रोशनी में मनमानी, पैसे बचाने के चक्कर में सड़कों रोशनी 'कम'

—तय समय पर स्ट्रीट लाइटों की शिकातयों को भी नहीं हो रहा निस्तारण

By: Ashwani Kumar

Published: 26 Sep 2021, 01:19 PM IST

जयपुर। राजधानी की सड़कों पर सही तरह से रोशनी नहीं हो रही है। स्थिति यह है कि मानकों के अनुरूप कहीं पर भी रोशनी नहीं मिली। पत्रिका की टीम ने राजधानी के विभिन्न हिस्सों में जाकर रोशनी की जांच की। जनपथ पर लाइटें तो जलती मिलीं, लेकिन वहां पर अंधेरा रहता है। यहां सजावटी लाइटें लगी हुई हैं। महात्मा गांधी मार्ग पर जरूर रोशनी खूब दिखाई दी। यहां पर आला अधिकारियों के बंगले हैं तो कुछ के बाहर तो एक जगह पर दो स्ट्रीट लाइटें भी दिखाई दीं।

शहर को कम रोशनी में रख दोनों शहरी सरकारें ही आगे हैं। ऐसा कर करोड़ों रुपए का हर महीने राजस्व बचा रही हैं। एक अनुमान के मुताबिक अभी बिजली का बिल 4.5 करोड़ रुपए आता है। पहले यह आठ करोड़ रुपए के आस—पास आता है। हालांकि, निगम विद्युत शाखा के अधिकारियों का कहना है कि लाइट सेस अभी भी 15 पैसे ही मिलता है, जबकि बिजली की दरों में प्रति यूनिट चार रुपए तक का इंजाफा हो गया।
कई जगह तो नियमों के विपरीत जाकर भी लाइटों को लगाया गया है। यही वजह है कि पत्रिका की टीम को कम चौड़ाई वाली सड़क पर ज्यादा और चौड़ी सड़कों पर रोशनी कम मिली।

नियमों के मुताबिक कुछ भी नहीं
—दोनों ही नगर निगम में स्ट्रीट लाइटों को लेकर जो नियम बने हुए हैं, उनकी कोई पालना नहीं की जा रही है। इस मामले जेडीए बेहतर काम करता है। विधायकों और पार्षदों के कहने पर नियम विरुद्ध लाइटें लगवा दी जाती हैं।
—करीब 2500 स्ट्रीट शहर खराब हैं। इनको सही करने के लिए 11 टीमें ही काम कर रही हैं। बरसात के दिनों में स्ट्रीट लाइटों की शिकायतें बढ़ जाती हैं, लेकिन कोई सुनवाई नहीं होती।


ये है प्रावधान
सड़कों की श्रेणी — ये होनी चाहिए— ये मिली
मुख्य सड़कें— 15 से 20 — 07 से 21
कॉलोनी की सड़कें— 06 से 07 — 20 से 30
—जनपथ पर सात लक्स मीटर, पंचवटी सर्कल पर 40, गोनेर रोड पर 21, झालाना संस्थानिक क्षेत्र में तीन, महात्मा गांधी मार्ग पर 16, ग्रेटर निगम मुख्यालय के बाहर 92, जनपथ पर तीन, 22 गोदाम पुलिया पर 33, आम्रपाली मार्ग सात और नर्सरी सर्किल पर 276 लक्समीटर रोशनी मिली।

ये दिखाई दिया
—कई जगह पोल काफी ऊंचे थे और उनके ऊपर लाइटें लगी थीं। वहीं सड़कें ऐसी भी थीं, जहां पोल की ऊंचाई बहुत कम थी इस वजह से वहां सड़क पर रोशनी ज्यादा थी।
—निगम 18 से लेकर 110 वाट की लाइटों को लगाता है। लेकिन अभी हैरिटेज नगर निगम हर जगह 30 वाट की ही लाइट लगा रहा है। वहीं, ग्रेटर में भी ऐसा ही हाल है। कौन सी लाइट कहां लगनी है, इसमें विद्युत शाखा के अभियंताओं की मनमर्जी चलती है।

फैक्ट फाइल
—2.5 लाख स्ट्रीट लाइट लगी हैं राजधानी में दनों नगर निगम सीमा क्षेत्र में
—2700 से अधिक शिकायतें लम्बित हैं दोनों नगर निगम में
—45 फीसदी तक बजट की बचत होना हुई है शुरू एलईडी लगाने से

Ashwani Kumar Reporting
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