एक दशक बीत जाने के बावजूद नहीं हो सका इंडोर एरिना शुरू

एक दशक बीत जाने के बावजूद नहीं हो सका इंडोर एरिना शुरू

Harshit Jain | Updated: 28 Aug 2018, 09:33:38 PM (IST) Jaipur, Rajasthan, India

मुख्यमंत्री का ड्रीम प्रोजेक्ट हुआ फिसड्डी साबित

जयपुर. एक दशक बीत जाने के बावजूद भी जयपुर विकास प्राधिकरण द्धारा जगतपुरा में ओएसईएस(शूटिंग रेंज और इंडोर एरिना स्टेडियम )अपने मूलस्वरूप में नहीं विकसित हो सका है। अन्तरराष्ट्रीय मापदण्डों के अनुरूप सुविधाएं यहां बिल्कुल विकसित नहीं हो सकी है। निशानेबाजी और तीरंदाजी की सुविधा यहां शुरू हो सकी है लेकिन पोलो एरिना फिलहाल नहीं बन सका है।

 

2016 में जेडीए ने शूटिंग रैंज का प्रोजेक्ट राजस्थान स्पोटर्स काउंसिल को सौंप दिया। ऐसे में मुख्यमंत्री के ड्रीम प्रोजेक्ट की छवि बिगड़ती जा रही है। जेडीए ने एरिना को अपने पास रखा हुआ है। एक्सपट्र्स का कहना है कि बड़े सरकारी उपक्रम जैसे फेल अथॉरिटी ऑफ इंडिया, ओएनबीएसी या सांई जैसी संस्थाओं का निवेश करवाकर प्रोजेक्ट को पूरा करवाना चािहए, ताकि खिलाडिय़ों को सस्ती दरों पर अंतरराष्ट्रीय स्तर की सुविधाएं उपलब्ध करवाई जा सके।

 

नहीं हो सकी रात में निशानेबाजी शुरू
शूटिंग रेंज में रात में निशानेबाजी करवाने की योजना सरकार की थी। निशानेबाजी के लिए रात में लाइटें लगाई जाने की विभाग की कवायद थी। इसके अलावा खेल के नए इलेक्ट्रॉनिक उपकरण खरीद के साथ खिलाडिय़ों के लिए सभी तरह की सुविधाओं का काम जल्द 2016 के बजट में घोषणा होने के बावजूद पूरा नहीं हो सका है। नेशनल गोल्ड मैडलिस्ट खिलाडिय़ों का कहना है कि तीरदांजी के लिए अच्छा मैदान होनी चाहिए, लेकिन यहां तो वह भी बीते कई साल से नहीं है।

 

फैक्ट फाइल
-2008 में हुई घोषणा
-2.22 हैक्टेयर भूमि
-65 करोड़ रुपए से ज्यादा हो चुके खर्च

 

वादे हुए खोखले साबित
10 मीटर शूटिंग रेंज में इलेक्ट्रॉनिक टार्गेट लगाने और बाकी 40 नए प्वॉइंट्स को विकसित करने, परिसर में कॉफी कैफे खोलने, शूटिंग रेंज के लिए खरीदे जाने वाले खेल उपकरण रखने के लिए लॉकर्स और खिलाडिय़ों के लिए ड्रेसिंग रूम, चेंजिंग रूम पर बनाने जाने का वादा खोखला साबित हो रहा है।

 

नहीं लग सका चोरी का पता
8 अप्रेल 2018 को चोर ताले तोड़कर तीरंदाजी के सामान चोरी कर ले गए। खिलाडिय़ों ने बताया कि शूटिंग रेंज के तीरंदाज कंपाउंड में करोड़ों रुपए का सामान रखा रहता है। इसके बाद भी सुरक्षा के खास इंतजाम नहीं किए गए। हर दिन सुबह शाम के समय ७० के आसपास खिलाड़ी दूरदराज से प्रेक्ट्रिस के लिए आते हैं। ऐसे में रात के समय यहां नाममात्र के सुरक्षा गार्ड हैं और न ही सीसीटीवी कैमरे। पांच माह बीत जाने के बावजूद पुलिस चोरों का पता लगाने में नाकाम साबित हुई है।

 

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