आप हैं आईटी एंटरप्रेन्योर?

आप हैं आईटी एंटरप्रेन्योर?

Shalini Agarwal | Publish: Sep, 05 2018 04:39:36 PM (IST) Jaipur, Rajasthan, India

आईटी स्टार्टअप को खड़ा करना किसी भी अन्य स्टार्टअप को चलाने से कहीं ज्यादा मुश्किल काम होता है।

किसी भी एंटरप्रेन्योर के लिए पहली सेल्स एनक्वायरी दोस्तों, परिजनों या पुराने साथियों से आती है। स्टार्टअप्स को अक्सर बिजनेस छोटे और मध्यम बिजनेसेज से भी मिलता है। इन छोटे और मध्यम बिजनेसेज को चीजें बेचने के अपने फायदे हैं लेकिन किसी भी स्टार्टअप के लिए बड़े फायदे के लिए बड़े-बड़े क्लाइंट्स को कुछ भी बेचना चुनौतीपूर्ण होता है, खासकर उस स्थिति में जब आपका स्टार्टअप आईटी सॉल्यूशंस और सर्विसेस को लेकर हो। देखते हैं क्या-क्या चुनौतियां आती हैं आपके सामने...

लंबा सेल्स साइकल
जब आप छोटी कंपनी को चीजें बेचते हैं तो वह तुरंत फैसले ले लेती है क्योंकि उसमें फैसले लेने वाले लोग या विभाग कम ही होते है लेकिन इसके उलट बड़ी कंपनियां प्रोसेस में काफी वक्त लगाती हैं। खर्चे का छोटे से छोटा फैसला टॉप मैनेजमेंट से लेकर आईटी, फाइनेंस, मार्केटिंग जैसे कई विभागों से गुजरता है, उसके बाद ही पैसा खर्च किया जाता है। हालांकि यह भी सही है कि बड़ी कंपनियां आपको मोटा मुनाफा देकर जाती हैं।


इंप्लीटेशन में लगता है वक्त
किसी भी आईटी प्रोजेक्ट के इंप्लीटेशन में फाउंडर या सीईओ होने के नाते आपको मुश्किल रूल्स और रोल्स के जाल से गुजरना होता है। इसके बाद कोई भी कंपनी या एंटरप्राइजेज इस आईटी सॉल्यूशन को डिप्लॉय करने में लंबा वक्त लगता है। यह चीज भी बड़ी कंपनियों के साथ ही होती है। छोटी कंपनियों में रूल्स का इतना चक्कर नहीं होता, इसलिए इंप्लीटेशन में भी कम वक्त लगता है।

कस्टमाइजेशन जरूरी है
किसी भी बड़ी कंपनी को आईटी सॉल्यूशंस बेचते वक्त वह इसे अपनी जरूरत के मुताबिक इसे आपसे कस्टमाइज करवाती है। आपको सॉल्यूशन उसके पहले से मौजूद सिस्टम में बिना किसी परेशानी के इंटीग्रेट होना जरूरी है। इसलिए आपको एक्सपट्र्स की जरूरत पड़ती है, जबकि छोटी कंपनियां ऐसा नहीं करतीं। यह भी याद रखें कि ये एक्सपट्र्स भी आपके स्टार्ट अप की कॉस्ट बढ़ा देते हैं।

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