आस्था बढ़ी, सिमटा बाजार

गणेशजी (ganeshji) के प्रति आस्था बढ़ी है, लेकिन गणेशजी की मूर्तियों (Sculptures) को लेकर बाजार (bazar) सिमटता जा रहा है। गणेशजी की छोटी-छोटी मूर्तियां (Sculptures) अब बाजार से बाहर होती जा रही है। इसका सबसे बड़ा असर पीढि़यों से गणेशजी की मूर्तियां बनाने वालों पर पड़ा है। अब उनका रोजगार कम (less employment) होता जा रहा है। कभी दो से तीन माह पहले से ही शहर में गणेशजी की मूर्तियां बनाना शुरू हो जाता था, वहीं अब यह काम सिर्फ 15 से 20 दिन का रह गया है।

By: Girraj Sharma

Published: 05 Sep 2019, 09:28 PM IST

आस्था बढ़ी, सिमटा बाजार

गणेशजी की मूर्तियां बनाने वालों का कम होता रोजगार
पीढि़यों से बना रहे गणेशजी की मूर्तियां
अब गणेश चतुर्थी पर सिर्फ 15 से 20 दिन का ही काम

जयपुर। गणेशजी (ganeshji) के प्रति आस्था बढ़ी है, लेकिन गणेशजी की मूर्तियों (Sculptures) को लेकर बाजार (bazar) सिमटता जा रहा है। गणेशजी की छोटी-छोटी मूर्तियां (Sculptures) अब बाजार से बाहर होती जा रही है। इसका सबसे बड़ा असर पीढि़यों से गणेशजी की मूर्तियां बनाने वालों पर पड़ा है। अब उनका रोजगार कम (less employment) होता जा रहा है। कभी दो से तीन माह पहले से ही शहर में गणेशजी की मूर्तियां बनाना शुरू हो जाता था, वहीं अब यह काम सिर्फ 15 से 20 दिन का रह गया है। मूर्तिकारों का मानें तो छोटे-छोटे गणेशजी की मूर्तियों के अब गिने-चुने ही खरीददार रह गए है।

गणेश चतुर्थी से अनंत चतुर्दशी तक गणेश पूजा महोत्सव का आयोजन होता है। इस दौरान लोग घरों में गणेशजी की स्थापना करते हैं। शहर में आज भी कुछ परिवार गणेशजी की मूर्तियां बनाने में जुटे हुए हैं। ये लोग पीढि़यों से गणेशजी व लक्ष्मीजी की मूर्तियां बनाने का काम करते आए हैं। कभी ये लोग गणेश चतुर्थी से दो-तीन माह पहले गणेशजी की मूर्तियां बनाने लग जाते थे, जो अनंत चतुर्दशी तक मूर्तियां बनाने का काम करते थे। इसके बाद दीपावली के लिए लक्ष्मी व गणेशजी की मूर्तियां बनाना शुरू कर देते थे, लेकिन अब उनके दिन गर्दिश में हैं। जलेब चौक के पास चांदनी चौक में पीढि़यों से मूर्ति बनाने का काम करने वाले राजेन्द्र सिंह बताते हैं कि पहले लोग घरों में गणेश पूजन के साथ गणेश पूजा महोत्सव में छोटे-छोटे गणेशजी की स्थापना करते थे। ये मूर्तियां काफी चलन में थी। इनमें 3 इंच से 8 इंच तक की गणेशजी की मूर्तियां खूब बिकती थी, लेकिन अब लोग विसर्जन के लिए बड़ी मूर्तियां काम में लेने लग गए हैं। घरों में भी लोग मार्बल आदि की मूर्तियां काम में लेने लगे हैं। एेसे में ये मूर्तियां चलन से बाहर होती जा रही है। राजेन्द्र बताते हैं कि उन्हेांने चार-पांच पीढ़ी से यही काम सीखा है, अब कोई अन्य काम उन्हें नहीं आता है। जहां पहले पूरे साल गणेशजी व लक्ष्मीजी आदि की मूर्तियां बनाने का काम करते थे, वहीं अब यह काम सिर्फ 15 दिन का रह गया है। प्लास्टर ऑफ पेरिस (पीओपी) पर रोक लगने से भी गणेशजी की मूॢतयां बनाने वालों के काम पर असर पड़ा है।

Girraj Sharma Desk
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