मशीन से तैयार नहीं होते शिक्षक

मशीन से तैयार नहीं होते शिक्षक

Mahesh Chand Gupta | Publish: Sep, 06 2018 02:28:13 AM (IST) Jaipur, Rajasthan, India

- राज्य बाल अधिकार संरक्षण आयोग की अध्यक्ष मनन चतुर्वेदी से बातचीत

शैलेंद्र अग्रवाल,जयपुर. राज्य बाल अधिकार संरक्षण आयोग की अध्यक्ष मनन चतुर्वेदी का मानना है कि स्कूलों में पिछले वर्षों में शैक्षणिक माहौल सुधरा है, बच्चों को सुरक्षित माहौल भी मिल रहा है। लेकिन बच्चों की शिकायतों पर प्रभावी कार्रवाई कर व्यवस्था के प्रति उनका विश्वास मजबूत करने की जरूरत है।

स्कूलों की व्यवस्थाओं और सुधार के लिए आयोग द्वारा किए गए प्रयासों का जिक्र करते हुए चतुर्वेदी ने राजस्थान पत्रिका से अनौपचारिक बातचीत में कहा, इमरान जैसे अच्छे शिक्षक किसी मशीन से तैयार नहीं किए जा सकते। केवल कानून में फांसी का प्रावधान कर देने से ही बच्चों को पूरी तरह सुरक्षित नहीं किया जा सकता। इसके लिए घर और स्कूल में संस्कारों की पाठशाला खोलनी पड़ेगी।


शिक्षा व बच्चों के मुद्दों पर सीधे सवाल
- पत्रिका : स्कूलों से जुड़ी शिकायतों पर आयोग क्या कर रहा है?

- मनन : जिला शिक्षा अधिकारियों और बाल कल्याण समितियों को विस्तृत फॉर्मेट भेजकर इसी माह भरकर मांगा है। सभी को 20-20 स्कूलों का औचक निरीक्षण करने को कहा है। ब्लॉक अधिकारियों को भी इसी तरह के निर्देश दिए गए हैं।
- पत्रिका : आयोग के पास एसएमएस स्कूल की तरह कितने स्कूलों की शिकायतें आईं?

- मनन : कई स्कूलों की शिकायत आई। सुनवाई और कार्रवाई के लिए ६ सेल बनाए हुए हैं।
- पत्रिका : आयोग की सुनवाई क्यों नहीं हो रही?

- मनन : पहले आयोग में अधिकारी कम थे। आज सभी पद भरे हुए हैं। स्थिति यह है कि हर विभाग की टेबल पर आयोग का कोई न कोई पत्र मिल जाएगा। यह आयोग की बड़ी सफलता है।
- पत्रिका : आयोग सुनवाई कर रहा है लेकिन स्कूलों में क्या सुधार हुआ?

- मनन : चाइल्ड राइट क्लब बन रहे हैं। शिक्षा विभाग की अभी आई रिपोर्ट पर भी आयोग की पूरी नजर है। बच्चे जागरूक हुए हैं। स्कूलों में सुधार आया है।
- पत्रिका : शिकायतें बढ़ रही हैं या कमी आई है?

- मनन : स्कूल के स्तर पर बच्चों को गुड टच-बेड टच की जानकारी दी जाने लगी है। शिक्षक बच्चों को सजा देने से डरते हैं। इससे स्कूल में प्रताडऩा की शिकायतें घटी हैं।
- पत्रिका : हर स्कूल में इमरान जैसे शिक्षक क्यों नहीं?

- मनन : शिक्षक कोई मशीन नहीं कि निर्माण कर लें। बच्चों को भौतिकता की बजाय नैतिकता का पाठ पढ़ाएं तो पहले जैसा दर्जा फिर मिलने लगेगा। वे बच्चों में इंसानियत पैदा करने की जरूरत है।
- पत्रिका : शिक्षा का माहौल कैसे बदले?

- मनन : नैतिक शिक्षा को हाशिये पर डालना ठीक नहीं है। फांसी से अपराध पूरी तरह नहीं रुकेंगे, संस्कार देने होंगे।
- पत्रिका : महाराष्ट्र में 63 बालिकाओं को मामला सामने आया, उनका क्या रहा?

- मनन : ये बालिकाएं उनके मां-बाप की इच्छा से गई थीं। बाल कल्याण समिति उनका पुनर्वास करा रही है। बाल श्रम के लिए बच्चों को गुजरात ले जाने की शिकायतें भी कम हुई हैं।

 

 

 

 

 

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