कभी लहरों में खेलता था राजस्थान का ये सरोवर, आज भगवान भी तरस रहे नौकायन को

जिन नहरों से भरता था तालाब, वे कब्जों में गुम, बस रही कॉलोनियां...

By: dinesh

Published: 19 May 2019, 08:30 AM IST

जयपुर।

राजधानी से महज 18-20 किलोमीटर दूर भगवान जगदीश ( Jagdish Temple in Goner ) की नगरी के रूप में प्रसिद्ध गोनेर जिस जगन्नाथ सरोवर ( Jagannath Sarovar ) के बूते इठलाता था, आज वहां दूर-दूर तक सूखी धरती और नौकायन को तरस रहे भगवान ही बचे हैं।

धार्मिक नगरी के बीच डिजिटल विलेज के रूप में पहचान बनाने की जद्दोजहद में गोनेर की लाइफ लाइन माने जाने वाले 9 हैक्टेयर में फैले इस प्राकृतिक तालाब का अस्तित्व पूरी तरह खतरे में है। जो तीन नहरें इसको हर साल लबालब रखती थीं, उनके तो आज वहां सिर्फ निशान ही बचे हैं। यहां पानी के बहाव क्षेत्र को पाटने का काम चल रहा है। तीनों प्रमुख नहरों के बीच में सडक़ निर्माण से लेकर कॉलोनियां तक सृजित कर दी गई हैं। इससे सटी बावडिय़ों की हालत बदतर हो गई है। यहां लगता है कि पानी के प्राकृतिक जल स्रोतों को सहेजने और पुनरूद्धार करने के बजाय उसका गला घोंटने का काम हो रहा है।

 

तीन जीवनदायिनियां: कहीं सडक़, कहीं कॉलोनियां काट घोंटा गला
पहली नहर
जीरोता, श्रीकिशनपुरा के पास के इलाके से बारिश के पानी के लिए प्राकृतिक नहर बनी हुई है। इसके बीच कई जगह बाउंड्रीवाल बना दी गई। तालाब से जोडऩे के लिए सडक़ के नीचे पाइप डाले गए, ज्यादा असर नहीं हुआ।

दूसरी नहर
जगतपुरा, रामनगरिया की तरफ से नहर आ रही है। यही प्रमुख स्रोत है तालाब में पानी आने का। यहां ज्यादातर हिस्सा खुला है लेकिन अंतिम छोर पर सडक़ से बहाव क्षेत्र प्रभावित हुआ है।

तीसरी नहर
सिरोली, दांतली इलाके से पानी की आवक रहती है, पर यहां प्राकृतिक बहाव क्षेत्र को बंद कर दिया। पंचायत समिति ने मुख्य सडक़ हिस्से में खुदाई कर बहाव क्षेत्र बनाने की कोशिश की, लेकिन फिर बीच में कई जगह बंद कर दिया गया।

 

दो वर्ष में एक मीटर गिर गया भूजल
तालाब में पानी नहीं होने से यहां का भूजल स्तर दो वर्ष में 1 मीटर तक गिर गया है। एक जगह पर तो योजना सृजित करने के लिए प्राकृतिक बहाव क्षेत्र को प्रभावित कर धड़ल्ले से पाइप डालने का काम चल रहा है।

 

कंक्रीट का जाल
गोनेर इलाके में सडक़ निर्माण कार्य चल रहा है, इसके लिए तालाब क्षेत्र में ही खुदाई कर वहां कंक्रीट व अन्य निर्माण सामग्री डाल दी गई। यहां तक कि कई जगह कैचमेंट हिस्से को भी नुकसान पहुंचा दिया गया।

 

अब सिर्फ परंपरा
खीर-मालपुआ बनाने में इसी पानी का उपयोग किया जाता था। साथ ही जलझूलनी एकादशी पर भगवान जगदीश सागर में नौका विहार करते रहे। पानी न आने की वजह से अब यह मात्र परंपरा बनकर रह गई है। तालाब के एक छोर पर बने मंदिर परिसर में कुएं का जलस्तर दिनों दिन कम होता जा रहा है। हालांकि, कुएं के पानी से भगवान को नहलाने से लेकर चरणामृत बनाने का काम आज भी होता है।

 

सरकार के दावे खोखले, इसी वजह से बिगड़ते गए हालात
हालात
मानसून में इन नहरों के जरिए खूब पानी आता था, लेकिन जगतपुरा से गोनेर के बीच कॉलोनियां विकसित होने व सडक़ों का निर्माण होने से पानी की आवक कम हो गई। 10 सालों से सागर पूरी तरह से नहीं भर पाया है। थोड़ा सा पानी ही आकर रह जाता है।

दावा
कुछ साल पहले टयूबवैल से तालाब को भरने की योजना बनाई थी, लेकिन इसको अमलीजामा नहीं पहनाया जा सका। इस योजना के तहत प्रतिदिन तीन ट्यूबवेल से 4.5 लाख लीटर प्रतिदिन आने का दावा किया गया।

हकीकत
सडक़ चौड़ी करने के नाम पर जेडीए ने तालाब की पाल को तोड़ इसके पुराने स्वरूप को बिगाड़ दिया था। यही नहीं, तालाब के पास बागड़ा धर्मशाला के पास कुएं को पाट सडक़ चौड़ी कर दी। महादेवजी की बावड़ी को पाट सडक़ की भी योजना थी।

- जगन्नाथ सरोवर आसपास की लाइफ लाइन माना जाता रहा है। यहां 3 नहरें आती हैं। कई जगह तो नहरें अपना स्वरूप तक खो चुकी हैं। लोगों ने कब्जे कर लिए। अतिक्रमण हटा दे तो पानी की आवक हो सकती है।
अरुण जैन, उप सरपंच, गोनेर

- पानी का हर प्राकृतिक स्रोत अतिक्रमण मुक्त होना ही चाहिए। जगन्नाथ सरोवर का मामला देखना होगा, संबंधित अधिकारियों से जानकारी लेने के बाद मौके की वास्तविक स्थिति बता सकता हूं। -टी. रविकांत, जेडीसी

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