओर से हाल ही जारी ग्लोबल मिलेनियल सर्वे की रिपोर्ट का।

भारत चीन के युवा भविष्य को लेकर ज़्यादा आशावादी, सर्वे में आया सामने
-औसतन संपत्ति भी अपने पिता और दादा की पीढ़ी की तुलना में कम
इन्ट्रो: युवाओं में तेजी से निराशा और नकारात्मकता बढ़ रही है। महंगी और ब्रांडेड चीजों के शौकीन, बेफिक्र जिंदगी जीने के आदि और हमेशा उत्साह से लबरेज रहने वाली जनरेशन ज़ी भी अब जिंदगीको लेकर निराश और हताश महसूस कर रही है। ये कहना है डेलॉयट ग्लोबल की ओर से हाल ही जारी ग्लोबल मिलेनियल सर्वे की रिपोर्ट का। संस्था ने ४२ देशों के वर्ष १९८३ से १९९४ के बीच पैदा हुए १३,४१६ लोगों (मिलेनियल्स) और वर्ष १९९५ से २००२ के बीच पैदा हुए १० देशों के ३००९ युवाओं (जनरेशन ज़ी) पर यह सर्वेक्षण किया था। संस्था ८ सालों से सर्वे कर रही है जिसके निष्कर्ष हाल ही में जारी किए हैं। २०१८ में ५५ फीसदी की तुलना में सर्वे में भाग लेने वाले ६१ फीसदी उत्तरदाताओं का सोचना है कि अब व्यवसाय पहले जैसा प्रभाव नहीं डाल रहे। डेलॉयट ग्लोबल के चीफ टैलेंट ऑफिसर मिशेल परमेली का कहना है कि किसी भी व्यवसाय के लाभ का एक बड़ा हिस्सा लग्जरी लाइफ और ब्रांडेड उत्पादों की दीवानी जनरेशन ज़ी पर निर्भर करता है। लेकिन अब इस जीवनशैली से इनका भी भरोसा खत्म हो रहा है। हालांकि, मिशेल ने यह भी कहा कि सर्वेक्षण से पता चलता है कि मिलेनियल्स और जनरेशन ज़ी के नजरिए कुछ महत्वपूर्ण क्षेत्रों में अलग हैं। इनमें जीवन की प्राथमिकताएं, समाज और काम के प्रति उनकी सोच में काफी अंतर है।
५७ फीसदी सैर-सपाटे के शौकीन
सर्वे के अनुसार अमूमन दोनों समूह के युवाओं में से आधे अपना घर खरीदने के इच्छुक हैं लेकिन वे इसके लिए शादी और परिवार नहीं चाहते। यानि खुद को जिम्मेदारियों के बंधनों में जकडऩा उन्हें पसंद नहीं। सर्वे में यह भी सामने आया कि दोनों समूह के ५७ फीसदी युवा सैर-सपाटे और दुनिया घूमने के भी इच्छुक हैं। वहीं सर्वे में शामिल केवल 52 फीसदी मिलेनियल्स ने कहा की उच्च वेतन उनकी सर्वोच्च प्राथमिकता है। जबकि 56 फीसदी जनरेशन ज़ी ने भी यही कहा। ३९ फीसदी मिलेनियल्स ने अपना परिवार शुरू करने को पहली प्राथमिकता बताया वहीं ४५ फीसदी जनरेशन ज़ी के युवा इससे सहमत थे। क्योंकि जी जनरेशन के बहुत से युवा अब भी पढ़ाई कर रहे हैं इसलिए वे अपने शिक्षकों से अपेक्षा करते हैं कि वे उन्हें उच्च कौशल प्रदान करें ताकि वे अच्छी नौकरी और व्यवसाय का हिस्सा बन सकें। वहीं मिलेनियल्स उद्योग और व्यवसायिक घरानों से यह उम्मीद करते हैं कि वे उन्हें और अधिक कौशल प्रदान करें। सर्वे के नतीजों से यह देखने को मिला कि मिजेनियल्स की तुलना में जनरेशन ज़ी अपने काम की स्थिति से ज्यादा असंतुष्ट हैं।
जलवायु परिवर्तन के प्रति चिंतित
