जयपुर की आफरीन को पति ने SPEED POST से भेजा था तलाक, सुप्रीम कोर्ट में दी थी चुनौती

जयपुर में एक 28 साल की मुस्लिम महिला को उसके पति ने स्पीड पोस्ट के ज़रिये तलाक दिया था।

By: nakul

Published: 22 Aug 2017, 11:50 AM IST

जयपुर

तीन तलाक के मुद्दे पर सुप्रीम कोर्ट का ऐतिहासिक फैसला आया है। सुप्रीम कोर्ट ने एक साथ तीन तलाक को खत्म कर दिया है। कोर्ट ने अपने फैसले में कहा कि केंद्र सरकार 6 महीने के अंदर संसद में इसको लेकर कानून बनाए। सुप्रीम कोर्ट में मुख्य न्यायधीश जेएस खेहर के नेतृत्व में पांच जजों की पीठ ने ये ऐतिहासिक फैसला सुनाया है। कोर्ट में तीन जज तीन तलाक को अंसवैधानिक घोषित करने के पक्ष में थे, वहीं दो जज इसके पक्ष में नहीं थे।

 

जयपुर की महिला को पति ने स्पीड पोस्ट से भेजा था तलाक
गौरतलब है कि पिछले साल ही जयपुर में तलाक से बेहद चौंकाने वाला मामला सुर्ख़ियों में आया था। इस मामले में एक 28 साल की मुस्लिम महिला को उसके पति ने स्पीड पोस्ट के ज़रिये तलाक दे दिया था। इसपर पीड़ित महिला ने तीन बार तलाक कहकर तलाक देने की प्रथा को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी थी।

 

निकाह के साल भर में ही दिया तलाक
आफरीन का निकाह 2014 में एक वकील के साथ इंदौर में हुआ था। साल भर के ही अंदर उसके पति ने उसे तलाक दे दिया और वह भी स्पीड पोस्ट के जरिए। आफरीन ने इसे नाइंसाफी करार देते हुए कहा था कि उसकी तलाक की इच्छा थी या नहीं, यह उससे एक बार भी नहीं पूछा गया। इस तरह चिट्ठी के जरिए तलाक लेना क्रूरता है।

 

प्रताड़ना का आरोप
शादी के कुछ महीने बाद ही कथित रूप से उसकी प्रताड़ना शुरू हो गई। दहेज की मांग और आए दिने मारपीट ने उसके वैवाहिक जीवन में जहर घोल दिया। शादी के एक साल के अंदर जब आफरीन अपने मायके गई थीं तो पति ने उनसे संपर्क बंद कर दिया। तीन महीने बाद उन्हें एक चिट्ठी भेज दी।

 

ऐसे भेजा तलाक
आफरीन ने बताया कि "मुझे स्पीड पोस्ट के ज़रिये 27 जनवरी 2016 को डायवोर्स का लेटर मिला था। इसमें लिखा था मेरा और तुम्हारा रिश्ता मुस्लिम कानून में अब नहीं रहा।" उन्होंने कहा कि कभी सपने में भी नहीं सोचा था कि कभी स्पीड पोस्ट से तलाक मिलेगा।

 

गुजारे के लिए नियमित राशि की मांग
आफरीन ने अब इस तलाक को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी। उनका कहना था कि वे अपने पति से समझौता करना चाहती थीं, लेकिन इस तरह के तलाक में महिलाओं के अधिकारों, इच्छाओं को पूरी तरह नजरअंदाज किया जाता है। वे चाहती थीं कि एक टाइम मैहर की रकम के आलावा उन्हें रेगुलर मेंटेनेंस भी मिले।

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