Infertility Causes : बेबी प्लानिंग में देरी बना सकती है इनफर्टिलिटी का शिकार

Infertility  Causes : बेबी प्लानिंग में देरी बना सकती है इनफर्टिलिटी का शिकार
आपका खून ही बढ़ाएगा स्पर्म, दूर होगा बांझपन

Anil Chauchan | Updated: 06 Oct 2019, 06:44:36 PM (IST) Jaipur, Jaipur, Rajasthan, India

Infertility Causes : दिनों दिन बदलती Lifestyle के चलते लोगों को जहां कई तरह की अपनी Physical Problems से Face पड़ रहा है वहीं Newly Couple के लिए भी यह Big Problem बनकर सामने आई है। Marriage के बाद Family Planning में देरी की तो Infertility की समस्या का सामना करना पड़ सकता है।

जयपुर . दिनों दिन बदलती जीवनशैली ( Lifestyle ) के चलते लोगों को जहां कई तरह की अपनी शारीरिक परेशानियों ( Physical Problems ) से जूझना ( Face ) पड़ रहा है वहीं नव दंपत्तियों ( Newly Couple ) के लिए भी यह बड़ी समस्या ( Big Problem ) बनकर सामने आई है। शादी ( Marriage ) के बाद फैमेली प्लानिंग ( Family Planning ) में देरी की तो इनफर्टिलिटी ( Infertility ) की समस्या का सामना करना पड़ सकता है। आइए दिखाते हैं एक रिपोर्ट...

बदलती जीवन शैली से हो रही है कई परेशारियां
कॅरियर के चक्कर में होती है शादी में देरी
कई साल लग जाते हैं फैमेली प्लानिंग में
डॉक्टरों ने माना गंभीर, दिए टिप्स

तेजी से बदलती जीवनशैली के अलावा अन्य कुछ कारणों से नव दंपतियों में निरूसंतानता (इनफर्टिलिटी) की समस्या बढ़ रही है। खासतौर पर कॅरियर के चक्कर में शादी के कई साल बाद भी बेबी प्लानिंग में देरी करना इनफर्टिलिटी की समस्या को बढ़ा रहा है। इनफर्टिलिटी की समस्या का सामना कर रहे लोगों के लिए आईवीएफ तकनीक आशा की किरण है, जिसके जरिए वे संतान सुख के अपने सपने को पूरा कर सकते हैं। लेकिन इसके लिए उनके सामने एक बड़ी समस्या यह होती है कि सही आईवीएफ सेंटर कैसे चुना जाए। ऐसे में यह जानना आवश्यक है कि सेंटर में होने वाले गर्भाधारण में से कितने केस में बेबी हुए हैं।


नीलकंठ फर्टिलिटी हॉस्पिटल, उदयपुर के साइंटिफिक डायरेक्टर डॉ. आशीष सूद ने यहां बताया कि ज्यादातर आईवीएफ सेंटर्स अपने यहां हुए गर्भधारण के केसों की संख्या तो बताते हैं, लेकिन उनमें से कितने सफल होकर डिलीवरी तक पहुंचे हैं, यह प्रतिशतता कम ही बताया जाता है। ऐसे में ध्यान दें किए जो सेंटर अत्याधुनिक तकनीकों व नवीनतम उपकरणों से लैस हो साथ ही वहां अनुभवी डॉक्टरों की टीम हो, वहां की सफलता प्रतिशतता ज्यादा होती है।

बेबी प्लानिंग में देरी बना सकती है इनफर्टिलिटी का शिकार
सफल मामलों की दर देखकर करें आईवीएफ का चुनाव
अनुभवी डॉक्टर्स टीम और अत्याधुनिक लैब पर दें ध्यान
यह भी जरूरी कि गर्भधारण के कितने मामले हुए सफल

दंपत्ती के लिए आईवीएफ की कौनसी तकनीक सही रहेगी, इसका चुनाव करने के लिए अनुभवी डॉक्टर का होना आवश्यक है। सेंटर पर आईवीएफ एक्सपर्ट के साथ-साथ भ्रूण विशेषज्ञ, स्त्री रोग विशेषज्ञ, शिशु रोग विशेषज्ञ आदि की पूरी टीम जरूरी है।


कई सेंटर्स पर ऑन गोइंग आईवीएफ की बजाय बैच आईवीएफ होती है। इसमें 10.15 केसों के मरीजों का ग्रुप बनाकर टेस्ट ट्यूब बेबी प्रक्रिया की जाती है, क्योंकि ज्यादातर सेंटर्स पर भ्रूण विशेषज्ञ की सुविधा नहीं होती। जबकि ऑन गोइंग आईवीएफ में महिला की महावारी तारीख के अनुसार उसकी आईवीएफ प्रक्रिया शुरू की जाती है, जिससे उसकी सफलता का प्रतिशत और बढ़ता है। आईवीएफ सेंटर में बेहतर एम्ब्रायोलॉजी लैब हैं, जिसमें अत्याधुनिक और नवीनतम उपकरणों को इस्तेमाल होता है, वहां सफलता दर ज्यादा होती है। मॉड्यूलर क्लोज्ड लैब से सफलता की दर अन्य सामान्य लैब की तुलना में अधिक होती है।

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