INDIRA EKADASHI VRAT : तुलसी, सहस्रनाम पाठ प्रिय है पर विष्णुजी को बिल्कुल नहीं भातीं ये चीजें

एकादशी पर विष्णुजी की पूजा फलदायी होती है पर श्राद्ध पक्ष में आने से इस एकादशी का महत्व और भी बढ जाता है। ज्योतिषाचार्य पंडित सोमेश परसाई बताते हैं कि इंदिरा एकादशी पर व्रत रखने, सदाचार का पालन करने और सच्चे मन से विष्णुजी की पूजा करने की बात कही गई है।

By: deepak deewan

Updated: 10 Sep 2020, 07:29 PM IST

जयपुर. आश्विन मास के कृष्ण पक्ष की एकादशी इंदिरा एकादशी के नाम से जानी जाती है। एकादशी पर विष्णुजी की पूजा फलदायी होती है पर श्राद्ध पक्ष में आने से इस एकादशी का महत्व और भी बढ जाता है। ज्योतिषाचार्य पंडित सोमेश परसाई बताते हैं कि इंदिरा एकादशी पर व्रत रखने, सदाचार का पालन करने और सच्चे मन से विष्णुजी की पूजा करने की बात कही गई है।

पद्म पुराण के अनुसार, इंदिरा एकादशी व्रत में भगवान विष्णु के साथ ही माता लक्ष्मी की पूजा भी करनी चाहिए। व्रत के विधान के अनुसार इस दिन सात्विक आचरण करनेवालों को ही पुण्य की प्राप्ति होती है। व्रत में सात्विक भोजन करें. लहसुन, प्याज, बैंगन, मांस-मदिरा, पान-सुपारी और तंबाकू आदि से परहेज रखें। परनिंदा से भी बचें। संभव हो तो रात में जागरण करते हुए विष्णुजी का कीर्तन करें और सुबह द्वादशी तिथि को व्रत का परायण करें।

इंदिरा एकादशी पूजा विधि
ज्योतिषाचार्य पंडित नरेंद्र नागर के अनुसार एकादशी के दिन ब्रह्म मुहूर्त में उठकर स्नान आदि से निवृत्त होकर विष्णुजी का ध्यान करते हुए व्रत का संकल्प लें। बाद में पितरों को याद करते हुए भगवान विष्णु की विधिपूर्वक् पूजा करें। भगवान विष्णु को तुलसी जरूर अर्पित करें जोकि उन्हें बहुत प्रिय है। आरती के बाद विष्णु सहस्रनाम का पाठ अवश्य करना चाहिए। विष्णु सतनाम स्तोत्र का पाठ भी कर सकते हैं।

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