
जाट महाकुंभ: सामाजिक सुधार के साथ राजनीतिक दखल बढ़ाने की उठेगी मांग
जयपुर. प्रदेश में यह चुनावी वर्ष है। दो दिन बाद जाट महाकुंभ होने जा रहा है। इस जाट महाकुंभ में क्या मांग उठेगी, उसकी राजनीतिक हलकों में चर्चा है। जाट महाकुंभ में सामाजिक चर्चा तो होगी ही, लेकिन जाट महाकुंभ के आयोजन कर्ताओं ने यह भी साफ कर दिया है कि जब उनकी संख्या अधिक है तो फिर क्यों ना विधानसभा चुनाव में सीटें भी समाज को ज्यादा मिले और मुख्यमंत्री भी जाट समाज से ही बने। महाकुंभ में यह भी मांग उठ सकती है कि जातिगत जनगणना हो, जिससे संख्या के हिसाब से समाज को ज्यादा से ज्यादा सीटें दी जाए।जाट महाकुंभ के मुख्य मुद्दों में राजनीति में शीर्ष नेतृत्व मिलने की मांग प्रमुख है। समाज के युवाओं को न्यायपालिका और प्रशासन में समानुपातिक प्रतिनिधित्व मिले। ओबीसी आरक्षण को बढ़ाकर 27 प्रतिशत किया जाए। ईआरसीपी सहित अन्य परियोजनाओं में राजस्थान का जल हिस्सा बढ़े। मोटे अनाज की उचित एमएसपी दरें तय हों। अखिल भारतीय न्यायिक आयोग का गठन हो। प्रत्येक गोपालक को गोशाला के समरूप अनुदान मिले। वाणिज्य-व्यापार में किसान पुत्रों को स्टार्टअप सुविधा भी मिले। इन सब मुद्दों पर भी जाट महाकुंभ में चर्चा होगी। इस महाकुंभ में सामाजिक कुरीतियों की बात भी होगी। समाज के सामने क्या चुनौतियां हैं। इस पर भी चर्चा होगी, लेकिन समाज का दखल हर राजनीतिक दल में कैसे बढ़े। यह मुद्दा भी फोकस में रहेगा।
इनका कहना है--
समाज में कुरीतियों को ठीक करना, युवाओं को आगे बढ़ाना। सत्ता में जनसंख्या के अनुरूप आरक्षण मिले। हमारी जनसंख्या के अनुसार ही चुनावों में हमें सभी राजनीतिक दल सीटों पर चुनाव लड़वाए। यह हमारी मुख्य मांगें होंगी। हमारे विधायक ज्यादा आएंगे तो मुख्यमंत्री भी समाज से बने, ऐसी मांग भी स्वत: उठेगी ही।
- उम्मेद सिंह ढूल, सदस्य आयोजन कमेटी, जाट महाकुंभ।
Published on:
03 Mar 2023 12:09 pm
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