नवरात्र में नहीं लगेंगे भक्तों के मेले, घर घर पधारेंगी मातारानी

shardiya navratri 2020 : शक्ति की आराधना के महापर्व शारदीय नवरात्र की शुरुआत कल से हो रही है। इसके साथ ही भगवान गोविन्द की नगरी नौ दिन शक्ति की उपासना में डूब जाएगी। नवरात्र के नौ दिनों तक मां भगवती की आराधना तो होगी, लेकिन इस साल कोविड 19 के कारण लगी धारा 144 के चलते नवरात्र में माता रानी के दरबार में भक्तों के मेले नहीं भरेंगे और न ही सार्वजनिक आयोजन होंगे।

By: Devendra Singh

Published: 16 Oct 2020, 10:25 PM IST

जयपुर। शक्ति की आराधना के महापर्व शारदीय नवरात्र की शुरुआत कल से हो रही है। इसके साथ ही भगवान गोविन्द की नगरी नौ दिन शक्ति की उपासना में डूब जाएगी। नवरात्र के नौ दिनों तक मां भगवती की आराधना तो होगी, लेकिन इस साल कोविड 19 के कारण लगी धारा 144 के चलते नवरात्र में माता रानी के दरबार में भक्तों के मेले नहीं भरेंगे और न ही सार्वजनिक आयोजन होंगे। इस साल नवरात्र में आठ दिन विशेष योग बन रहे है। जो मां भगवती की आराधना करने वाले भक्तों को विशेष फल देने वाले होंगे। साथ ही खरीदारी के लिए भी शुभ रहेंगे। इसमें सर्वार्थ सिद्धि योग, त्रिपुष्कर योग, कुमार योग, रवि योग का संयोग रहेगा।


आमेर स्थित शिला माता मंदिर में पं. बनवारीलाल शर्मा के सान्निध्य में सुबह 7 बजकर 05 मिनट पर घट स्थापना होगी। लेकिन कोरोना के कारण दर्शनार्थियों के लिए पट नहीं खुलेंगे। सुबह 8 से 8.15 बजे तक बालभोग लगेगा और 10 बजे माता की आरती होगी। सुबह 11 बजे राजभोग लगेगा और शाम 6.45 बजे संध्या आरती और रात 8.30 बजे शयन आरती होगी। इस बार पारंपरिक छठ का मेला भी नहीं भरेगा।

कनक घाटी स्थित मंदिर देवी श्रीमनसा माता में महंत अंजनकुमार गोस्वामी के सान्निध्य में सुबह 7.03 से 9.26 बजे के बीच घट स्थापना की जाएगी। प्रवक्ता मानस गोस्वामी ने बताया कि चंडीपाठ, शृंगार एवं पुष्पांजलि आदि कार्यक्रम होंगे। मानबाग स्थित राजराजेश्वरी, रामगंज स्थित रूद्रघंटेश्वरी, ब्रह्मपुरी स्थित गायत्री शक्तिपीठ, राजपार्क स्थित वैष्णो देवी मंदिर सहित सभी प्रमुख देवी मंदिरों में शुभ मुहूर्त में घट स्थापना होगी। मंदिरों में दुर्गा सप्तशती, दुर्गा चालिसा के पाठ होंगे।

नहीं भरेगा सप्तमी का मेला
दुर्गापुरा स्थिति दुर्गा माता के मंदिर में शनिवार सुबह 7 बजे महंत महेन्द्र भट्टाचार्य के सान्निध्य में विधि विधान पूर्वक घट स्थापना की जाएगी। इस बार मंदिर में भजन संध्या सहित किसी प्रकार का काई भी सार्वजनिक आयोजन नहीं होगा और न ही सप्तमी पर मेला भी नहीं भरेगा। 20 फीट की दूरी से दर्शन कर करेंगे। मंदिर में एक बार में पांच लोगों को दर्शनों के लिए प्रवेश दिया जाएगा। दर्शनों के लिए सुबह 6 से दोपहर 12 बजे तक एवं शाम 4 से रात 8 बजे तक मंदिर के पट खुले रहेंगे। सप्तमी के दिन महंत परिवार की ओर से मंदिर पर ध्वजा चढ़ाई जाएगी।

नहीं होगा पारंपरिक गरबा
सांगानेरी गेट के पास स्थित प्राचीन काली माता का मंदिर में शारदीय नवरात्र में हर साल होने वाला पारंपरिक गरबा का आयोजन नहीं होगा। मंदिर के महंत भुवनेश्वर प्रसाद व कलाप्रसाद ने बताया कि कोरोना गाइडलाइन की पालना में इस बार मंदिर में 50 साल से गुजराती समाज की ओर से होने वाला गरबा इस बार नहीं होगा। घट स्थापना के दिन ध्वजा रोहण में भी केवल सीमित लोगों को ही प्रवेश दिया जाएगा। इसके अलावा नौ दिन तक दर्शन की व्यवस्था चौक से ही रहेगी। इस दौरान सोशल डिस्टेंसिंग की पूरी पालना करवाई जाएगी।

Devendra Singh Reporting
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