नवाचार से होगी शांति की स्थापना: पद्मभूषण डॉ.रघुनाथ माशलेकर

अपने साझे भविष्य की ओर :मानव एकजुटता के युग का निर्माण पर हुआ वेबिनार

By: Rakhi Hajela

Updated: 24 Aug 2020, 09:30 PM IST

पद्मभूषण डॉ. रघुनाथ माशलेकर का कहना है कि हमारे शंातिपूर्ण भविष्य के निर्माण के लिए एक एेसे क्रांतिकारी समावेशी नवाचार की आवश्यकता है जो आय में असमानता के बाद भी पहुंच और समानता का जादू पैदा कर सके। भारत सोका गकाई की ओर से (अपने साझे भविष्य की ओर : मानव एकजुटता के युग का निर्माण) विषय पर आयोजित वेबिनार में उनका कहना था कि जब तक एेसे नवाचार नहीं होंगे दुनिया में शांति की स्थापना नहीं हो सकेगी। वेबिनार में
वनस्थली विद्यापीठ के कुलपति डॉ. आदित्य शास्त्री ने कहा कि आज विश्व को सत्य, प्रेम और करुणा रूपी मूल्यों को आत्मसाध करने वाले युवाओं की जरूरत है। एेसे युवा जो समावेशी विचारधारा के हों, पर्यावरण के प्रति संवेदनशील हो, सद्भााव और विश्व शांति को बढ़ावा देने वाले हों, गिरे हुए को गले लगाने वाले हों और अच्छे इंसान हों। उन्होंने समाज के विभिन्न वर्गों के बीच किसी भी प्रकार की दूरी को पाटने के लिए सार्वभौमिक शिक्षा की जरूरत पर बल दिया।

सभी को एक साथ आना जरूरी
वेबिनार में सोका गकाई के प्रेसिडेंट दायसाकू इकेदा के विचारों का समर्थन करते हुए पूर्व राजदूत और ब्लूमिंगटन स्थित इंडियाना यूनिवर्सिटी के प्रोफेसर राजेंद्र अंभ्यकर का कहना था कि सभी देशों और लोगों को एकजुट होकर काम करने की परिस्थितियां तभी जन्म ले सकती हैं जब लोगों में संकट के प्रति साझी संवेदनशीलता जागृत होगी। वहीं भारतीय जलवायु सहयोग की कार्यकारी निदेशिका और सतत विकास की अध्यक्ष श्लोकानाथ का कहना था कि उद्देश्यपूर्ण बदलाव के लिए एक साझे दृष्टिकोण और लक्ष्य की जरूरत होती है। आपको सुनिश्चित करना होगा कि जिस किसी को भी आपने अपने उद्देश्य की पूर्ति के लिए चुना है, वह खुले मन से उसी दिशा में सोचे। अब समय आ गया है कि हम सभी को एक साथ आना होगा।
युवाओं की शक्ति से प्रशस्त होता है विकास का रास्ता
बीएसजी के अध्यक्ष विशेष गुप्ता ने बदलाव लाने के लिए युवाओं को संवेदनशील बनाने के महत्व पर प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि युवा अपनी सोच से परिस्थितियों को बदलने की क्षमता रखता है और स्वाभाविक रूप से शांति के लिए काम करते हैं। उनकी शक्ति और जोश पूरी मानव जाति के अनंत भविष्य के लिए असीम विकास का रास्ता प्रज्वलित कर सकती है। गौरतलब है कि सोका गकाई इंटरनेशनल के अध्यक्ष डॉ. इकेदा ने संयुक्त राष्ट्र को प्राचीन भारतीय ज्ञान और करुणा पर आधारित अपने नवीनतम शांति प्रस्ताव (अपने साझा भविष्य की ओर : मानव एकजुटता के युग का निर्माण) भेजा है। जिसमें उन्होंने दुनिया के सभी देशों से प्राकृतिक आपदाओं और जलवायु परिवर्तन जैसे मुद्दों का सामना करने के लिए अपनी साझी विरासत को पहचानने का आग्रह किया है। इसी विषय पर यह वेबिनार आयोजित की गई थी।
यह है डॉ. इकेदा का शांति प्रस्ताव
अपने शांति प्रस्ताव में डॉ. इकेदा ने कहा है कि दुनिया को प्राकृतिक आपदा और जलवायु परिवर्तन परिवर्तन जैसे मुद्दों के लिए एक समग्र दृष्टिकोण अपनाने के लिए आवश्यकता है। इन्हीं मुद्दों की वजह से लोगों को अपने घरों और समुदाय को छोडऩे के लिए मजबूर होना पड़ रहा है। एेसे घर जहां वे लंबे समय से रह रहे थे। उनका कहना है कि घर और जमीन से संबंध टूटना और उससे जुड़ी दुख की भावनाएं, भूकंप और सुनामी जैसी बड़ी आपदाओं का एक अपरिहार्य पहलू है। स्वजनों और मित्रों से अचानक बिछुडऩे का दर्द वास्तव में असहनीय होता है। पीड़ा के इस दौर में पूरे समाज को एक साथ खड़े होकर उस व्यक्ति का साथ देना चाहिए।
क्या है सोका गकाई इंटरनेशनल ?
आपको बता दें कि सोका गकाई इंटरनेशनल शांति स्थापना के लिए वैश्विक नागरिकता के लिए शिक्षा को अपना आदर्श मानती है।इसके दुनिया भर में १९२ देशों में १२ मिलियन से भी अधिक सदस्य हैं। डॉ.इकेदा सोका गकाई इंटरनेशनल के अध्यक्ष होने के साथ ही शांतिदूत, दार्शनिक और प्रेरणादायक लेखक हैं। जो दुनिया भर के लगभग ३९५ विवि से मानद डॉक्टरेट प्राप्त कर चुके हैं। संयुक्त राष्ट्र ने उन्हें १९८३ में शांति पुरस्कार से भी सम्मानित किया था।

Rakhi Hajela Desk
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