जयपुर में ऐसी जगह पर बालश्रम पकडा कि टीम खुद सोच में पड गई... आज तक ऐसा नहीं हुआ

गौरतलब है कि इस साल जयपुर पुलिस और चाइल्ड लाइन की टीमों ने मिलकर जयपुर में सौ से भी ज्यादा जगहों पर बाल श्रम करने वाले बच्चों को बचाया। इनमें से अधिकतर को पढ़ाने के नाम पर जयपुर लाया गया था और उसके बाद इनको चंद रुपयों में कारखाना मालिकों को बेच दिया गया। इनको बेचे जाने के बाद कुछ दिनों तक तो माता—पिता से संपर्क में रखा गया उसके बाद बातचीत तक बंद करा दी गई। ऐसे बच्चों को आजाद कराकर इस साल करीब छह बार फिर से उनके राज्यों में भेजा गया है।

By: JAYANT SHARMA

Published: 26 Dec 2020, 01:00 PM IST

जयपुर
बच्चों से बाल श्रम कराने का एक नया मामला सामने आया है। इस बारे में जब पुलिस और चाइल्ड लाइन की टीम को पता चला तो वे भी दंग रह गए। दरअसल बच्चों से बार में बालश्रम कराया जा रहा था। वे शराब की बोतलें और गिलास उठा रहे थे और शराब परोस रहे थे। मामला झोटवाड़ा क्षेत्र का है। पुलिस ने बार मालिक पुष्पेन्द्र के खिलाफ मुकदमा दर्ज किया है। मुकदमा दर्ज कराने वाली चाइल्ड लाइन की मेंबर जया ने पुलिस को बताया कि सूचना के बाद जब वे वहां पहुंचे तो बच्चे अपने काम में लगे हुए थे।

बच्चों से बातचीत की तो पता चला कि उनको घर तक नहीं जाने दिया जाता और लगातार कई घंटों तक काम कराया जाता है। इस बारे में जब बार संचालक से बातचीत की तो वह भी जवाब नहीं दे सका। पुलिस ने जेजे एक्ट और बाल श्रम प्रतिशेध अधिनियम के तहत उसके खिलाफ मुकदमा दर्ज कर लिया। इससे एक दिन पहले ही जालूपुरा पुलिस ने कारखाने में काम करने वाले चार बच्चों को छुड़ाया था।

उनको पढ़ाने के बहाने और काम सिखाने के बहाने जयपुर लाया गया था। लेकिन यहां लाकर बंधक बना लिया गया और घंटों लगातार काम कराया गया। जब पुलिस ने बच्चों से बातचीत की तो बच्चे रोने लगे और पूरी कहानी सुनाई। पुलिस ने कारखाना मालिक को हाथों हाथ ही गिरफ्तार कर लिया। गौरतलब है कि इस साल जयपुर पुलिस और चाइल्ड लाइन की टीमों ने मिलकर जयपुर में सौ से भी ज्यादा जगहों पर बाल श्रम करने वाले बच्चों को बचाया। इनमें से अधिकतर को पढ़ाने के नाम पर जयपुर लाया गया था और उसके बाद इनको चंद रुपयों में कारखाना मालिकों को बेच दिया गया। इनको बेचे जाने के बाद कुछ दिनों तक तो माता—पिता से संपर्क में रखा गया उसके बाद बातचीत तक बंद करा दी गई। ऐसे बच्चों को आजाद कराकर इस साल करीब छह बार फिर से उनके राज्यों में भेजा गया है।

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