जान ले लेगा ये जर्जरहाल..? जयपुर के इन ओवरब्रिज से गुजरना हो सकता है खतरनाक !

Pawan kumar | Publish: Aug, 08 2019 12:13:59 PM (IST) | Updated: Aug, 08 2019 02:42:46 PM (IST) Jaipur, Jaipur, Rajasthan, India

- जयपुर विकास प्राधिकरण सेंसर तकनीक से तैयार करेगा रेलवे ओवरब्रिज की हेल्थ रिपोर्ट

- सेंसर बताएगा जयपुर में किस आरओबी की कितनी उम्र बाकी

जयपुर। जयपुर शहर के ज्यादा रेलवे ओवरब्रिज और पुलिया के स्ट्रक्चर पुराने पड़ चुके हैं, जबकि उन पर ट्रेफिक का लोड लगातार बढ़ रहा है। शहर के ज्यादातर ओवरब्रिज ऐसे हैं जब उन पर से वाहन गुजरता है तो कंपन और धड़धड़ाहट आसानी से महसूस की जा सकती है। शहर के जेएलएन रोड स्थित मालवीय नगर रेलवे ओवरब्रिज, बाइस गोदाम आरओबी, झोटवाड़ा आरओबी, गोपालपुरा पुलिया, त्रिवेणी नगर पुलिया और सांगानेर पुलिया समेत शहर के ओवरब्रिज समयावधि पूरी कर चुके हैं। जेडीए ने कुछ अर्सा पहले ही इन ओवरब्रिज के बियरिंग्स बदलकर काम चलाने लायक बनाया था। जयपुर ( Pinkcity Jaipur ) की सड़कों पर मौजूदा वक्त में करीबन 15 लाख वाहन दौड़ रहे हैं। और साल दर साल वाहनों की संख्या में ईजाफा भी हो रहा है। लेकिन शहर के इन्फ्रास्टक्चर ( infrastructure ) में वाहनों की संख्या के अनुपात में बढ़ोतरी नहीं हुई है। इससे सड़कों और रेलवे ओवरब्रिज पर भार लगातार बढ़ रहा है। जयपुर में बने ज्यादातर रेलवे ओवरब्रिज दो दशक पुराने हैं। अब ये आशंका पैदा हो गई है कि क्या शहर के आरओबी मौजूदा यातायात को झेलने की क्षमता रखते हैं, यदि रखते भी है तो कब तक?

स्थिति को देखते हुए जयपुर विकास प्राधिकरण इस बात का पता लगाने की कोशिश कर रहा है कि किस आरओबी की कितनी उम्र बाकी हैं। और शहर में मौजूद आरओबी में से कितने रेलवे ओवरब्रिज ऐसे हैं जो मौजूदा वाहन संख्या का भार वहन करने की क्षमता रखते हैं। जेडीए का मकसद ये जानना है कि मौजूदा आरओबी में से कितने आरओबी तय मानकों पर खरे हैं और कितने आरओबी ओवरलोड हैं, जिन्हें नया बनाने की जरूरत है।

जानकारी के अनुसार जेडीए शहर में मौजूदा रेलवे ओवरब्रिज की हेल्थ का पता लगाने के लिए सेंसर टेक्नोलॉजी की मदद लेगा। जयपुर विकास प्राधिकरण ( Jaipur Development Authority ) शहर के सभी रेलवे ओवरब्रिज में सेंसर इंस्टॉल करेगा। इसके बाद तय समय तक सेंसर से डेटा एकत्र किया जाएगा। फिर डेटा का विश्लेष्ण कर आरओबी की मौजूदा वाहन संख्या के हिसाब से क्षमता और कितनी उम्र बाकी है, इसका पता लगाया जाएगा। जो आरओबी अनफिट या कमजोर पाए जाएंगे, उनकी जगह नए रेलवे ओवरब्रिज का निर्माण करने की योजना बनेगी। जेडीए शहर में बढ़ रहे यातायात को देखते हुए आरओबी की भार वहन क्षमता और तकनीकी तौर पर आरआबी की उम्र पता लगाने की योजना पर काम कर रहा है।

क्या है वाइब्रेशन सेंसर टेक्नोलॉजी
जानकारी के अनुसार वाइब्रेशन सेंसर टेक्नोलॉजी ( vibration Sensor technology ) एक जटिल प्रक्रिया है। इस तकनीक में रेलवे ओवरब्रिज( railway overbridge ) के विभिन्न हिस्सों में सेंसर इंस्टॉल किए जाते हैं, जो आरओबी पर से गुजरने वाले वाहन से उत्पन्न कंपन (वाइब्रेशन) को काउंट करता है। प्रत्येक वाहन की आवाजाही की वाइब्रेशन का डेटा इसमें सेंसर स्टोर करता रहता है। साथ ही जब रेलगाड़ी आरओबी के नीचे से गुजरती है, तो उसकी वाइब्रेशन भी काउंट होती है। एक तय अवधि तक का डेटा स्टोर करके उसका अध्ययन किया जाता है। स्टडी का कई पहलुओं के आधार पर अध्ययन होता है। वाइब्रेशन काउंट डेटाके विश्लेष्ण से आरओबी के स्ट्रक्चर की मौजूदा स्थिति और भार वहन क्षमता का पता चलता है। जेडीए भी जयपुर के आरओबी का हेल्थ रिपोर्ट कार्ड तैयार करने के लिए यही तकनीक अपनाएगा

प्रति घंटे वाहन संख्या का भी चलेगा पता
जानकारी के अनुसार सेंसर तकनीक से आरओबी पर से गुजरने वाले वाहनों की संख्या, पी आॅवर्स और नॉन पीक आॅवर्स में प्रति घंटे कितने वाहन गुजरते हैं, इसका भी पता चल सकेगा। दिन—रात के 24 घंटे का डिटेल व्हीकल डेटा मिलने से ट्रेफिक पुलिस ( traffic police ) को रूट प्लान ( root plan ) बनाने में भी मदद मिलेगी। साथ ही जेडीए भविष्य के हिसाब से कहां नया आरओबी बनेगा इसकी प्लानिंग कर सकेगा।

 

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