लॉकडाउन की मार के बाद भी भारत निर्यात करेगा गेंहू जानिए कैसे

लॉकडाउन की मार के बाद भी भारत निर्यात करेगा गेंहू जानिए कैसे

By: Rakhi Hajela

Published: 18 Apr 2020, 05:09 PM IST


इस साल भारत ९० हजार टन गेंहू की निर्यात करेगा। वह भी कोरोना वायरस के कहर के बीच। वजह है इस रबी सीजन में गेहूं, चना से लेकर आलू.प्याज की बंपर पैदावार होने की उम्मीद।। अनुमान है कि गेहूं का उत्पादन इस साल रिकॉर्ड तोड़ 10.62 करोड़ टन तक पहुंचने वाला है। यानी पिछले साल के मुकाबले इस बार 40 लाख टन ज्यादा गेहूं होगा। इतना गेहूं 6.30 करोड़ लोगों की सालभर की जरूरत पूरी कर सकता है। इतना ही नहीं, गोदामों में पहले से ही गेहूं और चावल का बफर स्टॉक है, इसलिए भविष्य में खाद्यान्न पर्याप्त उपलब्ध रहेगा। इस बफर स्टॅाक को देखते हुए सरकार ने 90 हजार टन गेहूं के निर्यात का फैसला भी लिया है। कृषि विशेषज्ञों का कहना है कि देश में पैदा होने वाले कुल गेहूं में से 85 से 90 फीसदी की खपत होती है। यानी देश में सालाना करीब 9 करोड़ टन गेहूं लग जाता है और एक से डेढ़ करोड़ टन से ज्यादा गेहूं की बचत होगी। देशभर में कुल पैदा होने वाले गेहूं का 83 फीसदी पांच राज्यों में होता है। इनमें राजस्थान के साथ उत्तरप्रदेश, मध्यप्रदेश,पंजाब और हरियाणा शामिल हैं। 17 फीसदी उत्पादन शेष राज्यों में होता है। जानकारी के मुताबिक सर्दी अधिक पड़ने से हरियाणा और पंजाब में फसल 7 से 10 दिन देरी से पकी है। सामान्य तौर पर यहां गेहूं की कटाई 10 से 20 अप्रैल के बीच होती है। कंबाइन गेहूं काटने और दाना निकालने की मशीन से कटाई तेजी से होती है और सरकार ने कंबाइन से कटाई की इजाजत दे दी है। यहां 15 अप्रैल से कटाई शुरू हो जाएगी। कंबाइन से एक एकड़ का गेहूं 20 मिनट में काटकर ट्रॉली में लाद दिया जाता है। इसमें ड्राइवर समेत केवल 3 लोगों की जरूरत होती है, इसलिए लॉकडाउन से कटाई प्रभावित नहीं होगी।

इस साल 40 लाख टन ज्यादा गेहूं
जानकारी के मुताबिक गेंहू की फसल गत वर्ष १०.२ करोड़टन पैदा हुई थी जिसके इस वर्ष १०.६२ करोड़ टन होने कीउम्मीद है अब तक ४० फीसदी फसल की कटाई हो चुकी है।इसी प्रकार चना गत वर्ष१०.१३करोड़ टन पैदा हुआ था जिसके इस बार ११.२२ करोड़ा टन पैदावार होने की उम्मीद है। अब तक ९८ फीसदी चने कीफसल की कटाई हो चुकी है। इसी प्रकार आलू गत वर्ष५.०१ करोड़ टन हुआ था उसके इस बार ५.१० करोड़ टन होने की उम्मीद है। प्याज की बात करें तो गत वर्ष प्याज २.२८ करोड़ टन हुई थी जो इस बार बढ़ कर २.५० करोड़ टन होने की संभावना है।
उल्लेखनीय है कि इस बार सर्दी अधिक पडऩे से गेंहू अच्छी तरह से पका है और दाने की गुणवत्ता भी अच्छी है। फसल काटने में देरी नहीं हुई है। गेहूं की खड़ी फसल के दाने खेत पर नहीं गिरते हैं। जैसे सरसों के पकने के एक.दो दिन में गिरने लगते हैं, इसलिए नुकसान नहीं होगा।

कृषि वैज्ञानिकों का कहना है कि मध्यप्रदेश,गुजरात, उप्र और पंजाब का शरबती गेहूं अंतरराष्ट्रीय मानकों के अनुरूप है, इसलिए विदेशों में पसंद किया जाएगा और निर्यात का फायदा मिलेगा। विदेशों में पिज्जा, पास्ता, ब्रेड और बिस्कुट की अधिक मांग होती है। हमने तीन नई किस्म विकसित की है। गेहूं उत्पादन करने वाले देश चीन, रूस, उजबेकिस्तान, कनाडा में पैदावार प्रभावित होने की आशंका है, इसलिए निर्यात की संभावनाएं भी बढ़ेंगी। भारत के पास पहले से ही गेहूं का अतिरिक्त स्टॉक मौजूद है। कोरोना की वजह से देश में मौजूदा समय सबसे अधिक खाद्य पदार्थों की जरूरत है। बंपर पैदावार से सप्लाई चेन को मजबूत करने में मदद मिलेगी। मौजूदा समय में खाद्य पदार्थ के अलावा किसी अन्य चीज की डिमांड नहीं होगी। जब पैदावार अच्छी होती है, तो उसका सबसे बड़ा लाभ किसानों और ग्रामीणों को होता है। ग्रामीणों की आय बढ़ती है तो बाजार में खरीदारी बढ़ती है, जिससे मैन्युफैक्चरिंग बढ़ती है। इससे अर्थव्यवस्था में सुधार की उम्मीद है।

Rakhi Hajela Desk
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