आखिरी वक्त तक बागियों को मनाने की जद्दोजहद, दोपहर 3 बजे तक माने तो ठीक, नहीं तो चलेगा अनुशासन का डंडा!

नगर निगम चुनाव 2020, नामांकन वापसी का आज आखिरी दिन, दोपहर तीन बजे तक है नाम वापसी का आखिरी मौक़ा, बागियों को मनाने में जुटीं कांग्रेस-भाजपा, विधायक-पूर्व विधायक-संगठन पदाधिकारी सक्रीय, कुछ वार्डों में सांसद तक जुट रहे मान-मनव्वल में, पार्टी प्रत्याशी भी कर रहे बागियों को मनाने का अंतिम प्रयास, दावेदारी बरकरार रखने वालों पर होगी अनुशासनात्मक कार्रवाई

 

By: nakul

Published: 22 Oct 2020, 09:37 AM IST

जयपुर।

नगर निगम चुनाव में नामांकन वापसी के आखिरी दिन आज बागियों को मनाने के अंतिम प्रयास किये जा रहे हैं। मान-मनव्वल दोपहर तीन बजे नामांकन वापसी के आखिरी समय दोपहर तीन बजे तक परवान पर रहेगी। पार्टी के अधिकृत प्रत्याशी के समर्थन में बागी कार्यकर्ता यदि नाम वापसी के लिए मान गया तो ठीक, नहीं तो फिर राजनीतिक दल नियमों के अनुसार उनपर अनुशासन का डंडा चलाएंगे।

आसान नहीं मान-मनव्वल की राह
टिकिट नहीं मिलने से नाराज़ कार्यकर्ताओं का बागी होकर नामांकन दाखिल करने वालों की फहरिस्त कांग्रेस-भाजपा दोनों ही पार्टियों में कम नहीं है। लिहाजा दोनों ही संगठनों के नेता विभिन्न वार्डों के बागियों को मनाने की जुगत में दिख रहे हैं। विधायक, पूर्व विधायक, संगठन पदाधिकारियों से लेकर सांसद तक रूठे कार्यकर्ताओं को मनाने में जुटे हैं।

वहीं दोनों ही दलों ने बूथ इकाई के नेताओं को सक्रीय कर दिया है। हालांकि ज़्यादातर वार्ड ऐसे हैं जहां बूथ इकाइयों में ही टिकिट वितरण को लेकर राजनीतिक दलों से नाराजगी है। आलम ये है कि कई बूथ पदाधिकारियों ने अपने इस्तीफे तक पार्टियों को भिजवा दिए हैं। ऐसे में बागियों को मनाना दोनों ही दलों के लिए चुनौती भरा है।

पार्टी प्रत्याशी भी लगे रूठों को मनाने
संगठन स्तर पर भले ही बागियों को नाम वापस लेने के लिए नेता सक्रीय हैं लेकिन उससे कहीं ज़्यादा सक्रीय वार्ड में पार्टी के अधिकृत प्रत्याशी और उनके समर्थक हैं। नामांकन दाखिल होने के बाद से ही उन्होंने बागियों को मनाने के हरसंभव प्रयास शुरू कर दिए जो आखिरी समय तक जारी रहेंगे। दोनों ही दलों के संगठन ने भी अधिकृत प्रत्याशियों को ही बागियों को मनाने के लिए पुरजोर कोशिश करने के निर्देश दिए हैं। पार्टी प्रत्याशी तो बागियों के अलावा अन्य निर्दलीयों को भी बैठाने की जद्दोजहद में जुटे हुए हैं।

नहीं माने तो अनुशासन का डंडा!
नामांकन वापसी का वक्त गुजरने के साथ ही वार्ड चुनाव में प्रत्याशियों की असल तस्वीर सामने आएगी। किन वार्डों में कितने बागियों ने नाम वापस लिए और कितने वार्डों में वे टस-से-मस रहे यानी बागी बनकर दावेदारी बरकरार रखी ये सब सामने आ जाएगा। लाख कोशिशों के बाद भी नाम वापस नहीं लेने वाले बागियों के खिलाफ दोनों ही दल अनुशासनात्मक कार्रवाई करेंगे।

nakul Desk
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