सुनो पुरुष, अब मत बोलना महिलाओं को यह डायलॉग

- अकसर लोग गृहणियों से कहते हैं: सारे दिन घर में रहती हो, करती क्या हो?

By: Ankita Sharma

Updated: 06 Jan 2021, 01:54 PM IST

- महिलाएं हर दिन 299 मिनट, पुरुष 97 मिनट करते हैं घरेलू काम

- गृहणियों के काम को कम आंकने वाली सोच बदलने की जरूरत: सुप्रीम कोर्ट

- जज बोले, महिलाओं के काम उनके पति के ऑफिस के काम जितना ही महत्वपूर्ण

जयपुर। 'तुम सारे दिन घर में ही तो रहती हो, करती क्या हो?' , ऐसी बातें हम अकसर समाज में गृहणियों के लिए सुनते हैं। लेकिन हाल ही में सुप्रीम कोर्ट ने इसे लेकर बड़ी टिप्पणी की है। एक मामले की सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट ने गृहणियों की उस मेहनत का खुलकर जिक्र किया, जो देश की हर महिला लगभग रोज करती है। इतना ही नहीं कोर्ट ने साफ कहा कि समाज को इस मेहनत के लिए महिलाओं का सम्मान करना चाहिए।

यह सोच गलत कि गृहणियां घर में आर्थिक सहायता नहीं करतीं

सुप्रीम कोर्ट ने बीते दिन एक केस की सुनवाई के दौरान कहा कि घर में रहने वाली महिलाओं के काम उनके पति के ऑफिस के काम जितना ही महत्वपूर्ण है। एक मोटर वाहन दुर्घटना के मुआवजे को लेकर हो रही सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि यह सोच कि घर पर रहने वाली महिलाएं काम नहीं करती या फिर वह घर में कोई आर्थिक सहायता नहीं देती, गलत है और अब इससे बाहर आने की जरूरत है। इसके बाद सुप्रीम कोर्ट ने कार दुर्घटना में जान गंवाने वाले एक दंपती के रिश्तेदारों को मिलने वाले मुआवजे की रकम को बढ़ा दिया। हाई कोर्ट ने इस मामले में मृत महिला की आय इसलिए कम आंकी थी क्योंकि वह गृहणी थी।

भारत में करीब 16 करोड़ महिलाएं संभालती हैं घर

जस्टिस एनवी रमण की अध्यक्षता में तीन जजों की पीठ ने कहा कि गृहणियों की कड़ी मेहनत और श्रम के लिए आर्थिक मूल्य तय करना मुश्किल है लेकिन यह महत्वपूर्ण है। साल 2011 की जनगणना के अनुसार, भारत में करीब 16 करोड़ महिलाएं घर संभालती हैं। वहीं, ऐसे पुरुषों की संख्या मात्र 60 लाख है। इतना ही नहीं सांख्यिकी और कार्यक्रम कार्यान्वयन मंत्रालय के अनुसार औसतन महिलाएं प्रतिदिन 299 मिनट तक ऐसे घर के काम करती हैं जिनके लिए उन्हें कोई भुगतान नहीं मिलता। वहीं पुरुष घर के कामों के लिए औसतन एक दिन में 97 मिनट देते हैं। इसके बावजूद माना जाता है कि गृहणियों के पास कोई काम नहीं है।

यह है मामला

पीठ ने मोटर वाहन दुर्घटना के पीडि़तों पूनम और उनके पति विनोद के परिवार को 22 लाख रुपए की जगह 33.2 लाख का मुआवजा देने का भी आदेश दिया। हाई कोर्ट ने यह रकम 22 लाख रुपये तय की थी। सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि आदेश देते वक्त अदालतों को घर पर रहने वाली महिलाओं के अप्रत्यक्ष आर्थिक योगदान को भी ध्यान में रखना चाहिए।

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