अधिकमास स्नान और कथाओं पर कोरोना का साया

adhik maas 2020 : अधिकमास को पुरुषोत्तम मास या मलमास भी कहा जाता है। इस महीने में भगवान सालिगराम का पूजन,अनुष्ठान, स्नान, दान-पुण्य, विभिन्न कथाओं का श्रवण करना बहुत ही फलदायी माना गया है। लेकिन इस बार कोरोना संक्रमण के कारण राजधानी जयपुर में बड़े स्तर पर कहीं पर भी कथाएं नहीं हो रही है।

By: Devendra Singh

Published: 20 Sep 2020, 10:43 PM IST

जयपुर। भगवान विष्णु की आराधना का प्रिय अधिकमास 18 सितंबर से शुरू हो गया है। अधिकमास यानि द्वितीय आश्विन कृष्ण अमावस्या 16 अक्टूबर तक रहेगा। अधिकमास को पुरुषोत्तम मास या मलमास भी कहा जाता है। इस महीने में भगवान सालिगराम का पूजन,अनुष्ठान, स्नान, दान-पुण्य, विभिन्न कथाओं का श्रवण करना बहुत ही फलदायी माना गया है। लेकिन इस बार कोरोना संक्रमण के कारण राजधानी जयपुर में बड़े स्तर पर कहीं पर भी कथाएं नहीं हो रही है। पहले अधिकमास में कम से कम तीन सौ से ज्यादा कथाएं तो राजधानी में ही हो जाया करती थी, लेकिन इस बार एक दो जगहों को छोड़ कर कही भी कथा नहीं हो रही। अब जयपुर सहित प्रदेश के 11 जिलों में धारा 144 लगने के बाद तो छोटे स्तर पर कथा होने की संभावनाएं भी खत्म हो गई है। कोरोना के कारण अधिकमास स्नान करने वाली महिलाएं भी घरों पर ही स्नान व पूजा-पाठ कर तुलसी को विष्णु स्वरूप मानकर परिक्रमा लगा रही है। इस बार कोरोना के कारण गलता तीर्थ में स्नान भी बंद है।

इस मास में सभी प्रकार के मांगलिक कार्य वर्जित माने गए है। कहा भी गया है।
यस्मिन चांद्रे न संक्रान्ति: सो अधिमासो निगह्यते
तत्र मंगल कार्यानि नैव कुर्यात कदाचन्।
अर्थात् जिस चन्द्र मास में सूर्य की कोई भी संक्रांति नहीं होती है, उसे अधिकमास कहते हैं। सूर्य की संक्रांति नहीं होने से इस मास में किसी भी तरह के शुभ कार्य, जैसे मुंडन, विवाह, गृहप्रवेश, नामकरण आदि नहीं किए जाते। इस महीने में भगवान सालिगराम का पूजन, दान-पुण्य, रामकथा, भागवत कथा आदि कथाओं का श्रवण करना बहुत ही फलदायी माना गया है।

अधिकमास में सूर्य संक्रांति नहीं होने के कारण यह महीना मलिन कहलाता है। इसलिए इसे मलमास भी कहा गया है। शास्त्रों के अनुसार मलिन मास होने के कारण कोई भी देवता इस मास का स्वामी नहीं होना चाहता था। तब मलमास ने भगवान विष्णु से प्रार्थना की। भगवान विष्णु ने मलमास की व्यथा सुनकर अपना श्रेष्ठ नाम पुरुषोत्तम प्रदान किया और वरदान दिया कि जो भी मनुष्य इस मास में जप-तप, दान पुण्य करेगा उसे कई गुणा अधिक फल मिलेगा। जिस प्रकार मैं इस लोक में पुरुषोत्तम के नाम से विख्यात हूं ठीक उसी प्रकार यह मलमास भी इस लोक में पुरुषोत्तम के नाम से प्रसिद्ध होगा। यह मास बाकी मासों का अधिकारी होगा और पूरे संसार में इसे पवित्र माना जाएगा। इस मास में मेरी पूजा करने वाले लोगों की दरिद्रता से मुक्ति मिलेगी और उनके घर सुख शांति बनी रहेगी।

Devendra Singh Reporting
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