script'Indian lipstick' finally found in Arunachal after a century | आखिरकार एक सदी बाद अरुणाचल में मिला ‘भारतीय लिपस्टिक’ | Patrika News

आखिरकार एक सदी बाद अरुणाचल में मिला ‘भारतीय लिपस्टिक’

भारतीय लिपस्टिक। जी,हां यह होठों पर लगाने वाली महिलाओं की सौंदर्य प्रसाधन की लिपस्टिक नहीं है। यह है एक दुर्लभतम पौधा। करीब 100 साल बाद ‘भारतीय लिपस्टिक’ नाम का दुर्लभ पौधा फिर खोजा गया है। भारतीय वनस्पति सर्वेक्षण (बीएसआइ) के शोधकर्ताओं ने अरुणाचल प्रदेश के सुदूर अंजॉ जिले में इसकी खोज की। इसे सबसे पहले अरुणाचल प्रदेश में ही 1912 में ब्रिटिश वनस्पति शास्त्री स्टीफन ट्रॉयट डन ने यह पौधा खोजा था। वनस्पति विज्ञान में एस्किनैन्थस मोनेटेरिया डन के नाम से इसे जाना जाता है।

जयपुर

Published: June 07, 2022 06:31:29 pm

भारतीय लिपस्टिक। जी,हां यह होठों पर लगाने वाली महिलाओं की सौंदर्य प्रसाधन की लिपस्टिक नहीं है। यह है एक दुर्लभतम पौधा। करीब 100 साल बाद ‘भारतीय लिपस्टिक’ नाम का दुर्लभ पौधा फिर खोजा गया है। भारतीय वनस्पति सर्वेक्षण (बीएसआइ) के शोधकर्ताओं ने अरुणाचल प्रदेश के सुदूर अंजॉ जिले में इसकी खोज की। इसे सबसे पहले अरुणाचल प्रदेश में ही 1912 में ब्रिटिश वनस्पति शास्त्री स्टीफन ट्रॉयट डन ने यह पौधा खोजा था। वनस्पति विज्ञान में एस्किनैन्थस मोनेटेरिया डन के नाम से इसे जाना जाता है।
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‘करंट साइंस जर्नल’ में प्रकाशित लेख में बीएसआइ वैज्ञानिक कृष्णा चौलू ने बताया कि ट्यूबलर रेड कोरोला की मौजूदगी के कारण एस्किनैन्थस के तहत कुछ प्रजातियों को लिपस्टिक प्लांट कहा जाता है। चौलू ने अरुणाचल प्रदेश में फूलों के अध्ययन के दौरान दिसंबर 2021 में अंजॉ जिले के ह्युलियांग, चिपरू से एस्किनैन्थस के नमूने जमा किए। उन्होंने बताया कि दस्तावेजों की समीक्षा और ताजा नमूनों के अध्ययन से पुष्टि हुई कि नमूने एस्किनैन्थस मोनेटेरिया के हैं, जो 1912 के बाद भारत में कभी नहीं पाए गए थे।
और जांच-पड़ताल जरूरी

कृष्णा चौलू का कहना है कि अरुणाचल प्रदेश में वनस्पति की विभिन्न प्रजातियों की दोबारा खोज हुई है। यह राज्य की समृद्ध जैव विविधता को दर्शाता है। विशेषज्ञों का कहना है कि वनस्पति की इन प्रजातियों के बारे में और अधिक जानने के लिए आगे और जांच-पड़ताल की जरूरत है।
नम और हरे-भरे जंगलों का फूल
शोध के सह-लेखक गोपाल के मुताबिक इस प्रजाति का नाम एस्किनैन्थस ग्रीक के ऐस्किनै या ऐस्किन व एंथोस से लिया गया है। ऐस्किन का अर्थ शर्म महसूस करना और एंथोस का अर्थ फूल है। यह पौधा 543-1134 मीटर की ऊंचाई पर नम व हरे-भरे जंगलों में उगता और अक्टूबर से जनवरी के बीच फलता-फूलता है। प्रकृति संरक्षण के अंतरराष्ट्रीय संघ (आइयूसीएन) में यह प्रजाति लुप्तप्राय के रूप में दर्ज है।
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Anand Mani Tripathi

आनंद मणि त्रिपाठी (@aanandmani) राजनीति, अपराध, विदेश, रक्षा एवं सामरिक मामलों के पत्रकार हैं। पत्रकारिता के तीनों माध्यम प्रिंट, टीवी और आनलाइन में गहरा और अपनी तेज तर्रार रिपोर्टिंग के लिए जाने जाते हैं। पश्चिम बंगाल के कलकत्ता में जन्म हुआ। प्रारंभिक शिक्षा उत्तर प्रदेश के कानपुर और बस्ती में हुई। माध्यमिक शिक्षा नवोदय विद्यालय बस्ती, फैजाबाद और पूर्वोत्तर त्रिपुरा के धलाई जिले में हुई। अयोध्या के साकेत महाविद्यालय से स्नातक और 2009 में जेआईआईएमसी,दिल्ली से पत्रकारिता का डिप्लोमा किया। हरियाणा से पत्रकारिता आरंभ की। शिक्षा, विज्ञान, मौसम, रेलवे, प्रशासन, कृषि विभाग और मंत्रालय की रिपोर्टिंग की। इंवेस्टिगेटिव रिपोर्टिंग से शिक्षा और रेलवे विभाग के कई भ्रष्टाचार का खुलासा किया। रक्षा मंत्रालय के रक्षा संवाददाता पाठयक्रम-2016 पूरा किया। इसके बाद रक्षा मामलों की पत्रकारिता शुरू कर दी। चीन, पाकिस्तान और कश्मीर मामलों पर तीक्ष्ण नजर रहती है। लेफ्टिनेंट उमर फैयाज की हत्या 2017, राइफलमैन औरंगजेब की हत्या 2018, जम्मू—कश्मीर में बदले 2018 में बदले राजनीतिक समीकरण, पुलवामा हमला 2019, कश्मीर से 370 का हटना, गलवान घाटी मुठभेड़ 2020 को बेहद करीब से जम्मू और कश्मीर में रहकर ही कवर किया। कोरोना काल 2020 में भी लददाख से नेपाल तक की यात्रा चीन के बदलते समीकरण को लेकर की। इसके साथ ही लोकसभा चुनाव 2019 में जम्मू कश्मीर, हिमाचल प्रदेश, हरियाणा और पंजाब की रिपोर्टिंग की। 9 नवंबर 2019 को श्रीराम जन्म भूमि अयोध्या मामले में आए फैसले की अयोध्या से कवर किया। 2022 उत्तरप्रदेश् चुनाव को सहारनपुर से सोनभद्र तक मोटर साइकिल के माध्यम से कवर किया। पत्रकारिता से इतर आनंद मणि त्रिपाठी को संगीत और पर्यटन का जबरदस्त शौक है। इन्हें किसी भी कार्य में असंभव शब्द न प्रयोग करने के लिए जाना जाता है...

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