पीजी डेंटल सर्जरी के छात्रों को परीक्षा में शामिल करने के निर्देश

न्यायालय ने राज्य सरकार की अपील को खारिज करते हुए छात्रों को परीक्षा में शामिल करने के एकलपीठ के आदेश को बरकरार रखा है।

By: KAMLESH AGARWAL

Published: 24 Jun 2020, 10:25 PM IST

जयपुर।
पीजी डेंटल सर्जरी के अंतिम वर्ष में अध्ययनरत छात्रों को राजस्थान उच्च न्यायालय से राहत मिल गई है। न्यायालय ने राज्य सरकार की अपील को खारिज करते हुए छात्रों को परीक्षा में शामिल करने के एकलपीठ के आदेश को बरकरार रखा है। न्यायालय ने अपने आदेश में कहा है कि इन छात्रों का परिणाम एकलपीठ की अनुमति के बिना जारी नहीं किया जाएगा।

राजस्थान स्वास्थ्य विज्ञान विश्वविद्यालय ने न्यायालय में अपील दायर कर कहा था कि एकलपीठ ने 15 जून को आदेश जारी कर याचिकाकर्ता छात्रों को परीक्षा में शामिल करने का आदेश दिया है। जबकि इन छात्रों का प्रवेश बिना नीट पीजी के हुआ है। डेंटल काउंसिल ऑफ इंडिया ने 12 सितंबर 2018 को पत्र जारी कर इनके प्रवेश को सही नहीं माना है। ऐसे में छात्र परीक्षा में शामिल होने के पात्र नहीं है। वहीं प्रभावित 16 छात्रों ने कहा की वर्ष 2017 में नीट पीजी काउंसलिंग में सिर्फ चार सीटें भरी थी। कोटा के डेंटल कॉलेज ने खाली रही सीटों पर छात्रों को प्रवेश दिया था इसके अलावा छात्रों ने वास्तविक दस्तावेज पेश कर विवि में पंजीकरण करवाया था। आरयूएचएस ने गत जनवरी माह में उनसे प्रेक्टिकल परीक्षा की फीस भी ली थी। जिस पर न्यायाधीश अभय चतुर्वेदी और न्यायाधीश महेंद्र कुमार गोयल की खंडपीठ ने आरयूएचएस की अपील को खारिज करते हुए छात्रों को परीक्षा की अनुमति देने के आदेश को बरकरार रखा है।

लैब टैक्निशियन भर्ती में अंतिम वर्ष के छात्रों को शामिल करने का आदेश


लैब टैक्नीशियन भर्ती में अंतिम वर्ष के छात्रों को शामिल करने के आदेश राजस्थान उच्च न्यायालय ने दिए हैं। अदालत ने याचिकाकर्ता छात्रों के ऑफ लाइन फार्म स्वीकार करने का निर्देश देते हुए प्रमुख चिकित्सा सचिव, अतिरिक्त निदेशक-प्रशासन व राजस्थान स्टॉफ सलेक्शन बोर्ड सहित अन्य से दो सप्ताह में जवाब मांगा है। राजू लाल सैन अंतिम वर्ष के अध्ययनरत छात्रों ने याचिका दायर कर कहा कि राज्य सरकार ने लैब टैक्नीशियन भर्ती 2020 के लिए 12 जून को विज्ञापन जारी किया था। इसके आवेदन की अंतिम तिथि 2 जुलाई है। प्रार्थी लैब टैक्नीशियन का प्रथम व अंतिम द्वितीय वर्ष की परीक्षा पास कर चुके हैं और उनके केवल अंतिम वर्ष के प्रैक्टिकल ही बाकी हैं। लेकिन उनके ऑन लाइन आवेदनों को स्वीकार नहीं किया जा रहा। जिस पर अवकाशकालीन न्यायाधीश अभय चतुर्वेदी ने अस्थाई तौर पर भर्ती प्रक्रिया में शामिल करने का निर्देश दिया।

KAMLESH AGARWAL Desk
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