जयगढ़ किले में रखी है विश्व की सबसे बड़ी और अनोखी तोप जिसे देखने खिचे चले आते हैं लोग

जयगढ़ किले में रखी  है विश्व की सबसे बड़ी और अनोखी तोप जिसे देखने खिचे चले आते हैं लोग

जयगढ़ किले में रखी एेतिहासिक जयबाण तोप अपने आप में अनोखाी है। निर्माण के बाद इसको परीक्षण के तौर पर सिर्फ एक बार चलाया गया और जहां इसका गोला जाकर गिरा वहां एक तालाब बन गया।

गुलाबी नगरी में आने वाले सैलानियों के लिए यह किसी अजूबे से कम नहीं है। इसको देखने के लिए लोग खिचे चले आते हैं। जीहां। हम बात कर रहे हैं जयगढ़ किले में रखी एेतिहासिक जयबाण तोप की। यह तोप अपने आप में अनोखाी है। निर्माण के बाद इसको परीक्षण के तौर पर सिर्फ एक बार चलाया गया और जहां इसका गोला जाकर गिरा वहां एक तालाब बन गया। 


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जयपुर के संस्थापक सवाई जयसिंह ने 1720 ई. में इस तोप का निर्माण कराया था। कहा जाता है कि 17वीं शताब्दी में मुगल कमजोर पडऩे लगे और मराठों की ताकत बढऩे लगी। एेसे में सवाईजयसिंह ने जयपुर बसाने से पहले ठोस सुरक्षा बंदोबस्त किए। शहर में चारों ओर मजबूत परकोटा और भव्य दरवाजों का निर्माण कराया। मराठों के हमले से बचने के लिए जयगढ़ के शास्त्र कार ााने में ही जयबाण तोप की ढलाई की गई। 


इसकी लंबाई लगभग बीस फुट और वजन 50 टन है। पीतल, तांबा, लोहा व अन्य धातुओं से बनी तोप की मारक क्षमता करीब 22 मील है। इसे एक बार चलाने के लिए करीब 100 किलो बारूद की जरूरत होती है। तोप की नली का व्यास करीब 11 इंच है। एेसा कहा जाता है कि जयबाण तोप को परीक्षण के लिए जयगढ़ से सिर्फ एक बार चलाया गया। इसका गोला 35 किलोमीटर दूर चाकसू में जाकर गिरा। गोले का विस्फोट इतना शक्तिशाली था कि जहां गोला गिरा वहां काफी दूर में बड़ा गडढ़ा हो गया जो कि बाद में बरसाती पानी भरने से तालाब बन गया। 

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