वन विभाग की जमीन पर फर्जी पट्टे जारी करने का मामला

वन विभाग की जमीन पर फर्जी पट्टे जारी करने का मामला

Priyanka Yadav | Publish: Mar, 14 2018 01:52:40 PM (IST) Jaipur, Rajasthan, India

फर्जी पट्टों का मामला

जयपुर . सरकारी, सुविधा क्षेत्र, वन विभाग की जमीन पर पट्टे जारी करने के मामले में नगर निगम प्रशासन जल्द बड़ी कार्रवाई करेगा। ऐसे सभी फर्जी पट्टे निरस्त होंगे और जिम्मेदारों पर कड़ी कार्रवाई होगी। प्रशासन ने इसकी तैयारी शुरू कर दी है। इसमें टोंक रोड पर गोपालपुरा फ्लाईओवर से पहले न्यू लाइट कॉलोनी के मुख्य सड़क पर सुविधा क्षेत्र में दिए गए पट्टों की जांच के लिए कमेटी गठित कर दी गई है। ऐसे में उन पट्टेधारियों व अफसर-कर्मचारियों में बेचैनी बढ़ गई है, जो इसके लिए जिम्मेदार हैं। बताया जा रहा है कि इस मामले में ऊपरी स्तर पर मिलीभगत हुई है, इस कारण मामले को दबाने की भी कोशिश चल रही है। हालांकि, यह तो बानगी है मुख्यमंत्री शहरी जनकल्याण शिविर की आड़ में कई जगह ऐसा होने की आशंका जताई जा रही है। इसमें कई करोड़ रुपए का लेन-देन चला।

सुविधा क्षेत्र की भूमि, 60 करोड़ कीमत

नगर-निगम के राजस्व दितीय के अधिकारियों ने टोक रोड़ स्थित न्यू लाइट कॉलोनी के जेडीए द्वारा जारी स्कीम प्लान में हेराफेरी कर सुविधा क्षेत्र में करीब 2600 वर्गगज जमीन पर कॉमर्शियल पट्टे जारी कर दिए। इस भूखंड की कीमत 60 करोड़ रुपए से ज्यादा बताई जा रही है। गंभीर यह है कि नवम्बर, 2017 में दो सहायक नगर नियोजक ने नोटशीट पर टिप्पणी कर उपायुक्त राजस्व (द्वितीय) को सौंपी तो मामले का खुलासा भी हो गया। लेकिन निगम अधिकारियों ने तो पट्टे निरस्त किए और न ही जिम्मेदारों पर कार्रवाई।

कांग्रेस आज दर्ज कराएगी मुकदमे

फर्जी पट्टों के मामले में कांग्रेस पार्टी बुधवार को शहर के सभी थानों में मुकदमा दर्ज कराएगी। कांग्रेस के जिलाध्यक्ष प्रतापसिंह खाचरियावास ने बताया कि जनता के साथ नगर निगम के अधिकारियों और जनप्रतिनिधियों ने बड़ा धोखा किया है, उनकी सुविधा तक छीन ली गई। इतना बड़ा घोटाला सामने आने के बावजूद नगर निगम प्रशासन, महापौर व राज्य सरकार ने अब तक बड़ा एक्शन नहीं लिया है। जबकि, एसीबी में मुकदमा दर्ज कराया जाना चाहिए था।

यहां दिखावटी मामला दर्ज

सड़क हिस्से व सरकारी जमीन पर पट्टा जारी करने का मामला भी गरमाया हुआ है। ऐसे 4 पट्टे जारी किए गए। मामला उछला तो ज्योति नगर थाने में मामला दर्ज कराया गया। उपायुक्त इन्द्रजीत सिंह ने दर्ज मामले में लिखा है कि उनके फर्जी हस्ताक्षर से पट्टे जारी किए गए। जबकि, इस मामले में नोटशीट लिखे जाने से लेकर निर्धारित राशि की गणना व रोकड़ जमा कराने तक का काम निगम की तय प्रक्रिया के तहत ही हुआ है। ऐसे में अफसर सवालों के घेरे में है। हस्ताक्षर फर्जी है या नहीं, यह एफएसएल जांच के बाद ही साफ हो पाएगा। रिपोर्ट में एफएसएल जांच की मांग ही नहीं की गई।

नगर निगम आयुक्त रवि जैन ने कहा की अब तक की जांच में गलत तरीके से पट्टे जारी होने की आशंका सामने आ रही है। तय मानिए, जिम्मेदारों पर सख्त कार्रवाई होगी। ऐसे पट्टों को निरस्त किया जाएगा।

 

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