JLF 2018: बचपन में मेरे घर में हिन्दी फिल्मों पर था बैन, अब बदल चुका है यंग बंगाल- अजोय बोस

JLF 2018: बचपन में मेरे घर में हिन्दी फिल्मों पर था बैन, अब बदल चुका है यंग बंगाल- अजोय बोस

Punit Kumar | Publish: Jan, 26 2018 08:48:02 PM (IST) Jaipur, Rajasthan, India

मेरे बचपन में हिंदी फिल्में देखना और हिंदी बैन थी, लेकिन अब काफी बदलाव आ गया है। बंगाली अब ग्लोबल हो रहे हैं...

जयपुर। जेएलएफ-2018 में शुक्रवार को द रोसोगुल्ला वॉर सेशन की शुरुआत बेहद रोचक अंदाज में हुई। सत्र की शुरुआत में सभी पैनेलिस्ट हाथ में दोना लेकर फेमस इंडियन स्वीट 'रसगुल्ला' खाते दिखे। तो वहीं इसके बाद संजोय. के. रॉय ने बीते दिनों चर्चा में रहे विषय 'रसगुल्ला ओरिजन' को सेशन में व्यंग्य के अंदाज में बयान करते नजर आएं। जबकि इस सेशन में बतौर स्पीकर अजोय बोस, अरूणभ सिन्हा, संजोय.के. रॉय . सुदीप चक्रवर्ती, स्वप्नदास गुप्ता विद् संपूर्णा चटर्जी ने अपनी मौजूदगी दर्ज कराई।

 

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इस दौरान संजोय ने सभी पैनेलिस्ट से कहा कि आपको बता दूं कि ये ना उड़ीया रसगुल्ला है और ना ही बंगाली रसगुल्ला, ये 'राजस्थानी' रसगुल्ला है। फिर धीरे-धीरे चर्चा 'बंगाली' होने की डेफिनेशन पर जा टिकी। इस दौरान सबसे पहले सुदीप चक्रवर्ती ने अपनी बुक के जरिए बंगाली होने की डिफिनेशन बताई। थोड़ी देर में डिस्कशन बंगाली और गैर बंगाली की ओर बढ़ने लगा, जिसमें अप्रवासी बंगाली कॉन्फिलिक्ट, बांग्लादेश के बंगालियों का भाषाई प्रेम और यंग बंगाल (यंगस्टर्स) की सोच में आने वाले बदलावों पर भी चर्चा हुई।

 

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सेशन के दौरान अजोय बोस ने कहा कि मुझे याद है कि मेरे बचपन में हिंदी फिल्में देखना और हिंदी बैन थी, लेकिन अब काफी बदलाव आ गया है। बंगाली अब ग्लोबल हो रहे हैं। अब वहां हिंदी सुनी भी जा रही हैं और देखी भी जा रही है। संजोय ने कहा कि हमें क्षेत्रीय आधार मराठी, बंगाली, राजस्थानी और गुजराती को छोड़कर अब ग्लोबल रिप्रजेंटेशन (वसुवैध कुटम्बकम) होने की जरूरत है। इसी के साथ सेशन में उन्होंने मारवाड़ी कंप्यूनिटी को भी धन्यवाद दिया, लेकिन सेशन में असल में बंगाली कौन हैं, ये सवाल पीछे छूटता नजर आया।

 

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