जलवायु परिवर्तन, पर्यावरण और प्राकृतिक आपदाओं के संरक्षण को लेकर भी दोनों समूह के युवा व्यक्तिगत स्तर पर संवेदनशील नजर आए। १० में से ३ ने इन वैश्विक समस्याओं को गहरी चिंता का विषय बताया। वहीं मिलेनियल्स के लिए आय की असमानता भी एक बड़ी समस्या है। इस सूची में आतंकवाद, अपराध और निजी सुरक्षा के बारे में दोनों समूह के युवाओं ने गहरी चिंता व्यक्त की।
सर्वे के अनुसार, जनरेशन ज़ी और मिलेनियल्स के नजरिए का अंतर देशों के बीच परस्पर तुलना करते समय अधिक दिखाई देता है। चीन और भारत में, जनरेशन ज़ी भविष्य के बारे में अधिक आशावादी नजर आए। वहीं दुनिया की प्रमुख आर्थिक शक्तियों के बारे में भी दोनों समूहों में निराशा थी। चार में से केवल एक को इस बात की उम्मीद है कि आने वाले सालों में उनके देश में आर्थिक सुधार देखने को मिलेंगे। सर्वे के अनुसार आर्थिक सुधारों के बारे में बीते छह सालों में मिलेनियल्स इस बार सबसे ज्यादा निराश दिखाई दिए। बीते सालों में यह आंकड़ा कभी भी ४० से नीचे नहीं गया था। वहीं ४९ फीसदी ऐसे भी थे जिन्होंने कहा कि वे आने वाले दो सालों में अपनी नौकरी छोड़ देेंगे। वेतन से असंतुष्टि और कौशल विकास का अभाव इसका प्रमुख कारण है। १० में से केवल ३ मिलेनियल्स ने कहा कि वे अपनपी वर्तमान नौकरी करते रहेंगे।
पिछली पीढ़ी से संपत्ति भी कम
अध्ययन से पता चलता है कि औसत अमरीकी शैक्षणिक ऋण, उच्च किराय दर और महंगी स्वास्थ्य देखभाल के चलते अपनी पहले की पीढिय़ों की तुलना में ५.५ लाख (८ हजार डॉलर) की संपत्ति का मालिक है। सर्वे के अनुसार, वर्ष १९९६ के बाद से 18 से 35 वर्ष के औसम अमरीकी युवा की कुल संपत्ति में 34 प्रतिशत की गिरावट आई है। आज युवा शिक्षा, भोजन, परिवहन पर अपनी पूर्व पीढ़ी के युवाओं की तुलना में ज्यादा खर्च कर रही है जबकि इसकी तुलना में आय बहुत कम है। डेलॉयट ग्लोबल के अनुसार युवा उपभोक्ता इस समय भारी वित्तीय दबाव में हैं। बीते एक दशक में अमरीका में शिक्षा पर होने वाला खर्च 65 प्रतिशत बढ़ गया है। वहीं खाद्य लागत में 26 प्रतिशत की वृद्धि हुई है। इसी तरह स्वास्थ्य देखभाल में 21 प्रतिशत, आवासीय सुविधाओं में 16 प्रतिशत और परिवहन में 11 प्रतिशत की वृद्धि हुई है। वहीं २० साल पहले की तुलना में आज के युवाओं के पास स्मार्टफोन और डेटा प्लान का खर्च भी जुड़ गया है।

राजस्थान पत्रिका लाइव टीवी

खबरें और लेख पढ़ने का आपका अनुभव बेहतर हो और आप तक आपकी पसंद का कंटेंट पहुंचे , यह सुनिश्चित करने के लिए हम अपनी वेबसाइट में कूकीज (Cookies) का इस्तेमाल करते हैं। हमारी वेबसाइट पर कंटेंट का प्रयोग जारी रखकर आप हमारी गोपनीयता नीति (Privacy Policy ) और कूकीज नीति (Cookies Policy ) से सहमत होते हैं।
OK
Ad Block is Banned