मामला दर्ज कराना है... तो बाद में आना

- पहले चुनाव और अब साल के आखिरी दिनों का चक्कर
- अपना रिकॉर्ड साफ-सुथरा दिखाने के फेर में पड़ी पुलिस

By: Mukesh Sharma

Published: 18 Dec 2018, 08:30 PM IST

मुकेश शर्मा

जयपुर. थाने और पुलिस यों तो जनता की सुरक्षा तय करने और पीडि़तों की सुनवाई कर उन्हें न्याय दिलाने के लिए हैं लेकिन राजधानी के थानों की पुलिस इन दिनों अलग ही रवैया दिखा रही है। अपना रिकॉर्ड साफ-सुथरा दिखाने के चक्कर में वह मामले दर्ज करने से कन्नी काट रही है। पहले चुनाव और अब साल के आखिरी दिनों के फेर में पड़कर पीडि़तों को टरकाने में जुटी है।
वर्ष 2018 में जनवरी से दिसम्बर तक के जो आंकड़े पुलिस ने उच्च स्तर पर भेजे हैं, खुद उनसे जाहिर है कि एफआइआर दर्ज करने की संख्या पिछले दिनों से लगातार घटी है। जनवरी में मामले तेजी से दर्ज हुए जबकि साल के मध्य से यह संख्या कम होना शुरू हुई, जो अब बहुत धीमी पड़ गई है।

ये हैं उदाहरण

- केस-01 : शिप्रापथ थाना : महारानी फार्म स्थित विश्वकर्मा नगर द्वितीय निवासी आकाश ने हनीमून के लिए ऑनलाइन थाईलैंड का पैकेज लिया। इंटर ग्लोबल होलीडेज्स कंपनी के खाते में 55 हजार रुपए ट्रांसफर किए लेकिन कंपनी ने हवाईजहाज का फर्जी टिकट भेज दिया। पीएनआर नंबर जांचा तो ठगी का पता चला। मामला दर्ज करने की बजाय पुलिस अक्टूबर से चक्कर लगवा रही है।
- केस-02 : गलतागेट थाना : सोडाला में न्यू सांगानेर रोड स्थित कमल विहार विस्तार निवासी रितेश पहाडिय़ा अपनी पत्नी के साथ खोले के हनुमान मंदिर के पास गोविंद वाटिका में अपने ससुराल गया था। वहां गाड़ी गाड़ी खड़ी की ही थी कि बंगाली बाबा की बगीची की तरफ से रेसिंग बाइक पर आए 3 युवक उसे टक्कर मारकर पर्स छीन ले गए। सितम्बर से पुलिस चक्कर लगवाती रही, फिर पीडि़त को ही कह दिया कि जाओ सबूत लाओ।

आंकड़े गवाह, मामले दर्ज करने से यों कन्नी काटती गई पुलिस

पुलिस जिला --- 16 जनवरी --- 16 मई --- 16 अगस्त --- 16 दिसम्बर
पूर्व --- 34 --- 36 --- 18 --- 13

पश्चिम --- 19 --- 28 --- 14 --- 3
उत्तर --- 23 --- 11 --- 12 --- 2

दक्षिण --- 14 --- 24 --- 13 --- 3
(बानगी के लिए चार अलग-अलग महीनों में उसी तारीख को दर्ज मुकदमों की संख्या)

-------------------------------
थानों में पुलिस की मंशा रहती है कि वर्ष के अंत में लंबित मामले कम रहें, इसलिए मुकदमे दर्ज करने से बचती है। मामले लंबित होने से थाने ही नहीं बल्कि जिले और स्टेट की रिपोर्ट भी खराब होती है। मामला पुराना दर्ज कर खुलासा नहीं होने पर एफआर लगाना भी पुलिस के लिए आसान होता है।

- राजेन्द्र सिंह शेखावत, सेवानिवृत्त पुलिस अधिकारी

Mukesh Sharma Desk
और पढ़े

राजस्थान पत्रिका लाइव टीवी

हमारी वेबसाइट पर कंटेंट का प्रयोग जारी रखकर आप हमारी गोपनीयता नीति और कूकीज नीति से सहमत होते हैं।
OK
Ad Block is Banned