बड़े नेताओं को कमान, धरातल के मुद्दे न हो जाए गौण

प्रदेश के 6 नव गठित नगर निगमों के चुनावी (Jaipur Municipal election 2020) दंगल में बड़े नेताओं की सक्रियता ने पार्टी की प्रतिष्ठा को दांव पर लगा दिया है। बड़े नेताओं के हाथों में शहरी सरकार के चुनावों की कमान, कहीं धरातल के मुद्दों को गौण न कर दें। ये सवाल आम कार्यकर्ता के साथ जनता के जेहन में खड़े हो रहे है।

By: Girraj Sharma

Updated: 14 Oct 2020, 06:03 PM IST

दंगल शहरी सरकार का...

बड़े नेताओं को कमान, धरातल के मुद्दे न हो जाए गौण

जयपुर। प्रदेश के 6 नव गठित नगर निगमों के चुनावी (Jaipur Municipal election 2020) दंगल में बड़े नेताओं की सक्रियता ने पार्टी की प्रतिष्ठा को दांव पर लगा दिया है। बड़े नेताओं के हाथों में शहरी सरकार के चुनावों की कमान, कहीं धरातल के मुद्दों को गौण न कर दें। राजधानी जयपुर सहित जोधपुर व कोटा में नगर निगमों में पार्टी का बोर्ड बनाने के चक्कर में जमीन से जुड़े कार्यकर्ताओं को पीछे न धकेल दें। ये सवाल आम कार्यकर्ता के साथ जनता के जेहन में खड़े हो रहे है। जनता शहर की नियमित सफाई, नगर निगम के काम आसानी से हो जाए..., ऐसे छोटे—छोटे मुद्दों का हल चाहती है।

राजधानी जयपुर की बात करें तो जयपुर विश्व विरासत शहर की सूची में शामिल हो चुका है। यहां की जनता शहर के हेरिटेज को संजाए रखने, अतिक्रमणों पर लगाम लगाने, आवारा पशुओं से शहर को मुक्ति दिलाने... जैसी छोटी—छोटी समस्याओं से निजात पाने की उम्मीद लगाए बैठी है। शहर हेरिटेज नगर निगम और जयपुर ग्रेटर नगर निगम में बंट गया है। 91 से बढ़कर 250 वार्ड हो गए है। यानी अब हर वार्ड का दायरा सिमटकर छोटा हो गया। अब ऐसे उम्मीदवार को टिकट मिले, जिसकी पकड़ हर गली, हर घर तक हो। पार्षद प्रत्याशी स्थानीय समस्याओं से रू—ब—रू हो, वहां के विकास की प्राथमिकताएं जानें।

शहर की समस्या : जनता की चाह

1. हर राह पर कचरा—गंदगी : शहर में सफाई व्यवस्था में सुधार की जरूरत। डोर—टू—डोर कचरा संग्रहण व्यवस्था 70 फसदी भी सफल नहीं हो पाई। हर घर तक कचरा लेने के लिए हूपर पहुंचे।
2. सड़क से बरामदों तक अतिक्रमण : अतिक्रमण शहर का स्वरूप बिगाड़ रहा है, शहर अतिक्रमण मुक्त हो। सड़क के साथ बरामदों से अतिक्रमण हटाने और प्रभावी मॉनिटरिंग की व्यवस्था हो।
3. स्वरूप खोता हेरिटेज : जयपुर विश्व विरासत शहर है। विरासत को संजोए रखने का प्लान धरातल पर उतरे।
4. सड़क पर बहता सीवरेज : पुरानी सीवरेज लाइनों को बदला जाए, सीवर जाम की समस्या का तुरंत निदान हो।
5. ट्रैफिक से बाजार जाम : ट्रैफिक जाम से मिले निजात, बाजारों में पार्किंग सुविधा को व्यवस्थित किया जाए। पार्किंग के नाम पर जनता से लूट बंद हो।
6. हर राह पर आवारा पशु : शहर को आवारा पशुओं से निजात मिलनी चाहिए। अवैध पशु डेयरियां शहर से बाहर शिफ्ट हो। जिससे जयपुर को एनिमल सिटी की बदनामी से बचाया जा सके।
7. कॉम्प्लेक्स में बदलती हवेलियां : अवैध निर्माण शहर के वास्तु के साथ स्वरूप को बदल रहा है। अवैध निर्माणों पर प्रभावी रोक लगे, अधिकारियों की जिम्मेदारी तय हो।
8. शहर को नहीं कर पाए रोशन : शहर में सोडियम की जगह एलईडी लाइटें लगाई जा रही है, लेकिन इसमें भी राजनीति ही हावी होती नजर आ रही है। शहर के कई इलाके और अंदरुनी गलियां अभी भी अंधेरे में रहती है। वहां लाइटें लगाई जाए।
9. बाहरी वार्डों का हो विकास : शहर का विस्तार दिनों—दिन होता जा रहा है। 91 से बढ़ाकर 250 वार्ड कर दिए गए, लेकिन बाहरी वार्डों के विकास का कोई प्लान तैयार नहीं किया जाता है। सड़क, नालियों के निर्माण का बजट भी अलग से नहीं दिया जाता है। ऐसे में बाहरी वार्डों के विकास के लिए अलग से बजट हो।
10. ग्रीन सिटी का सपना अभी अधूरा : जयपुर ग्रीन सिटी का सपना अभी अधूरा ही है। हर साल लाखों रुपए के पौधे लगाए जाते है, लेकिन देखभाल के लिए कोई प्लान या जिम्मेदारी तय नहीं होने से शहर हरा—भरा नहीं हो पा रहा है।

Girraj Sharma Desk
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